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पटना में गंगा किनारे अतिक्रमण हटेगा, वृंदावन में नए निर्माण पर रोक: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली। देश की प्रमुख नदियों गंगा और यमुना के संरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए बिहार और उत्तर प्रदेश की सरकारों को महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि नदियों के प्राकृतिक प्रवाह, बाढ़ क्षेत्र और पर्यावरणीय संतुलन से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया […]

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Supreme Court
Gauravshali Bharat News
  • July 23, 2026 11:57 am IST, Published 1 hour ago

नई दिल्ली। देश की प्रमुख नदियों गंगा और यमुना के संरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए बिहार और उत्तर प्रदेश की सरकारों को महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि नदियों के प्राकृतिक प्रवाह, बाढ़ क्षेत्र और पर्यावरणीय संतुलन से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसके तहत पटना में गंगा के फ्लडप्लेन पर हुए अवैध निर्माणों को हटाने और वृंदावन में यमुना की मुख्य धारा के भीतर नए निर्माण कार्यों पर तत्काल रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं।

मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने कहा कि नदियां केवल जल स्रोत नहीं, बल्कि देश की पारिस्थितिकी, जैव विविधता और करोड़ों लोगों की जीवनरेखा हैं। ऐसे में नदी क्षेत्रों में अनियोजित निर्माण और अतिक्रमण भविष्य में गंभीर पर्यावरणीय और प्राकृतिक आपदाओं का कारण बन सकते हैं।

यह मामला गंगा और उसकी सहायक नदियों के संरक्षण से जुड़ी एक याचिका के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि कई स्थानों पर फ्लडप्लेन क्षेत्रों में अतिक्रमण और निर्माण गतिविधियां जारी हैं। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि अवैध कब्जों को हटाने की कार्रवाई किसी अन्य न्यायिक आदेश से प्रभावित नहीं होगी और राज्य सरकारों को प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी। अदालत ने बिहार सरकार से निर्धारित समय सीमा के भीतर अनुपालन रिपोर्ट भी मांगी है।

सुनवाई के दौरान यह भी कहा गया कि पहले जारी निर्देशों के बावजूद कई स्थानों पर अवैध निर्माण के खिलाफ अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। इस पर अदालत ने राज्य सरकारों को तेजी से कदम उठाने और नदी क्षेत्रों को अतिक्रमण मुक्त बनाने के लिए प्रभावी योजना लागू करने को कहा।

इसी सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश के वृंदावन में यमुना नदी की मुख्य धारा के भीतर चल रहे निर्माण कार्यों पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की गई। अदालत ने अगली सुनवाई तक नदी के भीतर किसी भी नए निर्माण पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है।

याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत को बताया गया कि घाटों के विकास के नाम पर नदी के भीतर कंक्रीट और स्टील आधारित स्थायी ढांचे तैयार किए जा रहे हैं, जिससे यमुना की प्राकृतिक धारा प्रभावित हो रही है। इससे नदी के प्रवाह, जलधारण क्षमता और पारिस्थितिक संतुलन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जताई गई।

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से इस मामले में विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है। अदालत ने संकेत दिया कि विकास कार्यों और धार्मिक महत्व वाले क्षेत्रों के संरक्षण के साथ-साथ पर्यावरणीय मानकों का पालन भी समान रूप से आवश्यक है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि नदियों की सुरक्षा और प्राकृतिक स्वरूप को बनाए रखना सभी संबंधित एजेंसियों और राज्य सरकारों की जिम्मेदारी है।

 

 

 

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