पुणे: महाराष्ट्र के पुणे में आयोजित ‘लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार 2026’ समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक के बहुआयामी व्यक्तित्व और उनके राष्ट्रनिर्माण में योगदान को याद किया। इस अवसर पर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल को वर्ष 2026 का प्रतिष्ठित ‘लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार’ प्रदान किया गया। समारोह में विभिन्न क्षेत्रों की कई प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं।
अपने संबोधन में अमित शाह ने कहा कि लोकमान्य तिलक केवल स्वतंत्रता आंदोलन के अग्रदूत ही नहीं थे, बल्कि वे एक उत्कृष्ट शिक्षक, निर्भीक पत्रकार और दूरदर्शी चिंतक भी थे। उन्होंने कहा कि तिलक का जीवन इस बात का उदाहरण है कि शिक्षा, विचार और पत्रकारिता किसी भी राष्ट्र की दिशा तय करने में कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
गृह मंत्री ने कहा कि लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय शिक्षा के प्रबल समर्थक थे। उनका मानना था कि शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि राष्ट्रभक्ति, आत्मसम्मान और सामाजिक चेतना का विकास करना भी होना चाहिए। उन्होंने भारतीय मूल्यों पर आधारित शिक्षा व्यवस्था का समर्थन किया और युवाओं में राष्ट्रीय चेतना जगाने का निरंतर प्रयास किया।
अमित शाह ने तिलक की पत्रकारिता का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी लेखनी में असाधारण साहस और स्पष्टता दिखाई देती थी। उन्होंने कहा कि तिलक द्वारा संपादित समाचार पत्र ‘केसरी’ के संपादकीय आज भी इस बात का प्रमाण हैं कि पत्रकारिता सत्ता से सवाल पूछने और समाज को जागरूक करने का प्रभावी माध्यम हो सकती है। उन्होंने कहा कि निर्भीक पत्रकारिता लोकतंत्र की मजबूती का आधार होती है और लोकमान्य तिलक इसका प्रेरणादायक उदाहरण हैं।
गृह मंत्री ने यह भी कहा कि लोकमान्य तिलक ने भारतीय संस्कृति, सभ्यता और राष्ट्र की आत्मा को वैश्विक मंच पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। उनके विचार केवल स्वतंत्रता आंदोलन तक सीमित नहीं थे, बल्कि उन्होंने भारतीय समाज को आत्मविश्वास, स्वाभिमान और सांस्कृतिक गौरव का संदेश भी दिया। उनके योगदान ने आने वाली पीढ़ियों के लिए राष्ट्रनिर्माण का मजबूत आधार तैयार किया।
समारोह का मुख्य आकर्षण राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को ‘लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार 2026’ से सम्मानित किया जाना रहा। यह सम्मान उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा, रणनीतिक नीति और देश की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में उनके योगदान के लिए प्रदान किया गया। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि देश की सुरक्षा और रणनीतिक हितों की रक्षा में डोभाल की भूमिका महत्वपूर्ण रही है।
समारोह में मौजूद लोगों ने लोकमान्य तिलक के विचारों और आदर्शों को आज भी प्रासंगिक बताते हुए कहा कि राष्ट्रहित, शिक्षा, सामाजिक जागरूकता और जिम्मेदार पत्रकारिता जैसे मूल्य आधुनिक भारत के विकास में समान रूप से आवश्यक हैं। वक्ताओं ने युवाओं से तिलक के जीवन और विचारों से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया।
इस आयोजन ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि भारत के स्वतंत्रता सेनानियों की वैचारिक विरासत आज भी देश के लोकतांत्रिक, सामाजिक और राष्ट्रीय जीवन को दिशा देने का काम कर रही है। लोकमान्य तिलक के आदर्श और राष्ट्रीय दृष्टि आने वाले समय में भी नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत बने रहेंगे।