देहरादून/बद्रीनाथ। अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे को लेकर उठे विवाद के बाद अब उत्तराखंड के विश्व प्रसिद्ध बद्रीनाथ धाम में भी चढ़ावे की कथित चोरी के आरोप सामने आए हैं। इस मामले ने धार्मिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। शिकायत मिलने के बाद बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। साथ ही मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज सुरक्षित रखने और उसकी जांच कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।
जानकारी के अनुसार, धार्मिक संगठन भैरव सेना ने बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति को एक लिखित शिकायत सौंपकर आरोप लगाया है कि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान और चढ़ावे के प्रबंधन में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। शिकायत में समिति के अध्यक्ष के निजी सहायक सहित कुछ कर्मचारियों की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं। संगठन ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
शिकायत प्राप्त होने के बाद BKTC के मुख्य कार्याधिकारी (CEO) सोहन सिंह रांगड़ ने तत्काल कार्रवाई करते हुए संबंधित कर्मचारियों को नोटिस जारी किया है। कर्मचारियों से तीन दिनों के भीतर लिखित जवाब मांगा गया है। अधिकारियों का कहना है कि सभी पक्षों का जवाब मिलने के बाद तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
मंदिर समिति ने स्पष्ट किया है कि किसी भी कर्मचारी को दोषी नहीं माना गया है और जांच पूरी होने तक सभी आरोप प्रारंभिक स्तर पर हैं। समिति का कहना है कि यदि जांच में किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता सामने आती है तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध नियमों के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए मंदिर परिसर में लगे सभी सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग सुरक्षित कर ली गई है। जांच टीम इन फुटेज का परीक्षण करेगी ताकि यह स्पष्ट हो सके कि शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है। आवश्यकता पड़ने पर तकनीकी विशेषज्ञों की भी मदद ली जा सकती है।
धार्मिक संगठनों का कहना है कि बद्रीनाथ धाम करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। ऐसे में चढ़ावे और दान की व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए। यदि किसी स्तर पर अनियमितता हुई है तो उसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए और दोषियों को दंडित किया जाना चाहिए, ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास बना रहे।
उधर, मंदिर समिति ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की अपुष्ट जानकारी या अफवाहों पर विश्वास न करें। समिति ने कहा कि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से कराई जाएगी तथा जो भी तथ्य सामने आएंगे, उन्हें सार्वजनिक किया जाएगा।
धार्मिक मामलों के जानकारों का मानना है कि देश के प्रमुख मंदिरों में हर वर्ष करोड़ों रुपये का दान और चढ़ावा आता है। ऐसे में उसके संग्रह, लेखा-जोखा और सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक आधुनिक एवं पारदर्शी बनाने की आवश्यकता है। डिजिटल रिकॉर्ड, नियमित ऑडिट और निगरानी प्रणाली को मजबूत करने से इस प्रकार के विवादों पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है।
गौरतलब है कि हाल के दिनों में देश के कई बड़े धार्मिक स्थलों पर चढ़ावे और दान के प्रबंधन को लेकर सवाल उठे हैं। इसी क्रम में बद्रीनाथ धाम का यह मामला भी चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि अभी तक किसी भी व्यक्ति के खिलाफ चोरी का आरोप जांच में सिद्ध नहीं हुआ है और पूरा मामला जांच प्रक्रिया में है।
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि जांच निष्पक्ष होगी और किसी भी स्तर पर लापरवाही या दोष पाए जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। वहीं यदि आरोप निराधार पाए जाते हैं तो संबंधित कर्मचारियों को भी उचित राहत दी जाएगी। जांच पूरी होने तक सभी पक्षों से संयम बनाए रखने की अपील की गई है।
फिलहाल पूरे मामले पर श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की नजर बनी हुई है। सभी को जांच रिपोर्ट का इंतजार है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि शिकायत में लगाए गए आरोप सही हैं या नहीं। BKTC का कहना है कि मंदिर की गरिमा, श्रद्धालुओं की आस्था और प्रशासनिक पारदर्शिता सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा किसी भी प्रकार की अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।