नई दिल्ली: कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में देश के पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत डॉ. मनमोहन सिंह को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी कानूनी राहत मिली है। सर्वोच्च न्यायालय ने विशेष CBI अदालत द्वारा उन्हें आरोपी के रूप में तलब करने के आदेश को रद्द करते हुए CBI की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार कर ली। इस फैसले के साथ इस मामले में उनके खिलाफ चल रही कानूनी प्रक्रिया समाप्त हो गई।
यह मामला एक दशक से अधिक समय से न्यायालय में लंबित था। विशेष अदालत ने वर्ष 2014 में कोयला ब्लॉक आवंटन से जुड़े एक मामले में तत्कालीन प्रधानमंत्री रहे डॉ. मनमोहन सिंह को आरोपी के रूप में समन जारी किया था। इसके बाद उन्होंने वर्ष 2015 में सुप्रीम कोर्ट का रुख करते हुए इस समन आदेश को चुनौती दी थी। पहली सुनवाई में ही सर्वोच्च न्यायालय ने समन पर रोक लगा दी थी और उसके बाद यह मामला लंबे समय तक विचाराधीन रहा।
अब सुप्रीम कोर्ट ने अंतिम निर्णय सुनाते हुए कहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड और जांच एजेंसी की रिपोर्ट के आधार पर डॉ. मनमोहन सिंह के खिलाफ आगे कोई आपराधिक कार्रवाई करने का पर्याप्त आधार नहीं बनता। अदालत ने CBI द्वारा दाखिल क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए स्पष्ट किया कि विशेष अदालत द्वारा उसे अस्वीकार करने और संज्ञान लेने का पर्याप्त कारण नहीं था।
सर्वोच्च न्यायालय की पीठ ने अपने आदेश में कहा कि उसने CBI की ओर से दाखिल दोनों क्लोजर रिपोर्ट का विस्तार से अध्ययन किया है। न्यायालय ने यह भी कहा कि जांच रिपोर्ट को स्वीकार या अस्वीकार करने के संबंध में पूर्व में तय किए गए न्यायिक सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए यह पाया गया कि जांच एजेंसी की रिपोर्ट को खारिज करने का कोई ठोस आधार उपलब्ध नहीं था।
कोयला ब्लॉक आवंटन से जुड़े मामले देश के चर्चित मामलों में शामिल रहे हैं। इन मामलों में वर्ष 2004 से 2014 के बीच विभिन्न कोयला ब्लॉकों के आवंटन की प्रक्रिया की जांच की गई थी। उस समय डॉ. मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री होने के साथ कुछ अवधि के लिए कोयला मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार भी संभाल रहे थे। इसी कारण उन्हें इस मामले में समन जारी किया गया था। हालांकि CBI की जांच के दौरान एजेंसी ने उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद अदालत में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी। एजेंसी का निष्कर्ष था कि उपलब्ध सामग्री के आधार पर डॉ. मनमोहन सिंह के खिलाफ अभियोजन चलाने के पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं।
दिसंबर 2024 में डॉ. मनमोहन सिंह का निधन हो गया था। उनके निधन के लगभग दो वर्ष बाद आया यह फैसला कानूनी दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद उनके खिलाफ लंबित समन आदेश स्वतः समाप्त हो गया और इस प्रकरण में उन्हें औपचारिक रूप से राहत मिल गई।
यह निर्णय जांच एजेंसियों द्वारा दाखिल क्लोजर रिपोर्ट की न्यायिक समीक्षा के मानकों को भी स्पष्ट करता है। अदालत ने दोहराया कि किसी भी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त और ठोस आधार होना आवश्यक है। यदि जांच एजेंसी उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अभियोजन योग्य सामग्री नहीं पाती है, तो न्यायालय को भी रिकॉर्ड पर मौजूद तथ्यों का निष्पक्ष मूल्यांकन करना होता है।