नई दिल्लीः संसद के मानसून सत्र के दौरान NEET परीक्षा और उससे जुड़े छात्र आंदोलन को लेकर राजनीतिक बयानबाज़ी और तेज हो गई है। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सोशल मीडिया पर एक विस्तृत बयान जारी करते हुए लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर पहले की गई मांग से पीछे हटने का आरोप लगाया। उनके बयान के बाद NEET मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव और गहरा होता दिखाई दे रहा है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने अपने बयान में कहा कि राहुल गांधी ने सरकार के समक्ष यह प्रस्ताव रखा था कि यदि संसद में NEET और उससे जुड़े आंदोलन के सभी मुद्दों पर चर्चा कराने के लिए सरकार सहमत हो जाती है, तो कांग्रेस अपना विरोध प्रदर्शन तत्काल समाप्त कर देगी। उनके अनुसार, इस प्रस्ताव के बाद सरकार के शीर्ष नेतृत्व से बातचीत की गई और संसद में इस विषय पर चर्चा कराने की सहमति दे दी गई।
केंद्रीय मंत्री का दावा है कि जब राहुल गांधी को यह जानकारी दी गई कि सरकार NEET और उससे जुड़े सभी मुद्दों पर संसद में चर्चा के लिए तैयार है, तब उन्होंने विरोध समाप्त करने के बजाय एक नई शर्त रख दी। जितेंद्र सिंह के अनुसार, राहुल गांधी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधानके इस्तीफे का आश्वासन भी मांगा।
उन्होंने आगे कहा कि जब राहुल गांधी को याद दिलाया गया कि उनकी प्रारंभिक मांग केवल संसद में चर्चा कराने की थी, तब उन्होंने कथित तौर पर कहा कि अब उनकी मांगें बदल गई हैं। केंद्रीय मंत्री ने इस पूरे घटनाक्रम को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि विपक्ष के नेता का अपनी कही हुई बात से पीछे हटना लोकतांत्रिक परंपराओं और संसदीय मर्यादाओं के अनुरूप नहीं है।
जितेंद्र सिंह ने अपने बयान में यह भी कहा कि संसद लोकतांत्रिक विमर्श का सर्वोच्च मंच है और राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर चर्चा के लिए सरकार हमेशा तैयार रही है। उनका कहना था कि यदि संवाद के माध्यम से समाधान की दिशा में कदम बढ़ाए जाएं, तो इससे लोकतंत्र और संसदीय व्यवस्था दोनों मजबूत होते हैं।
वहीं, कांग्रेस की ओर से इस संबंध में अलग रुख सामने आ सकता है। विपक्ष लगातार NEET परीक्षा, पेपर लीक और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर सरकार को घेरता रहा है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों की मांग रही है कि इन मामलों में जवाबदेही तय की जाए और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
NEET और छात्र आंदोलन का मुद्दा इस समय संसद के भीतर और बाहर प्रमुख राजनीतिक विषय बना हुआ है। आने वाले दिनों में इस पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच और तीखी बहस देखने को मिल सकती है। फिलहाल, केंद्रीय मंत्री के बयान ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है, जबकि इस पूरे घटनाक्रम पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।