बंगाल विधानसभा में एंटी-गुंडा और OBC आरक्षण बिल पास

अगस्त में UCC बिल पेश होने की तैयारी, जस्टिस रंजना देसाई की अध्यक्षता में कमेटी कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा ने सोमवार को कानून-व्यवस्था और ओबीसी (OBC) आरक्षण से जुड़े चार महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कर दिया। इसके साथ ही राज्य में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की प्रक्रिया भी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री […]

Advertisement
Gauravshali Bharat
Gauravshali Bharat News
  • June 30, 2026 6:49 am IST, Published 2 hours ago

अगस्त में UCC बिल पेश होने की तैयारी, जस्टिस रंजना देसाई की अध्यक्षता में कमेटी

कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा ने सोमवार को कानून-व्यवस्था और ओबीसी (OBC) आरक्षण से जुड़े चार महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कर दिया। इसके साथ ही राज्य में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की प्रक्रिया भी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री ने जानकारी दी है कि यूसीसी का ड्राफ्ट 2 जुलाई को कैबिनेट के समक्ष रखा जाएगा और इसे अगस्त में विधानसभा में पेश किया जाएगा।

विधानसभा में ‘वेस्ट बंगाल पब्लिक सेफ्टी एंड कंट्रोल ऑफ एंटी-सोशल एक्टिविटीज बिल, 2026’ 176 मतों से पास हुआ। इस एंटी-गुंडा कानून के तहत जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस आयुक्त सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा माने जाने वाले असामाजिक तत्वों को बिना ट्रायल 12 महीने तक हिरासत में रखने का आदेश दे सकेंगे। इसके अलावा दंगे या हिंसा के दौरान सरकारी और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों से मुआवजा वसूला जाएगा और आवश्यकता पड़ने पर आरोपियों की संपत्ति जब्त कर नीलाम भी की जा सकती है।

ओबीसी आरक्षण से जुड़े दो संशोधन बिल भी भारी बहुमत (पक्ष में 186, विरोध में 17 वोट) से पास किए गए। कलकत्ता हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए बिना सर्वे के ओबीसी सूची में शामिल किए गए 113 समुदायों को हटा दिया गया है। नए सिरे से हुए सर्वे के आधार पर 66 समुदायों को सूची में जोड़ा गया है। अब विभिन्न श्रेणियों की जगह केवल ‘ओबीसी’ श्रेणी रहेगी और आरक्षण का प्रतिशत 17% से घटाकर 7% कर दिया गया है। राज्य सरकार और पिछड़ा वर्ग आयोग मिलकर इसका अंतिम प्रतिशत तय करेंगे, जिससे कुल आरक्षण 50% से अधिक न हो। सरकार का दावा है कि इस कदम से फर्जी ओबीसी प्रमाणपत्रों पर भी प्रभावी रोक लगेगी।

समान नागरिक संहिता (UCC) के तहत विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, संपत्ति के बंटवारे और गोद लेने जैसे मामलों में धार्मिक व्यक्तिगत कानूनों की जगह सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून लागू करने का प्रस्ताव है। यूसीसी का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए सुप्रीम कोर्ट की पूर्व महिला जज जस्टिस (रिटायर्ड) रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई गई है, जिसमें कानून और शिक्षा समेत विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ शामिल हैं। यह कमेटी एक महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। उत्तराखंड, गुजरात और असम के बाद पश्चिम बंगाल देश का चौथा राज्य बन सकता है जो यूसीसी बिल पारित करेगा।

Advertisement