पटना: बिहार की राजनीति के बीच जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर को मानहानि के एक मामले में अदालत से नोटिस मिला है। अदालत ने उन्हें 28 जुलाई 2026 को स्वयं या अपने अधिवक्ता के माध्यम से उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित तिथि पर वे उपस्थित नहीं होते हैं तो मामले में एकतरफा सुनवाई (Ex-Parte Proceedings) आगे बढ़ाई जा सकती है।
यह मामला भारतीय जनता पार्टी के सांसद संजय जायसवाल द्वारा दायर मानहानि वाद से जुड़ा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि प्रशांत किशोर ने विभिन्न सार्वजनिक सभाओं, प्रेस कॉन्फ्रेंसों और अन्य मंचों से सांसद के खिलाफ ऐसे आरोप लगाए, जिससे उनकी सामाजिक और राजनीतिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा।
याचिकाकर्ता का कहना है कि लगाए गए आरोप निराधार हैं और उनकी सार्वजनिक छवि को प्रभावित करने वाले हैं। इसी आधार पर अदालत में मानहानि का मुकदमा दायर किया गया है। वाद में उन सार्वजनिक बयानों का उल्लेख किया गया है जिनमें प्रशांत किशोर द्वारा कथित रूप से—
सांसद संजय जायसवाल ने इन आरोपों को असत्य बताते हुए अदालत से कानूनी राहत की मांग की है। वहीं, इस मामले में प्रशांत किशोर की ओर से अदालत में विस्तृत जवाब अभी आना बाकी है।
इस घटनाक्रम के बीच बिहार के बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव ने प्रशांत किशोर की चुनावी संभावनाओं पर टिप्पणी करते हुए कहा कि चुनाव लड़ना सभी का अधिकार है, लेकिन उनकी पार्टी का आधार मुख्य रूप से सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों पर दिखाई देता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि जमीनी स्तर पर उनकी राजनीतिक पकड़ सीमित है।
दूसरी ओर, बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी ने बांकीपुर उपचुनाव में एनडीए की जीत का भरोसा जताते हुए कहा कि क्षेत्र में हुए विकास कार्यों के आधार पर मतदाता भाजपा के पक्ष में मतदान करेंगे। अब इस मामले में अगला महत्वपूर्ण चरण 28 जुलाई को होगा, जब अदालत में प्रशांत किशोर की उपस्थिति या उनके पक्ष की दलीलें सामने आ सकती हैं। इसके साथ ही बांकीपुर उपचुनाव के बीच यह मामला राजनीतिक चर्चाओं का भी विषय बना हुआ है।