साहित्य भारती सम्मान से अलंकृत

दिल्ली। दिल्ली की सुप्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. कविता सिंह ‘प्रभा’ को उनके अप्रतिम साहित्यिक योगदान, हिंदी साहित्य के प्रचार-प्रसार, उत्कृष्ट सृजन और संपादन हेतु जर्मनी में सम्मानित किया गया। इससे देश का साहित्य जगत गौरवान्वित महसूस कर रहा है। ज्ञात हो कि जर्मनी के फ्रेंकफर्ट में वैश्विक हिंदी परिवार, वैश्विक हिंदी शाला और सृजनी जर्मनी के […]

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  • July 11, 2026 6:30 pm IST, Published 1 hour ago

दिल्ली। दिल्ली की सुप्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. कविता सिंह ‘प्रभा’ को उनके अप्रतिम साहित्यिक योगदान, हिंदी साहित्य के प्रचार-प्रसार, उत्कृष्ट सृजन और संपादन हेतु जर्मनी में सम्मानित किया गया। इससे देश का साहित्य जगत गौरवान्वित महसूस कर रहा है। ज्ञात हो कि जर्मनी के फ्रेंकफर्ट में वैश्विक हिंदी परिवार, वैश्विक हिंदी शाला और सृजनी जर्मनी के संयुक्त तत्वावधान में बीती शाम आयोजित पुस्तक विमोचन सह सम्मान समारोह में देश की नामचीन साहित्यकार डॉ. कविता सिंह ‘प्रभा’ को ‘साहित्य भारती सम्मान’ से सम्मानित किया गया। सम्मानित करने वालों में वैश्विक हिंदी परिवार के संस्थापक, सुप्रसिद्ध साहित्यकार व भाषाविद् अनिल जोशी, वैश्विक हिंदी शाला व सृजनी जर्मनी की संस्थापक, शिक्षाविद् व वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. शिप्रा शिल्पी सक्सेना, श्रीमती सरोज जोशी जी व श्री अखिलेश कुमार सिंह जी शामिल थे।

  • जर्मनी में सम्मानित की गईं दिल्ली की साहित्यकार डॉ. कविता सिंह ‘प्रभा’
  • कवयित्री डॉ. प्रभा की पुस्तक ‘ज्योतित स्वर’ का जर्मनी में विमोचन

इस अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकारों ने सुप्रसिद्ध कवयित्री डॉ. कविता सिंह ‘प्रभा’ रचित कुण्डलिया छंद संग्रह ‘ज्योतित स्वर’ का वैश्विक विमोचन किया। जिस अवसर पर साहित्य, भाषा और साहित्यिक पुस्तकों का सम्मान होता है, वह पल पवित्र पर्व बन जाता है। अनुष्ठान बन जाता है। वैश्विक हिंदी परिवार के संस्थापक अनिल जोशी ने कहा कि अब हिंदी साहित्य और भाषा देश की दीवारों को लाँघ चुकी है। चूँकि हिंदी भाषा व साहित्य वसुधैव कुटुम्बकम् और सर्वे भवन्तु सुखिन: का उद्घोष करते हैं यही कारण कि जर्मनी में हिंदी भाषा अनेक शैक्षिक संस्थानों में पढ़ाई जा रही है।

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वैश्विक हिंदी शाला व सृजनी जर्मनी की संस्थापक डॉ. शिप्रा शिल्पी ने कहा कि भारत की सुप्रसिद्ध साहित्यकार डॉ कविता सिंह प्रभा की यह ‘ ज्योतित स्वर’ आठवीं पुस्तक है। इसमें प्रेरक और उत्कृष्ट कुण्डलियां छंद संग्रहित हैं। इससे पूर्व- कविता प्रभा: मुस्कान ज़िंदगी की, मैं स्त्री हूँ, हृदय के दर्पण से, वसुधा वंदन, वृक्ष: चेतना के मौन स्वर, दिशाएँ ज़िंदगी की, गीत प्रभा, उम्मीदों के पंख, सुनी है आहट, मुट्ठी भर आसमां, एक टुकड़ा धूप जैसी कालजई पुस्तकें डॉ. प्रभा ने हिंदी साहित्य को समर्पित कीं हैं।

मालूम हो कि यशस्वी लेखिका डॉ. कविता सिंह ‘प्रभा’ जर्मनी से पूर्व मॉरीशस, नेपाल में भी अंतरराष्ट्रीय स्तर के सम्मान से सम्मानित हो चुकी हैं। इन्हें देश के कई राज्यों में भी हिंदी साहित्य में उल्लेखनीय योगदान हेतु पुरस्कृत किया गया है।

ये कविता प्रभा राष्ट्रीय साहित्य समूह (रजि.) की संस्थापक अध्यक्ष और कविता प्रभा ई-पत्रिका, दिल्ली की प्रधान संपादक हैं। संचेतना संगम पत्रिका, आगरा की सह संपादक हैं।

जर्मनी में डॉ. प्रभा के सम्मानित होने पर संपादक अशोक अश्रु विद्यासागर, साहित्यकार ज्ञानचंद मर्मज्ञ, उमंग जौली सरीन, डॉ अंजू क्वात्रा, प्रीति द्विवेदी, अर्चना जैन, डॉ सुषमा श्रीवास्तव, मंजू लता, अखिलेश कुमार सिंह, राजीव गौतम, कामेश्वर कुमार कामेश, उर्मिला ध्यावाला, मधु खोवाला, प्रकाश मित्रवत, सरिता सिंह, सूरज कांत, संजय गुप्त, मृत्युंजय कुमार श्रीवास्तव, सुभाष सिंह आदि ने शुभकामनाएँ देते हुए कहा है कि यह भारत के साहित्य जगत के लिए गौरव की बात है।

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