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NEET-UG पेपर लीक जांच तेज, CBI ने 13 आरोपियों पर कसा शिकंजा

नई दिल्ली: देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 में कथित पेपर लीक मामले की जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती नजर आ रही है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने इस मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए 13 गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ करीब 20 हजार पन्नों की विस्तृत चार्जशीट दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट […]

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  • July 29, 2026 11:58 am IST, Published 54 minutes ago

नई दिल्ली: देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 में कथित पेपर लीक मामले की जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती नजर आ रही है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने इस मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए 13 गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ करीब 20 हजार पन्नों की विस्तृत चार्जशीट दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में दाखिल कर दी है। जांच एजेंसी का दावा है कि उसके पास ऐसे पर्याप्त दस्तावेज, डिजिटल साक्ष्य और गवाहों के बयान हैं, जिनसे परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र लीक होने और उसमें शामिल नेटवर्क की भूमिका का खुलासा होता है।

मामले की सुनवाई के दौरान CBI ने अदालत को बताया कि चार्जशीट के साथ जुड़े एनेक्सचर दस्तावेजों की स्कैनिंग का कार्य जारी है। अदालत ने चार्जशीट को रिकॉर्ड पर लेते हुए एजेंसी को शेष दस्तावेज निर्धारित समय में दाखिल करने की अनुमति दी। अब इस बहुचर्चित मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त को होगी, जहां जांच की प्रगति और अन्य पहलुओं पर चर्चा की जाएगी।

CBI के अनुसार, यह चार्जशीट केवल आरोपों का संकलन नहीं बल्कि विस्तृत जांच का निष्कर्ष है। इसमें 360 गवाहों के बयान, 422 दस्तावेज और 43 भौतिक साक्ष्यों (मैटेरियल ऑब्जेक्ट्स) को शामिल किया गया है। एजेंसी ने अदालत को बताया कि डिजिटल फोरेंसिक जांच, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के विश्लेषण, हस्तलेख विशेषज्ञों की रिपोर्ट और शैक्षणिक विशेषज्ञों की राय के आधार पर यह स्पष्ट संकेत मिले हैं कि परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र के कुछ हिस्से लीक किए गए थे।

चार्जशीट में जिन 13 आरोपियों के नाम शामिल हैं, वे सभी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। इनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, साक्ष्य नष्ट करने सहित कई गंभीर धाराओं में आरोप लगाए गए हैं। इसके अतिरिक्त लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत भी कार्रवाई की गई है।

CBI ने बताया कि उच्च शिक्षा विभाग से शिकायत मिलने के बाद 12 मई 2026 को इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए एजेंसी ने तुरंत 72 अधिकारियों और कर्मचारियों की विशेष जांच टीम गठित की, जिसमें 8 साइबर फोरेंसिक विशेषज्ञ भी शामिल किए गए।

जांच के दौरान देश के विभिन्न राज्यों में व्यापक अभियान चलाया गया। महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली सहित कई राज्यों में कुल 92 स्थानों पर छापेमारी की गई। इन छापों में मोबाइल फोन, लैपटॉप, कंप्यूटर, हार्ड डिस्क, दस्तावेज और अन्य डिजिटल उपकरण जब्त किए गए। बाद में इन सभी इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की फोरेंसिक इमेजिंग और तकनीकी जांच कर पूरे नेटवर्क की गतिविधियों का विश्लेषण किया गया। CBI की जांच में यह भी सामने आया कि इस कथित साजिश में केवल बाहरी लोग ही नहीं बल्कि परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े कुछ विशेषज्ञ भी शामिल थे। एजेंसी ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) से जुड़े केमिस्ट्री, फिजिक्स और बायोलॉजी विषय के तीन विशेषज्ञों को गिरफ्तार किया है।

इसके अलावा जांच में ऐसे बिचौलियों की भूमिका भी सामने आई, जिन्होंने कथित रूप से लीक प्रश्नपत्र प्राप्त कर उसे अभ्यर्थियों और अन्य लोगों तक पहुंचाया। कुछ कोचिंग संस्थानों से जुड़े दो व्यक्तियों की गिरफ्तारी भी इसी जांच का हिस्सा है। एजेंसी का दावा है कि इन लोगों ने संगठित तरीके से परीक्षा प्रणाली का दुरुपयोग करने का प्रयास किया।

पेपर लीक के पीछे आर्थिक लाभ की संभावना को देखते हुए CBI ने मनी ट्रेल की भी गहन जांच की। एजेंसी ने आरोपियों से जुड़े कई बैंक खातों, बैंक लॉकरों और एक डीमैट खाते को फ्रीज किया है। अधिकारियों का कहना है कि वित्तीय लेनदेन के विश्लेषण से उन लोगों की पहचान करने में मदद मिली है, जिन्हें इस कथित साजिश से आर्थिक लाभ पहुंचा।

राउज एवेन्यू कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त के लिए निर्धारित की है। इस मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता वीके पाठक और अर्जुन आनंद को लोक अभियोजक नियुक्त किया गया है। CBI ने अदालत को बताया कि जांच अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है और यदि नए साक्ष्य सामने आते हैं तो पूरक चार्जशीट भी दाखिल की जा सकती है। देशभर के लाखों मेडिकल अभ्यर्थियों और उनके अभिभावकों की नजर अब इस मामले की न्यायिक प्रक्रिया पर है। यह मामला केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता से भी जुड़ा हुआ माना जा रहा है।

 

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