नयी दिल्लीः आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने मीडिया और राजनीतिक संवाद को लेकर केंद्र सरकार समर्थक माने जाने वाले मीडिया संस्थानों पर तीखा हमला बोला है। एक बयान में उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ मीडिया संस्थान जनता के मुद्दों को उठाने के बजाय सरकार के पक्ष में प्रचार करने का काम कर रहे हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को युवाओं के लिए अपनी आवाज उठाने का नया माध्यम बताया।
संजय सिंह ने कहा कि देश में अब बड़ी संख्या में युवा पारंपरिक मीडिया पर निर्भर रहने के बजाय Instagram, X और Facebook जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए अपनी बात जनता तक पहुंचा रहे हैं। उनके अनुसार, आंदोलनों और जन मुद्दों को आगे बढ़ाने में सोशल मीडिया की भूमिका लगातार बढ़ रही है।
उन्होंने अपने बयान में जंतर-मंतर पर हुए आंदोलनों का जिक्र करते हुए कहा कि इन आंदोलनों ने युवाओं को यह संदेश दिया कि वे अपनी बात रखने के लिए नए माध्यमों का इस्तेमाल कर सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि युवाओं ने यह रास्ता चुना कि यदि मुख्यधारा के मीडिया में उन्हें पर्याप्त जगह नहीं मिलती, तो वे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए अपनी आवाज बुलंद करेंगे।
संजय सिंह ने मीडिया के एक वर्ग पर आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ चैनल जनता के सवालों के बजाय राजनीतिक प्रचार को प्राथमिकता देते हैं। उन्होंने ऐसे मीडिया संस्थानों के लिए इस्तेमाल होने वाले “गोदी मीडिया” शब्द का प्रयोग किया, जो भारतीय राजनीति में एक विवादास्पद और आलोचनात्मक शब्द है। सत्ता समर्थक मीडिया संस्थान इस आरोप को खारिज करते रहे हैं और इसे राजनीतिक विरोधियों की भाषा बताते हैं।
आप सांसद ने युवाओं की डिजिटल भागीदारी को लोकतंत्र के लिए महत्वपूर्ण बताया। उनका कहना है कि इंटरनेट और सोशल मीडिया ने आम लोगों को अपनी राय रखने, मुद्दों पर चर्चा करने और अभियानों को गति देने का अवसर दिया है। हालांकि, सोशल मीडिया के प्रभाव को लेकर विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि डिजिटल माध्यमों पर जानकारी की सत्यता और विश्वसनीयता बनाए रखना एक बड़ी चुनौती है।
भारत में पिछले कुछ वर्षों में सोशल मीडिया राजनीतिक संवाद का एक अहम मंच बन चुका है। राजनीतिक दल, सामाजिक संगठन और आम नागरिक अपनी बात पहुंचाने के लिए इन प्लेटफॉर्म्स का व्यापक इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे जहां लोगों की भागीदारी बढ़ी है, वहीं गलत सूचना और पक्षपातपूर्ण सामग्री को लेकर बहस भी तेज हुई है।
संजय सिंह का यह बयान मीडिया की भूमिका, राजनीतिक संचार और बदलते डिजिटल दौर में युवाओं की भागीदारी को लेकर जारी बहस का हिस्सा है। उनके समर्थक इसे मीडिया जवाबदेही की मांग के रूप में देखते हैं, जबकि आलोचक इसे राजनीतिक बयानबाजी बताते हैं।