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सिर्फ 20 हजार में 95% नंबर! यूपी बोर्ड में मार्क्स बढ़ाने का बड़ा खुलासा

प्रयागराज। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UPMSP) की बोर्ड परीक्षाओं को लेकर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। दावा किया जा रहा है कि कुछ बिचौलियों और कथित नेटवर्क के माध्यम से छात्रों के अंकों में हेरफेर कराने का खेल चल रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक स्टिंग ऑपरेशन में आरोप […]

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  • July 15, 2026 1:00 am IST, Published 56 seconds ago

प्रयागराज। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UPMSP) की बोर्ड परीक्षाओं को लेकर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। दावा किया जा रहा है कि कुछ बिचौलियों और कथित नेटवर्क के माध्यम से छात्रों के अंकों में हेरफेर कराने का खेल चल रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक स्टिंग ऑपरेशन में आरोप लगाया गया है कि 12वीं की मार्कशीट में नंबर बढ़ाने के लिए प्रति छात्र 20 हजार रुपये तक की मांग की जा रही थी। इतना ही नहीं, दो विषयों में अंक बढ़ाने के लिए अलग-अलग रेट भी तय बताए गए हैं।

इस मामले ने प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था, बोर्ड परीक्षाओं की पारदर्शिता और छात्रों के भविष्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि संबंधित जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

स्टिंग ऑपरेशन में क्या सामने आया?

वायरल रिपोर्ट के अनुसार, एक कथित डेटा एंट्री ऑपरेटर बताने वाले व्यक्ति ने दावा किया कि वह बोर्ड परीक्षा के अंकों में बदलाव करा सकता है। बातचीत के दौरान उसने अलग-अलग सेवाओं के लिए अलग-अलग रकम बताई। आरोप है कि यदि छात्र या अभिभावक अधिक अंक चाहते हैं तो इसके लिए मोटी रकम वसूली जाती है।

रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि कुछ मामलों में 20 हजार रुपये लेकर 95 प्रतिशत तक अंक दिलाने का भरोसा दिया गया। हालांकि, यह दावा स्टिंग में शामिल व्यक्तियों के कथनों पर आधारित है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

बोर्ड कार्यालयों तक पहुंचने के आरोप

रिपोर्ट के अनुसार, जांच के दौरान प्रयागराज स्थित यूपी बोर्ड मुख्यालय और गोरखपुर क्षेत्रीय कार्यालय से जुड़े कुछ लोगों तक पहुंचने की कोशिश की गई। आरोप है कि इस पूरे नेटवर्क में बिचौलियों की भूमिका महत्वपूर्ण है, जो छात्रों और कथित कर्मचारियों के बीच संपर्क स्थापित करते हैं।

यदि जांच में ये आरोप सही साबित होते हैं तो यह प्रदेश की सबसे बड़ी परीक्षा संबंधी अनियमितताओं में से एक माना जाएगा।

शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

उत्तर प्रदेश बोर्ड देश के सबसे बड़े परीक्षा बोर्डों में शामिल है। हर वर्ष लाखों छात्र हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा देते हैं। ऐसे में यदि अंकों में हेरफेर जैसी गतिविधियां होती हैं तो इसका सीधा असर मेहनत करने वाले विद्यार्थियों पर पड़ता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए पारदर्शी मूल्यांकन, मजबूत डिजिटल सुरक्षा और नियमित निगरानी बेहद आवश्यक है। यदि किसी स्तर पर भ्रष्टाचार या लापरवाही होती है तो इसका नुकसान पूरी शिक्षा व्यवस्था को उठाना पड़ता है।

छात्रों और अभिभावकों में चिंता

इस खुलासे के बाद छात्रों और अभिभावकों के बीच चिंता बढ़ गई है। कई लोगों का कहना है कि यदि पैसे देकर अंक बढ़ाने जैसी घटनाएं सच हैं तो ईमानदारी से पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों के साथ अन्याय होगा।

शिक्षा विशेषज्ञों ने भी निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा है कि दोषी चाहे कोई भी हो, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

साइबर और डिजिटल सुरक्षा की जरूरत

पिछले कुछ वर्षों में बोर्ड परीक्षाओं की कई प्रक्रियाएं डिजिटल हुई हैं। मार्क्स अपलोड करने से लेकर रिजल्ट जारी करने तक अधिकांश काम ऑनलाइन सिस्टम के माध्यम से किए जाते हैं। ऐसे में डिजिटल सुरक्षा को और मजबूत बनाना आवश्यक है।

विशेषज्ञों का सुझाव है कि बोर्ड को मल्टी-लेयर वेरिफिकेशन, लॉग मॉनिटरिंग, ऑडिट ट्रेल और नियमित साइबर ऑडिट जैसी व्यवस्थाओं को और प्रभावी बनाना चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार की अनधिकृत छेड़छाड़ की संभावना समाप्त हो सके।

क्या कहते हैं नियम?

बोर्ड परीक्षाओं के अंक निर्धारित प्रक्रिया के तहत मूल्यांकन के बाद ऑनलाइन सिस्टम में दर्ज किए जाते हैं। यदि किसी छात्र को प्राप्त अंकों पर आपत्ति होती है तो उसके लिए पुनर्मूल्यांकन, स्क्रूटनी अथवा अन्य निर्धारित प्रक्रिया उपलब्ध होती है। इसके अतिरिक्त किसी भी व्यक्ति द्वारा पैसे लेकर अंक बढ़ाने का दावा करना कानूनन गंभीर अपराध की श्रेणी में आ सकता है।

जांच के बाद होगी स्थिति स्पष्ट

फिलहाल वायरल रिपोर्ट और स्टिंग ऑपरेशन में लगाए गए आरोप चर्चा का विषय बने हुए हैं। मामले की सत्यता संबंधित एजेंसियों और बोर्ड प्रशासन की जांच के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट होगी। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

विद्यार्थियों के लिए सलाह

विशेषज्ञों का कहना है कि छात्र और अभिभावक किसी भी ऐसे व्यक्ति के झांसे में न आएं जो पैसे लेकर अंक बढ़ाने या रिजल्ट बदलवाने का दावा करे। केवल बोर्ड द्वारा जारी आधिकारिक प्रक्रिया पर ही भरोसा करें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत संबंधित प्रशासन या पुलिस को दें।

यूपी बोर्ड में कथित मार्क्स बढ़ाने के खेल का यह मामला शिक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चेतावनी है। निष्पक्ष जांच, पारदर्शी कार्रवाई और दोषियों पर सख्त कानूनी कदम ही छात्रों का विश्वास कायम रख सकते हैं। जब तक आधिकारिक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक वायरल दावों को अंतिम सत्य मानने से बचना चाहिए, लेकिन यदि आरोप सही साबित होते हैं तो यह शिक्षा जगत के लिए बड़ा झटका होगा।

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