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करगिल विजय दिवस पर देश ने वीर सैनिकों के अदम्य साहस और बलिदान को नमन

देशभर में आज करगिल विजय दिवस की 27वीं वर्षगांठ पूरे सम्मान और गर्व के साथ मनाई गई। इस अवसर पर वर्ष 1999 के करगिल युद्ध में देश की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। लद्दाख के द्रास स्थित करगिल वॉर मेमोरियल को विशेष रूप से सजाया गया, […]

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Gauravshali Bharat News
  • July 26, 2026 11:21 am IST, Published 37 minutes ago

देशभर में आज करगिल विजय दिवस की 27वीं वर्षगांठ पूरे सम्मान और गर्व के साथ मनाई गई। इस अवसर पर वर्ष 1999 के करगिल युद्ध में देश की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। लद्दाख के द्रास स्थित करगिल वॉर मेमोरियल को विशेष रूप से सजाया गया, जहां सेना के वरिष्ठ अधिकारियों, शहीदों के परिजनों, पूर्व सैनिकों और बड़ी संख्या में नागरिकों ने पहुंचकर देश के वीर सपूतों को नमन किया।

करगिल विजय दिवस भारतीय सेना के अदम्य साहस, अनुशासन और देशभक्ति का प्रतीक माना जाता है। यह दिन उन वीर जवानों की याद दिलाता है जिन्होंने कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और विपरीत मौसम के बावजूद दुश्मन के कब्जे से भारतीय चौकियों को मुक्त कराते हुए तिरंगे की शान को कायम रखा। दुर्गम पहाड़ियों पर लड़े गए इस युद्ध में भारतीय सैनिकों ने अद्वितीय वीरता का परिचय दिया, जिसकी गूंज आज भी पूरे देश में सुनाई देती है।

द्रास स्थित करगिल वॉर मेमोरियल में आयोजित मुख्य कार्यक्रम के दौरान शहीदों को पुष्पांजलि अर्पित की गई और उनके सम्मान में सैन्य परंपराओं के अनुरूप श्रद्धांजलि समारोह आयोजित हुआ। स्मारक को आकर्षक रोशनी और तिरंगे की थीम से सजाया गया, जिसने वहां मौजूद लोगों को भावुक कर दिया। कार्यक्रम में शहीदों के परिजनों का सम्मान भी किया गया और उनके योगदान को देश के लिए प्रेरणास्रोत बताया गया।

इस अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने करगिल वॉर मेमोरियल, द्रास से राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि करगिल युद्ध में भारतीय सैनिकों ने जिस साहस, त्याग और दृढ़ संकल्प का परिचय दिया, वह देश के इतिहास का स्वर्णिम अध्याय है। उन्होंने कहा कि मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले सभी वीर सैनिकों को राष्ट्र सदैव श्रद्धा और सम्मान के साथ याद रखेगा। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय सशस्त्र बल हर चुनौती का सामना करने में सक्षम हैं और देश की सुरक्षा के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।

रक्षा मंत्री ने कहा कि करगिल के वीरों का बलिदान केवल इतिहास का हिस्सा नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य की पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने युवाओं से देशभक्ति, अनुशासन और राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आह्वान किया। उनके अनुसार भारतीय सेना का शौर्य और समर्पण हर नागरिक के लिए गर्व का विषय है।

करगिल युद्ध वर्ष 1999 में उस समय लड़ा गया था, जब पाकिस्तानी घुसपैठियों और सैनिकों ने भारतीय सीमा के भीतर कई रणनीतिक चोटियों पर कब्जा करने का प्रयास किया था। भारतीय सेना ने कठिन परिस्थितियों में ‘ऑपरेशन विजय’ चलाकर इन सभी क्षेत्रों को मुक्त कराया। इस अभियान में अनेक जवानों ने अपने प्राणों की आहुति दी, लेकिन अंततः भारत ने निर्णायक विजय हासिल की और दुनिया के सामने अपने सैन्य कौशल और संकल्प का परिचय दिया।

देश के विभिन्न राज्यों में भी करगिल विजय दिवस के अवसर पर श्रद्धांजलि सभाएं, पदयात्राएं, तिरंगा यात्राएं और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। स्कूलों, कॉलेजों और विभिन्न संस्थानों में शहीदों के जीवन और उनके अदम्य साहस पर आधारित विशेष कार्यक्रम हुए। वक्ताओं ने कहा कि करगिल के वीरों का बलिदान केवल एक सैन्य जीत नहीं, बल्कि राष्ट्रीय एकता, साहस और आत्मसम्मान का प्रतीक है।

आज का दिन हर भारतीय को यह याद दिलाता है कि देश की सीमाओं की सुरक्षा के लिए हमारे सैनिक किस तरह अपने परिवारों से दूर रहकर कठिन परिस्थितियों में भी राष्ट्रसेवा का दायित्व निभाते हैं। करगिल विजय दिवस केवल एक स्मृति दिवस नहीं, बल्कि उन अमर वीरों के प्रति राष्ट्र की कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है, जिनके बलिदान से भारत की संप्रभुता और सम्मान सुरक्षित है। देश उनके त्याग और पराक्रम को सदैव याद रखेगा।

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