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Air Force नौकरी छोड़ने पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, जानें नियम

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) के कर्मियों से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि वायुसेना के कर्मचारी दूसरी सरकारी नौकरी पाने के लिए अपनी इच्छा से सेवा नहीं छोड़ सकते। शीर्ष अदालत ने कहा कि सशस्त्र बलों में कार्यरत कर्मियों के लिए सेवा […]

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  • July 30, 2026 10:32 pm IST, Published 1 hour ago

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) के कर्मियों से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि वायुसेना के कर्मचारी दूसरी सरकारी नौकरी पाने के लिए अपनी इच्छा से सेवा नहीं छोड़ सकते। शीर्ष अदालत ने कहा कि सशस्त्र बलों में कार्यरत कर्मियों के लिए सेवा छोड़ने की निर्धारित प्रक्रिया केवल औपचारिकता नहीं है, बल्कि सैन्य तैयारियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी एक आवश्यक व्यवस्था है। इसलिए बिना सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति (NOC) और निर्धारित नियमों का पालन किए सेवा से मुक्त होने का अधिकार नहीं माना जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब बड़ी संख्या में रक्षा सेवाओं के कर्मचारी अन्य सरकारी नौकरियों में चयनित होने के बाद सेवा छोड़ने की अनुमति मांगते हैं। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि सैन्य सेवाओं की प्रकृति सामान्य सरकारी सेवाओं से अलग होती है और यहां अनुशासन तथा परिचालन संबंधी आवश्यकताओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला भारतीय वायुसेना के कॉर्पोरल (गैर-कमीशन अधिकारी) नरपत सिंह से जुड़ा है। उन्होंने राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) द्वारा आयोजित भर्ती प्रक्रिया में भाग लिया था और सहायक प्रोफेसर (हिंदी) के पद के लिए चयनित हो गए थे।

चयन के बाद उन्होंने भारतीय वायुसेना से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) जारी करने और सेवा से मुक्त किए जाने का अनुरोध किया। हालांकि, एयर ऑफिसर कमांडिंग ने उनका आवेदन अस्वीकार कर दिया। इसके बाद उन्होंने इस निर्णय को पहले सशस्त्र बल न्यायाधिकरण (Armed Forces Tribunal) और फिर दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी, लेकिन दोनों जगह उन्हें राहत नहीं मिली।

अंततः उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जहां भी उनकी याचिका खारिज कर दी गई।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

जस्टिस उज्ज्वल भुइयां और अतुल एस. चंद्रकर की पीठ ने कहा कि सशस्त्र बलों की कार्यप्रणाली सामान्य सरकारी विभागों से अलग होती है। सेना, नौसेना और वायुसेना की परिचालन क्षमता बनाए रखने के लिए प्रत्येक कर्मी की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।

पीठ ने कहा कि यदि कोई सैन्यकर्मी बिना निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए सेवा छोड़ने लगे, तो इससे सैन्य तैयारियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए पूर्व अनुमति प्राप्त करने की प्रक्रिया को केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं माना जा सकता।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि निर्धारित नियमों का कड़ाई से पालन किया जाना चाहिए और सेवा छोड़ने का अधिकार पूर्णतः स्वैच्छिक नहीं हो सकता।

भर्ती प्रक्रिया के दौरान क्या हुआ था?

रिकॉर्ड के अनुसार, नरपत सिंह ने नवंबर 2020 में जारी विज्ञापन के आधार पर सहायक प्रोफेसर पद के लिए आवेदन किया था। उन्होंने लिखित परीक्षा और साक्षात्कार दोनों सफलतापूर्वक उत्तीर्ण किए।

इसके बाद उन्होंने वायुसेना से एनओसी और सेवा से मुक्त किए जाने का अनुरोध किया, लेकिन अक्टूबर 2022 में एयर ऑफिसर कमांडिंग ने उनका आवेदन अस्वीकार कर दिया। विभाग का कहना था कि परिचालन आवश्यकताओं और सेवा नियमों के कारण उन्हें तत्काल मुक्त नहीं किया जा सकता।

सैन्य सेवाओं में एनओसी क्यों जरूरी होती है?

विशेषज्ञों के अनुसार रक्षा सेवाओं में किसी भी कर्मचारी को प्रशिक्षित करने में वर्षों का समय, संसाधन और सरकारी धन खर्च होता है। यदि बड़ी संख्या में प्रशिक्षित कर्मी अचानक सेवा छोड़ दें तो इससे राष्ट्रीय सुरक्षा और सैन्य संचालन प्रभावित हो सकते हैं।

इसी कारण सेना, नौसेना और वायुसेना में सेवा छोड़ने के लिए स्पष्ट नियम बनाए गए हैं। इनमें संबंधित अधिकारी की अनुमति, सेवा की आवश्यकताओं और संगठनात्मक जरूरतों का आकलन किया जाता है। इन नियमों का उद्देश्य किसी कर्मचारी के अधिकारों का हनन करना नहीं, बल्कि रक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाए रखना है।

फैसले का व्यापक प्रभाव

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला भविष्य में उन सभी मामलों के लिए महत्वपूर्ण माना जाएगा, जिनमें रक्षा सेवाओं के कर्मचारी दूसरी सरकारी नौकरी में चयनित होने के बाद तत्काल सेवा छोड़ने की अनुमति मांगते हैं।

इस निर्णय से यह स्पष्ट संदेश गया है कि केवल किसी अन्य सरकारी पद पर चयनित हो जाना सेवा से स्वतः मुक्त होने का आधार नहीं बन सकता। अंतिम निर्णय संबंधित रक्षा प्राधिकरण द्वारा सेवा नियमों और परिचालन आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए ही लिया जाएगा।

युवाओं के लिए क्या है संदेश?

रक्षा सेवाओं में भर्ती होने वाले युवाओं को यह समझना होगा कि यह केवल रोजगार नहीं बल्कि राष्ट्रीय सेवा का दायित्व है। यदि भविष्य में वे किसी अन्य सरकारी नौकरी के लिए आवेदन करना चाहते हैं, तो उन्हें पहले से लागू नियमों, एनओसी प्रक्रिया और सेवा शर्तों की पूरी जानकारी होनी चाहिए।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला सैन्य अनुशासन को और मजबूत करेगा तथा भविष्य में ऐसे मामलों में कानूनी स्थिति को स्पष्ट बनाएगा। साथ ही यह निर्णय रक्षा बलों की परिचालन क्षमता और राष्ट्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता देने वाले न्यायिक दृष्टिकोण को भी दर्शाता है।

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