गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में शनिवार को एक बड़ा हादसा उस समय टल गया, जब मेरठ रोड पर चल रही एक स्कूल बस में अचानक भीषण आग लग गई। देखते ही देखते आग ने पूरी बस को अपनी चपेट में ले लिया और कुछ ही मिनटों में बस आग के गोले में तब्दील हो गई। राहत की बात यह रही कि घटना के समय बस में कोई छात्र सवार नहीं था। चालक और बस स्टाफ ने समय रहते बस से बाहर निकलकर अपनी जान बचा ली। सूचना मिलते ही दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं और काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार घटना मेरठ रोड पर हुई, जहां सामान्य दिनों की तरह यातायात चल रहा था। अचानक लोगों ने सड़क पर दौड़ती स्कूल बस से धुआं निकलते देखा। कुछ ही पलों में धुआं घने काले गुबार में बदल गया और बस के अगले हिस्से से तेज लपटें उठने लगीं। चालक ने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए तुरंत बस को सड़क किनारे रोक दिया और स्टाफ के साथ सुरक्षित बाहर निकल आया।
कुछ ही मिनटों में आग इतनी तेजी से फैल गई कि पूरी बस लपटों से घिर गई। सड़क पर मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। कई वाहन चालकों ने अपने वाहन रोक दिए, जबकि कुछ लोगों ने मोबाइल फोन से घटना का वीडियो बनाना शुरू कर दिया। आग से उठता काला धुआं दूर-दूर तक दिखाई दे रहा था, जिससे आसपास के इलाके में भी दहशत का माहौल बन गया।
स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस और दमकल विभाग को सूचना दी। सूचना मिलते ही दमकल विभाग की दो गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग बुझाने का अभियान शुरू किया। दमकल कर्मियों ने करीब आधे घंटे की मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह काबू पा लिया। हालांकि तब तक बस का अधिकांश हिस्सा जलकर क्षतिग्रस्त हो चुका था।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार घटना के समय स्कूल बस छात्रों को लेकर नहीं जा रही थी। यदि बस में बच्चे मौजूद होते तो स्थिति बेहद गंभीर हो सकती थी। समय रहते बस खाली होने और चालक की सूझबूझ के कारण एक बड़ा हादसा टल गया। इस घटना के बाद अभिभावकों और स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली।
पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और बस को सड़क से हटाकर यातायात सामान्य कराया। आग लगने के कारणों का अभी तक स्पष्ट पता नहीं चल पाया है। शुरुआती आशंका शॉर्ट सर्किट या तकनीकी खराबी की जताई जा रही है, लेकिन वास्तविक कारण जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
दमकल अधिकारियों ने बताया कि आग की सूचना मिलते ही टीम तुरंत मौके पर पहुंची और प्राथमिकता के आधार पर आग को आसपास के वाहनों और पेड़ों तक फैलने से रोका गया। यदि आग समय रहते नियंत्रित नहीं होती तो आसपास खड़े अन्य वाहन भी इसकी चपेट में आ सकते थे।
इस घटना ने एक बार फिर स्कूल वाहनों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि स्कूल बसों का नियमित तकनीकी निरीक्षण, वायरिंग की जांच, इंजन की सर्विसिंग और अग्निशमन यंत्रों की उपलब्धता अनिवार्य होनी चाहिए। साथ ही चालक और परिचालकों को आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने का प्रशिक्षण भी समय-समय पर दिया जाना चाहिए।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क पर अचानक लगी इस आग ने कुछ समय के लिए यातायात को प्रभावित किया। पुलिस ने तत्काल ट्रैफिक को डायवर्ट कर स्थिति को नियंत्रित किया, जिससे किसी अन्य दुर्घटना की संभावना नहीं रही।
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि किसी भी वाहन से धुआं निकलने, जलने की गंध आने या तकनीकी खराबी का संकेत मिलने पर तुरंत वाहन रोककर सुरक्षित स्थान पर पहुंचें और संबंधित विभाग को सूचना दें। इससे बड़ी दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है।
फिलहाल पुलिस और दमकल विभाग संयुक्त रूप से मामले की जांच कर रहे हैं। बस के तकनीकी रिकॉर्ड, मेंटेनेंस रिपोर्ट और अन्य पहलुओं की भी जांच की जाएगी ताकि आग लगने के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके। जांच रिपोर्ट आने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
इस घटना में किसी के हताहत न होने से प्रशासन ने राहत की सांस ली है। हालांकि यह हादसा स्कूल परिवहन व्यवस्था से जुड़े सभी पक्षों के लिए एक गंभीर चेतावनी भी है कि वाहनों की नियमित जांच और सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन किया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके।