लखनऊ: रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में यात्रियों की सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) ने एक व्यापक कार्ययोजना तैयार की है। इसके तहत अब रेलवे परिसर में काम करने वाले प्रत्येक संविदा (कॉन्ट्रैक्ट) कर्मचारी का सत्यापन कर फोटोयुक्त पहचान पत्र (आईडी कार्ड) जारी किया जाएगा। इस कदम का उद्देश्य असामाजिक तत्वों और संदिग्धों की आवाजाही पर रोक लगाना है।
संविदाकर्मियों की पहचान: रेलवे स्टेशनों और पटरियों के आस-पास काम करने वाले सभी अनुबंधित कर्मचारियों का आधिकारिक डेटाबेस तैयार होगा और उन्हें आईडी कार्ड दिए जाएंगे।
हर ट्रेन में जीआरपी स्कॉर्ट: यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी ट्रेनों में जीआरपी स्कॉर्ट तैनात करने की योजना है। हालांकि, बल की मौजूदा संख्या (5,941 कर्मी) को देखते हुए अतिरिक्त जवानों की भर्ती और तैनाती की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
नए अनुभाग और थाने: सुरक्षा का दायरा बढ़ाने के लिए गाजियाबाद और वाराणसी में दो नए अनुभाग बनाने का प्रस्ताव है, जिससे प्रदेश में कुल अनुभागों की संख्या 6 से बढ़कर 8 हो जाएगी। साथ ही, जीआरपी थानों की संख्या 65 से बढ़ाकर 80 करने की योजना है।
हाई-टेक सर्विलांस: प्रमुख स्टेशनों पर आधुनिक बैगेज स्कैनर, एक्स-रे मशीनें और सीसीटीवी कैमरों की स्थापना के साथ उनके नियमित संचालन को अनिवार्य किया जाएगा।
संगठित अपराधों पर शिकंजा: लूट और चोरी पर काफी हद तक लगाम कसने के बाद अब मादक पदार्थों, अवैध शराब, मानव तस्करी, वन्यजीवों के अवैध व्यापार और हवाला कारोबार पर विशेष नजर रखी जाएगी।
त्योहारों और आयोजनों पर विशेष सतर्कता: आगामी त्योहारों, मेलों और प्रतियोगी परीक्षाओं के दौरान उमड़ने वाली भारी भीड़ के मद्देनजर अन्य सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर अतिरिक्त बल तैनात किया जाएगा।