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इलाहाबाद हाई कोर्ट ने केंद्र और ASI से मांगा जवाब, सर्वे की मांग पर सुनवाई तेज

प्रयागराज: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने ताजमहल परिसर को कथित रूप से ‘तेजो महालय’ मंदिर बताए जाने से जुड़े विवाद में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI ) को जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने मामले के एक अन्य पक्षकार को भी नोटिस जारी कर […]

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  • July 6, 2026 5:00 pm IST, Published 3 hours ago

प्रयागराज: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने ताजमहल परिसर को कथित रूप से ‘तेजो महालय’ मंदिर बताए जाने से जुड़े विवाद में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI ) को जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने मामले के एक अन्य पक्षकार को भी नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने को कहा है।

यह मामला उस याचिका से जुड़ा है जिसमें ताजमहल परिसर का वैज्ञानिक सर्वेक्षण कराने और इसके लिए एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त किए जाने की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि विवादित परिसर की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए स्वतंत्र सर्वे और फोटोग्राफी आवश्यक है।

आगरा की सिविल अदालत में वर्ष 2015 से एक मूल वाद लंबित है। इस वाद में यह घोषणा किए जाने की मांग की गई है कि ताजमहल परिसर वास्तव में भगवान अग्रेश्वर महादेव नागनाथेश्वर का ‘तेजो महालय’ मंदिर है।

मुख्य मुकदमे की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने अदालत से अनुरोध किया था कि विवादित परिसर का वैज्ञानिक सर्वे कराया जाए और इसके लिए एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त किया जाए। हालांकि, सिविल जज (सीनियर डिवीजन) ने यह आवेदन खारिज कर दिया था।

इसके बाद इस आदेश को चुनौती देते हुए पुनरीक्षण याचिका दायर की गई, लेकिन अपर जिला न्यायाधीश ने भी इसे स्वीकार नहीं किया। अब इन्हीं दोनों आदेशों को इलाहाबाद हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि विवाद के निष्पक्ष और प्रभावी निस्तारण के लिए वैज्ञानिक सर्वेक्षण आवश्यक है। उनका तर्क है कि सर्वे और फोटोग्राफी से परिसर की वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी, जिससे न्यायालय को मामले के तथ्यों पर निर्णय लेने में सहायता मिलेगी।

मामले की प्रारंभिक सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को अपना जवाब हलफनामे के माध्यम से दाखिल करने का निर्देश दिया है। साथ ही संबंधित विपक्षी पक्ष को भी नोटिस जारी किया गया है। अब मामले की अगली सुनवाई में सभी पक्षों के जवाब के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी।

 

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