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BRICS में मोदी-पुतिन ने मुक्त व्यापार और सुरक्षित रूटों पर दिया जोर

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने BRICS बिजनेस फोरम को संबोधित करते हुए कहा कि भारत BRICS के मंच के जरिए दुनिया के साथ अपने आर्थिक और तकनीकी संबंधों को और मजबूत करना चाहता है। उन्होंने कहा कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच BRICS का दायरा लगातार बढ़ा है और यह समूह अब दुनिया की […]

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  • September 11, 2026 6:57 pm IST, Published 27 minutes ago

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने BRICS बिजनेस फोरम को संबोधित करते हुए कहा कि भारत BRICS के मंच के जरिए दुनिया के साथ अपने आर्थिक और तकनीकी संबंधों को और मजबूत करना चाहता है। उन्होंने कहा कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच BRICS का दायरा लगातार बढ़ा है और यह समूह अब दुनिया की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

पीएम मोदी ने BRICS के विस्तार का उल्लेख करते हुए कहा कि 2006 में जब इस समूह की शुरुआत हुई थी, तब इसमें केवल चार देश शामिल थे। आज BRICS और उसके साझेदारों को मिलाकर 21 देशों का बड़ा परिवार बन चुका है। इन देशों में दुनिया की करीब आधी आबादी रहती है, जबकि वैश्विक व्यापार में इनकी हिस्सेदारी लगभग 25 प्रतिशत है। प्रधानमंत्री के मुताबिक, BRICS देशों की संयुक्त अर्थव्यवस्था दुनिया की GDP के करीब 40 प्रतिशत के बराबर है।

उन्होंने कहा कि BRICS देशों की आर्थिक वृद्धि की रफ्तार भी वैश्विक औसत की तुलना में करीब दोगुनी रही है। इसके साथ ही इन देशों में जमीनी स्तर के नवाचार से लेकर अत्याधुनिक तकनीक तक कई नए अवसर तैयार हो रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि BRICS का बढ़ता आकार, तेज विकास और भविष्य को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण इस समूह की बदलती भूमिका को दर्शाता है। उन्होंने भारत में आयोजित बिजनेस फोरम को अब तक का सबसे बड़ा BRICS बिजनेस फोरम बताया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता के बावजूद भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है। अंतरिक्ष, बायोटेक्नोलॉजी और दूसरी उभरती तकनीकों में भारत ने नए अवसर विकसित किए हैं। उन्होंने कहा कि ‘मेक इन इंडिया’, ‘इनोवेट इन इंडिया’ और ‘स्केल फॉर द वर्ल्ड’ जैसे प्रयासों के जरिए देश में स्टार्टअप इकोसिस्टम तेजी से विस्तार कर रहा है। प्रधानमंत्री के अनुसार, भारत में दो लाख से अधिक स्टार्टअप हैं।

डिजिटल अर्थव्यवस्था की चर्चा करते हुए मोदी ने UPI को भारत की प्रमुख तकनीकी उपलब्धियों में शामिल किया। उन्होंने कहा कि दुनिया के करीब 50 प्रतिशत रियल-टाइम पेमेंट भारत की UPI तकनीक पर आधारित होते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत BRICS के माध्यम से अपनी क्षमताओं और अनुभवों को दुनिया के दूसरे हिस्सों तक पहुंचाना चाहता है।

मोदी ने वैश्विक व्यापार के सामने मौजूद बाधाओं को कम करने की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि कारोबार को सुचारु बनाने के लिए व्यापारिक रास्तों और समुद्री मार्गों की सुरक्षा जरूरी है। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को स्थिर रखने के लिए सुरक्षित और भरोसेमंद परिवहन मार्गों की आवश्यकता है।

BRICS बिजनेस फोरम में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी वैश्विक अर्थव्यवस्था में BRICS की बढ़ती भूमिका का उल्लेख किया। उन्होंने BRICS देशों की आर्थिक ताकत की तुलना G7 से करते हुए कहा कि वैश्विक आर्थिक शक्ति का संतुलन बदल रहा है। पुतिन के मुताबिक, BRICS देशों की संयुक्त GDP दुनिया की अर्थव्यवस्था का करीब 40 प्रतिशत है, जबकि G7 की हिस्सेदारी इससे काफी कम है।

पुतिन ने यह भी कहा कि दुनिया में आर्थिक विकास के पुराने केंद्रों के साथ नए विकास केंद्र तेजी से उभर रहे हैं। उनके मुताबिक, वैश्विक अर्थव्यवस्था लगातार बदलाव के दौर से गुजरती है और BRICS जैसे समूह इस परिवर्तन में अहम भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने प्रतिबंधों और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ी चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा कि दबावों के बावजूद रूस अपनी आर्थिक गतिविधियों और विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

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फोरम में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान समेत BRICS देशों के कई प्रमुख नेता और कारोबारी प्रतिनिधि मौजूद रहे। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और व्लादिमीर पुतिन के बीच द्विपक्षीय बैठक भी हुई, जिसमें दोनों देशों के बीच सहयोग और आपसी संबंधों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।

BRICS शिखर सम्मेलन को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी काफी चर्चा है। अमेरिकी मीडिया में इस समूह के बढ़ते प्रभाव और इसके सामने मौजूद चुनौतियों पर विश्लेषण प्रकाशित हुए हैं। कुछ रिपोर्टों में BRICS देशों के बीच आर्थिक क्षमता के साथ-साथ उनके आपसी मतभेदों का भी उल्लेख किया गया है। इसके बावजूद भारत की मेजबानी में आयोजित सम्मेलन को वैश्विक दक्षिण और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग बढ़ाने के महत्वपूर्ण मंच के तौर पर देखा जा रहा है।

 

 

 

 

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