CM धामी के 5 साल: कैसे बदली चंपावत की तस्वीर, जानिए

देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य की राजनीति और विकास की दिशा में पिछले पांच वर्षों में कई महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिले हैं। खासकर मुख्यमंत्री बनने के बाद जब उन्होंने चंपावत विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर प्रदेश की राजनीति में अपनी मजबूत पकड़ बनाई, तब से इस सीमावर्ती जिले […]

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  • July 10, 2026 3:00 pm IST, Published 33 minutes ago

देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य की राजनीति और विकास की दिशा में पिछले पांच वर्षों में कई महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिले हैं। खासकर मुख्यमंत्री बनने के बाद जब उन्होंने चंपावत विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर प्रदेश की राजनीति में अपनी मजबूत पकड़ बनाई, तब से इस सीमावर्ती जिले के विकास को नई गति मिली। सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन, रोजगार और आधारभूत सुविधाओं के क्षेत्र में कई ऐसी परियोजनाएं शुरू हुईं, जिन्होंने चंपावत की तस्वीर बदलने का दावा किया है।

मुख्यमंत्री धामी ने अपने कार्यकाल के दौरान बार-बार यह स्पष्ट किया कि सीमांत क्षेत्रों का विकास राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी सोच के तहत चंपावत जिले में अनेक विकास योजनाओं को स्वीकृति दी गई। वर्षों से लंबित सड़क परियोजनाओं को गति मिली, ग्रामीण क्षेत्रों तक बेहतर संपर्क मार्ग बनाए गए और कई पुलों का निर्माण कराया गया। इससे स्थानीय लोगों की आवाजाही आसान हुई और व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिला।

पर्यटन के क्षेत्र में भी चंपावत को नई पहचान दिलाने की दिशा में कई प्रयास किए गए। जिले के ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों को विकसित करने के लिए विशेष योजनाएं तैयार की गईं। होमस्टे योजना के विस्तार, पर्यटन सुविधाओं के विकास और स्थानीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार से रोजगार के नए अवसर भी पैदा हुए। सरकार का मानना है कि पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था से सीमांत जिलों की आर्थिक स्थिति और मजबूत होगी।

शिक्षा के क्षेत्र में विद्यालयों के आधुनिकीकरण, डिजिटल शिक्षा, स्मार्ट क्लास और शिक्षकों की नियुक्ति जैसे कदम उठाए गए। कई सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार किया गया, जिससे ग्रामीण विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा का वातावरण मिल सके। उच्च शिक्षा संस्थानों के विकास और कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों पर भी विशेष जोर दिया गया।

स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए जिला अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार किया गया। आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराए गए तथा डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों की तैनाती बढ़ाने के प्रयास किए गए। दूरस्थ क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए मोबाइल मेडिकल यूनिट जैसी योजनाओं को भी बढ़ावा दिया गया।

रोजगार और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने विभिन्न योजनाओं का विस्तार किया। युवाओं के लिए कौशल विकास कार्यक्रम, स्वरोजगार योजनाएं, महिला स्वयं सहायता समूहों को वित्तीय सहायता तथा कृषि और बागवानी से जुड़े कार्यक्रमों को प्रोत्साहित किया गया। स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के लिए भी कई पहल की गईं।

मुख्यमंत्री धामी के कार्यकाल में धार्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया गया। मानसखंड कॉरिडोर जैसी योजनाओं ने कुमाऊं क्षेत्र के धार्मिक महत्व को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने का प्रयास किया। इससे चंपावत सहित आसपास के क्षेत्रों में पर्यटकों की संख्या बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।

इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास के तहत पेयजल योजनाओं, विद्युत आपूर्ति, इंटरनेट कनेक्टिविटी और ग्रामीण विकास परियोजनाओं को भी प्राथमिकता दी गई। सरकार का दावा है कि इन योजनाओं से ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन स्तर में सुधार हुआ है और डिजिटल सेवाओं की पहुंच बढ़ी है।

राजनीतिक दृष्टि से भी मुख्यमंत्री धामी का कार्यकाल कई महत्वपूर्ण फैसलों के लिए चर्चा में रहा। समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में पहल, नकल विरोधी कानून, निवेश को बढ़ावा देने वाली नीतियां और प्रशासनिक सुधार जैसे कदमों ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा में रखा। राज्य सरकार का कहना है कि इन फैसलों का उद्देश्य उत्तराखंड को सुशासन और विकास का मॉडल बनाना है।

हालांकि विपक्ष सरकार के विकास दावों पर सवाल भी उठाता रहा है। विपक्ष का आरोप है कि रोजगार, पलायन और महंगाई जैसे मुद्दों पर अभी भी व्यापक सुधार की आवश्यकता है। वहीं सरकार का कहना है कि सीमित संसाधनों के बावजूद विकास कार्य लगातार जारी हैं और आने वाले वर्षों में इनके और बेहतर परिणाम सामने आएंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि सीमांत जिले चंपावत का विकास केवल स्थानीय स्तर पर ही नहीं बल्कि रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। बेहतर सड़क, संचार और पर्यटन सुविधाएं राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के साथ-साथ सीमावर्ती क्षेत्रों में बसावट और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा देती हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के पांच वर्षों के कार्यकाल को लेकर राजनीतिक विश्लेषकों की राय अलग-अलग हो सकती है, लेकिन यह स्पष्ट है कि चंपावत को विकास की मुख्यधारा में लाने के लिए अनेक परियोजनाओं पर काम हुआ है। आने वाले समय में इन योजनाओं का वास्तविक प्रभाव रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यटन के क्षेत्र में किस स्तर तक दिखाई देता है, इस पर सभी की नजरें बनी रहेंगी। उत्तराखंड की राजनीति में धामी का नेतृत्व और चंपावत के विकास की कहानी आगामी चुनावी समीकरणों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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