भूस्खलन और बाढ़ के खतरे से चारधाम यात्रा पर लगा ब्रेक

उत्तराखंड में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने चारधाम यात्रा की रफ्तार पर फिलहाल विराम लगा दिया है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए राज्य प्रशासन ने बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री की यात्रा को दो दिनों के लिए स्थगित कर दिया है। लगातार हो रही बारिश, भूस्खलन, सड़कों के बंद होने और […]

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  • July 28, 2026 3:19 pm IST, Published 15 minutes ago

उत्तराखंड में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने चारधाम यात्रा की रफ्तार पर फिलहाल विराम लगा दिया है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए राज्य प्रशासन ने बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री की यात्रा को दो दिनों के लिए स्थगित कर दिया है। लगातार हो रही बारिश, भूस्खलन, सड़कों के बंद होने और नदियों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। प्रशासन का कहना है कि मौसम सामान्य होने और सभी मार्ग पूरी तरह सुरक्षित घोषित किए जाने के बाद ही यात्रा दोबारा शुरू की जाएगी।

पिछले कई दिनों से उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में लगातार बारिश हो रही है। इसके कारण कई स्थानों पर पहाड़ों से चट्टानें और मलबा गिरने की घटनाएं सामने आई हैं। चारधाम को जोड़ने वाले प्रमुख राष्ट्रीय और राज्य मार्गों पर जगह-जगह बाधाएं उत्पन्न हो गई हैं, जिससे यात्रियों की आवाजाही प्रभावित हुई है। मौसम विभाग ने आने वाले समय में भी भारी बारिश की संभावना जताई है, जिसके चलते प्रशासन ने एहतियातन यात्रा रोकने का फैसला किया।

इस बीच केंद्रीय जल आयोग ने उत्तराखंड के साथ हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के कुछ क्षेत्रों में मध्यम स्तर के फ्लैश फ्लड यानी अचानक बाढ़ आने की आशंका व्यक्त की है। इसे देखते हुए सभी संबंधित विभागों को सतर्क रहने और राहत एवं बचाव दलों को तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं।

उत्तराखंड के अल्मोड़ा, बागेश्वर, चमोली, देहरादून, पौड़ी गढ़वाल, टिहरी गढ़वाल, नैनीताल, पिथौरागढ़, रुद्रप्रयाग और उत्तरकाशी जिलों में लगातार बारिश का असर साफ दिखाई दे रहा है। गंगा, अलकनंदा, भागीरथी, पिंडर, कोसी, टौंस, यमुना, बांदल और सोंग जैसी नदियां तेज बहाव के साथ उफान पर बह रही हैं। कई स्थानों पर नदी का जलस्तर खतरे के निशान के करीब पहुंच गया है, जिससे आसपास के क्षेत्रों में भी सतर्कता बढ़ा दी गई है।

मौसम विभाग ने उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, टिहरी गढ़वाल और पौड़ी गढ़वाल के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में भारी बारिश के साथ बिजली गिरने और भूस्खलन की आशंका बनी हुई है। मौसम की गंभीर स्थिति को देखते हुए देहरादून, रुद्रप्रयाग, पौड़ी, पिथौरागढ़ और बागेश्वर जिलों में स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों को एक दिन के लिए बंद रखने का निर्णय लिया गया है।

प्रशासन ने स्थानीय लोगों, पर्यटकों और श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे नदियों और नालों के किनारे जाने से बचें, बिना आवश्यकता यात्रा न करें तथा केवल मौसम विभाग और जिला प्रशासन की आधिकारिक सलाह का ही पालन करें। अफवाहों पर ध्यान न देने और सुरक्षा निर्देशों का पालन करने की भी अपील की गई है।

बारिश का असर केवल चारधाम मार्गों तक सीमित नहीं है। देहरादून के प्रेमनगर क्षेत्र में नंदा की चौकी के पास टौंस नदी पर बने पुल की एप्रोच रोड तेज बहाव में बह गई, जिससे यातायात बाधित हो गया। यह पुल पिछले वर्ष भारी बारिश में क्षतिग्रस्त होने के बाद दोबारा बनाया गया था, लेकिन लगातार बारिश के कारण इसका संपर्क मार्ग फिर से प्रभावित हो गया। इसके चलते देहरादून, विकासनगर और हिमाचल प्रदेश के बीच आने-जाने वाले लोगों को वैकल्पिक मार्गों का सहारा लेना पड़ रहा है।

रुद्रप्रयाग में चारधाम यात्रा से जुड़ी एक महत्वपूर्ण परियोजना को भी बड़ा झटका लगा है। बद्रीनाथ और केदारनाथ हाईवे को जोड़ने वाली लगभग 900 मीटर लंबी सुरंग के निर्माण स्थल पर पहाड़ी का बड़ा हिस्सा दरक गया। सुरंग के बाहरी हिस्से के ऊपर से भारी मात्रा में मलबा गिरने से निर्माणाधीन आवासीय परिसर को भी नुकसान पहुंचा है। घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने क्षेत्र को घेरकर निरीक्षण शुरू कर दिया है और निर्माण कार्य की समीक्षा की जा रही है।

इसी बीच रुद्रप्रयाग के प्रसिद्ध कोटेश्वर महादेव गुफा मंदिर तक भी अलकनंदा नदी का पानी पहुंच गया। सामान्य दिनों में नदी से काफी दूरी पर रहने वाली यह गुफा पहली बार इस तरह जलस्तर बढ़ने से प्रभावित हुई है। तेज बहाव के कारण श्रद्धालु नदी से जल लेकर भगवान शिव का जलाभिषेक भी नहीं कर पा रहे हैं। प्रशासन ने लोगों को नदी किनारे न जाने और पूरी सतर्कता बरतने की सलाह दी है।

चारधाम यात्रा उत्तराखंड की आस्था और पर्यटन अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार मानी जाती है। हालांकि प्रशासन का कहना है कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोपरि है। इसी कारण यात्रा को अस्थायी रूप से रोका गया है। मौसम में सुधार, सड़कों की मरम्मत और मार्गों की सुरक्षा जांच पूरी होने के बाद ही यात्रा को दोबारा शुरू करने का निर्णय लिया जाएगा। फिलहाल प्रशासन, आपदा प्रबंधन विभाग और राहत एजेंसियां पूरे राज्य में हालात पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

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