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बारिश, खुला नाला और करंट… नोएडा में एक और इंजीनियर की दर्दनाक मौत

नोएडा: उत्तर प्रदेश के नोएडा में बारिश के बीच एक बार फिर लापरवाही ने एक युवा इंजीनियर की जान ले ली। सेक्टर-58 ए ब्लॉक क्षेत्र में जलभराव और खुले नाले के पास फैले करंट की चपेट में आने से एक इंजीनियर की दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना ने नोएडा प्राधिकरण और बिजली विभाग की […]

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  • July 11, 2026 3:00 pm IST, Published 1 hour ago

नोएडा: उत्तर प्रदेश के नोएडा में बारिश के बीच एक बार फिर लापरवाही ने एक युवा इंजीनियर की जान ले ली। सेक्टर-58 ए ब्लॉक क्षेत्र में जलभराव और खुले नाले के पास फैले करंट की चपेट में आने से एक इंजीनियर की दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना ने नोएडा प्राधिकरण और बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षेत्र में लंबे समय से जलनिकासी, खुले नाले और बिजली के खंभों से जुड़े सुरक्षा इंतजामों की अनदेखी की जा रही थी।

घटना के बाद इलाके में लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन के खिलाफ विरोध जताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की। लगातार हो रही ऐसी घटनाओं ने शहर में सार्वजनिक सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

कैसे हुआ हादसा?

जानकारी के अनुसार, गुरुवार सुबह सेक्टर-58 ए ब्लॉक में बारिश के कारण सड़क पर जलभराव हो गया था। इसी दौरान युवा इंजीनियर अपने गंतव्य की ओर पैदल जा रहे थे। सड़क किनारे बने नाले की स्लैब पर चलते समय उनका पैर फिसल गया और वे बिजली के खंभे के संपर्क में आ गए।

बताया जा रहा है कि खंभे में करंट उतर आया था। पानी भरे होने के कारण करंट तेजी से फैला और इंजीनियर उसकी चपेट में आ गए। आसपास मौजूद लोगों ने उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन करंट अधिक होने के कारण कोई पास नहीं जा सका। बाद में बिजली आपूर्ति बंद कर उन्हें बाहर निकाला गया और अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

प्रत्यक्षदर्शियों ने क्या बताया?

प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि बारिश के दौरान इलाके में अक्सर जलभराव हो जाता है। कई बार बिजली के खंभों में करंट आने की शिकायत भी की गई थी, लेकिन संबंधित विभागों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। लोगों का आरोप है कि यदि समय रहते सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जाती और खुले नाले को सुरक्षित किया जाता तो यह हादसा टाला जा सकता था।

नोएडा प्राधिकरण पर उठे सवाल

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि शहर में करोड़ों रुपये विकास कार्यों पर खर्च किए जाते हैं, लेकिन बुनियादी सुविधाओं और सुरक्षा मानकों की अनदेखी लगातार जारी है। खुले नाले, टूटी स्लैब, जलभराव और बिजली के असुरक्षित ढांचे कई इलाकों में खतरा बने हुए हैं।

लोगों ने मांग की है कि पूरे शहर में बिजली के खंभों की जांच कराई जाए, खुले नालों को सुरक्षित किया जाए और बारिश के मौसम में विशेष सुरक्षा अभियान चलाया जाए।

बिजली विभाग भी सवालों के घेरे में

हादसे के बाद बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बिजली के खंभों की नियमित अर्थिंग और तकनीकी जांच होती रहती तो इस प्रकार की दुर्घटनाओं की संभावना काफी कम हो सकती थी।

बारिश के मौसम में बिजली के उपकरणों की विशेष निगरानी आवश्यक होती है। ऐसे में संबंधित विभागों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है।

पुलिस ने शुरू की जांच

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और तकनीकी जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

यदि जांच में किसी विभाग या अधिकारी की लापरवाही सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

लोगों में आक्रोश

घटना के बाद क्षेत्र के लोगों ने प्रशासन से जवाब मांगा। नागरिकों का कहना है कि हर बारिश के बाद ऐसी घटनाएं सामने आती हैं, लेकिन हादसों से कोई सबक नहीं लिया जाता। उनका कहना है कि शहर में सुरक्षित इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।

स्थानीय लोगों ने मृतक के परिवार को आर्थिक सहायता देने और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग भी की है।

पहले भी हो चुके हैं ऐसे हादसे

नोएडा और एनसीआर में बारिश के दौरान करंट लगने और जलभराव के कारण कई लोगों की जान जा चुकी है। विशेषज्ञों का कहना है कि खुले बिजली के तार, खराब अर्थिंग, क्षतिग्रस्त बिजली के खंभे और जलभराव मिलकर गंभीर खतरा पैदा करते हैं।

बारिश के मौसम में लोगों को भी सावधानी बरतनी चाहिए और जलभराव वाले क्षेत्रों, खुले नालों तथा बिजली के खंभों से दूरी बनाए रखनी चाहिए।

प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती

यह हादसा केवल एक व्यक्ति की मौत का मामला नहीं, बल्कि शहर की सार्वजनिक सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल है। यदि समय रहते सुरक्षा उपाय नहीं किए गए तो भविष्य में भी ऐसी घटनाएं दोहराई जा सकती हैं।

अब सभी की नजर इस बात पर है कि जांच के बाद क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी और क्या नोएडा में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे। मृतक इंजीनियर की असमय मौत ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर नागरिकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है और ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कब प्रभावी कार्रवाई होगी।

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