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सिंधु जल समझौता फिलहाल बहाल नहीं होगा

आतंकवाद पर कार्रवाई के बाद ही होगी नई बातचीत: सूत्र नई दिल्ली: भारत और पाकिस्तान के बीच 65 साल पुराना सिंधु जल समझौता (Indus Waters Treaty) फिलहाल अपने मौजूदा स्वरूप में दोबारा लागू नहीं होगा। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देना पूरी तरह बंद नहीं करता, तब तक […]

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Gauravshali Bharat News
  • July 21, 2026 6:43 am IST, Published 13 hours ago

आतंकवाद पर कार्रवाई के बाद ही होगी नई बातचीत: सूत्र

नई दिल्ली: भारत और पाकिस्तान के बीच 65 साल पुराना सिंधु जल समझौता (Indus Waters Treaty) फिलहाल अपने मौजूदा स्वरूप में दोबारा लागू नहीं होगा। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देना पूरी तरह बंद नहीं करता, तब तक भारत इस समझौते को बहाल करने की दिशा में कोई कदम नहीं उठाएगा।

सूत्रों का कहना है कि भविष्य में यदि इस समझौते को फिर से लागू करना हुआ तो इसके लिए संशोधित शर्तों के साथ नई बातचीत करनी होगी। हालांकि, यह प्रक्रिया तभी संभव होगी जब पाकिस्तान आतंकवाद के मुद्दे पर स्थायी और ठोस कार्रवाई करेगा।

भारत का स्पष्ट रुख

अधिकारियों के मुताबिक, भारत का मानना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। ऐसे में सीमा पार आतंकवाद जारी रहने की स्थिति में मौजूदा व्यवस्था के तहत सिंधु जल समझौते को दोबारा लागू करना संभव नहीं है।

पाकिस्तान के दावों पर भारत का जवाब

सूत्रों ने यह भी कहा कि पाकिस्तान यह नैरेटिव बनाने की कोशिश कर रहा है कि भारत द्वारा समझौते को स्थगित रखने से वहां जल संकट पैदा हो रहा है। भारत का कहना है कि यह दावा वास्तविकता से मेल नहीं खाता।

अधिकारियों के अनुसार, पाकिस्तान में पानी की बड़ी मात्रा पर्याप्त जल भंडारण व्यवस्था की कमी, नहरों में बड़े पैमाने पर रिसाव और प्रांतों के बीच जल बंटवारे के विवादों के कारण व्यर्थ हो जाती है।

समझौते से बाहर निकलने की तत्काल योजना नहीं

सूत्रों के अनुसार, भारत फिलहाल सिंधु जल समझौते से पूरी तरह बाहर निकलने की कोई सक्रिय योजना नहीं बना रहा है। हालांकि, एक संप्रभु राष्ट्र होने के नाते भारत के पास यह अधिकार सुरक्षित है कि यदि कोई अंतरराष्ट्रीय समझौता उसके राष्ट्रीय हितों के प्रतिकूल साबित होता है, तो वह भविष्य में उस पर आवश्यक निर्णय ले सकता है।

फिलहाल भारत का रुख स्पष्ट है कि आतंकवाद पर ठोस और स्थायी कार्रवाई के बिना सिंधु जल समझौते को पुराने स्वरूप में बहाल नहीं किया जाएगा।

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