गंगा स्वच्छता की अनूठी पहल

उत्तरकाशी में नमामि गंगे के तहत विकसित सीवरेज नेटवर्क निभा रहा अहम भूमिका उद्गम स्थल से शुद्धता: राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) के अनुसार, उत्तराखंड के उत्तरकाशी में सीवरेज नेटवर्क गंगा की स्वच्छता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है [cite: राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) ने कहा है कि उत्तराखंड के उत्तरकाशी में […]

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  • July 11, 2026 7:42 am IST, Published 2 hours ago

उत्तरकाशी में नमामि गंगे के तहत विकसित सीवरेज नेटवर्क निभा रहा अहम भूमिका

उद्गम क्षेत्र से ही गंगा को स्वच्छ रखने का प्रयास

राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) ने बताया कि गंगा की शुद्धता उसके उद्गम क्षेत्र से ही सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है, ताकि नदी का स्वच्छ और अविरल प्रवाह निचले इलाकों तक बना रहे [cite: मिशन के अनुसार, गंगा की शुद्धता उसके उद्गम क्षेत्र से ही सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है, ताकि नदी का स्वच्छ और अविरल प्रवाह निचले इलाकों तक भी बना रहा है।]। एनएमसीजी के मुताबिक, यदि भागीरथी का जल स्रोत से ही स्वच्छ रहेगा, तो इसका लाभ ऋषिकेश, हरिद्वार, प्रयागराज और वाराणसी जैसे प्रमुख शहरों तक पहुंचेगा। हिमालयी क्षेत्र में नदी को प्रदूषण से बचाना पूरे गंगा बेसिन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

चुनौतियों को पार कर पूरी हुई परियोजना

मिशन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी दी कि गंगा की सुरक्षा की शुरुआत उसके उद्गम स्थल से ही होनी चाहिए  मिशन ने इंटरनेट मीडिया मंच एक्स पर कहा कि गंगा की सुरक्षा की शुरुआत उसके उद्गम स्थल से ही होनी चाहिए। उत्तरकाशी में सीवरेज नेटवर्क का पुनर्निर्माण बेहद चुनौतीपूर्ण था क्योंकि प्राकृतिक आपदाओं के कारण बुनियादी ढांचा क्षतिग्रस्त हो चुका था [cite: मिशन के अनुसार, उत्तरकाशी में सीवरेज नेटवर्क का पुनर्निर्माण चुनौतीपूर्ण था। प्राकृतिक आपदाओं से बुनियादी ढांचा क्षतिग्रस्त हो चुका था, जबकि पहाड़ी ढलानों, सीमित स्थान और कठोर चट्टानों के कारण निर्माण कार्य भी कठिन था।]। पहाड़ी ढलानों, सीमित स्थान और कठोर चट्टानों जैसी कठिन परिस्थितियों के बावजूद 2015 में शुरू हुई इस परियोजना को 2017 में गति दी गई : इसके बावजूद 2015 में शुरू हुई परियोजना को 2017 में गति दी गई और 2018 में ग्यासू स्थित दो एमएलडी क्षमता वाले सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का उन्नयन पूरा किया गया।

अब शहर का सारा अपशिष्ट जल पूरी तरह शोधन (ट्रीटमेंट) के बाद ही भागीरथी नदी में छोड़ा जा रहा है  करीब 15 करोड़ रुपये की लागत से दोनों स्वीकृत परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं। अब शहर का अपशिष्ट जल शोधन के बाद ही भागीरथी में छोड़ा जा रहा है।]। एनएमसीजी का मानना है कि स्रोत पर नदी की स्वच्छता सुनिश्चित करना संपूर्ण गंगा की पारिस्थितिकी और जल गुणवत्ता की रक्षा की दिशा में एक मिल का पत्थर साबित होगा।

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