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ग्रेटर नोएडा गैस कांड: एल्डिको सोसायटी टैंक में दो की दर्दनाक मौत

ग्रेटर नोएडा। ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क कोतवाली क्षेत्र स्थित एल्डिको रेजिडेंसी सोसायटी में शनिवार रात एक दर्दनाक हादसे ने सभी को स्तब्ध कर दिया। सोसायटी के एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) टैंक की सफाई के दौरान जहरीली गैस की चपेट में आने से दो लोगों की मौत हो गई। मृतकों में राजस्थान निवासी सफाईकर्मी और […]

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  • July 26, 2026 8:30 pm IST, Published 2 hours ago

ग्रेटर नोएडा। ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क कोतवाली क्षेत्र स्थित एल्डिको रेजिडेंसी सोसायटी में शनिवार रात एक दर्दनाक हादसे ने सभी को स्तब्ध कर दिया। सोसायटी के एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) टैंक की सफाई के दौरान जहरीली गैस की चपेट में आने से दो लोगों की मौत हो गई। मृतकों में राजस्थान निवासी सफाईकर्मी और उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद निवासी सुरक्षा गार्ड शामिल हैं। घटना के बाद पूरे इलाके में शोक और चिंता का माहौल है। पुलिस, फायर सर्विस और प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया तथा मामले की जांच प्रारंभ कर दी है।

जानकारी के अनुसार, एल्डिको रेजिडेंसी सोसायटी के सेक्टर-150 स्थित एसटीपी टैंक की नियमित सफाई का कार्य किया जा रहा था। इसी दौरान सफाईकर्मी शशिकांत शर्मा (40 वर्ष) टैंक के भीतर उतरे। कुछ ही देर बाद जहरीली गैस के प्रभाव से उनकी तबीयत बिगड़ गई और वह बेहोश होकर टैंक के अंदर गिर पड़े।

बताया जा रहा है कि जब काफी देर तक उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली तो वहां मौजूद लोगों में हड़कंप मच गया। इसी बीच उन्हें बचाने के उद्देश्य से सोसायटी में तैनात सुरक्षा गार्ड आकाश, जो मूल रूप से उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के इटहरी गांव के निवासी थे, बिना पर्याप्त सुरक्षा उपकरणों के टैंक में उतर गए। दुर्भाग्यवश वह भी जहरीली गैस की चपेट में आकर बेहोश हो गए।

घटना की सूचना तत्काल पुलिस और फायर सर्विस को दी गई। सूचना मिलते ही पुलिस और दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं। काफी मशक्कत के बाद दोनों को टैंक से बाहर निकाला गया और एंबुलेंस की सहायता से नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया। अस्पताल में चिकित्सकों ने जांच के बाद दोनों को मृत घोषित कर दिया।

इस हादसे के बाद मृतकों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि घटना इतनी अचानक हुई कि किसी को संभलने का मौका ही नहीं मिला। सोसायटी के कई निवासी भी घटनास्थल पर एकत्र हो गए और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाने लगे।

पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पंचनामा भरने के बाद पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फोरेंसिक जांच के आधार पर मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि की जाएगी। प्रारंभिक जांच में जहरीली गैस से दम घुटने की आशंका जताई जा रही है।

प्रशासन यह भी जांच कर रहा है कि एसटीपी टैंक की सफाई के दौरान निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं। विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे टैंकों में मीथेन, हाइड्रोजन सल्फाइड और अन्य जहरीली गैसें जमा हो सकती हैं। इसलिए किसी भी कर्मचारी को टैंक में उतारने से पहले गैस स्तर की जांच, पर्याप्त वेंटिलेशन, ऑक्सीजन सपोर्ट, सेफ्टी हार्नेस, गैस डिटेक्टर और प्रशिक्षित बचाव दल की व्यवस्था अनिवार्य मानी जाती है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि यदि सुरक्षा उपकरणों और मानकों का पालन किया गया होता तो संभवतः यह हादसा टाला जा सकता था। कई लोगों ने जिम्मेदार एजेंसी और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

विशेषज्ञों का कहना है कि देशभर में सीवर और एसटीपी टैंकों की सफाई के दौरान होने वाली दुर्घटनाएं लगातार चिंता का विषय बनी हुई हैं। समय-समय पर सरकारें और न्यायालय भी बिना सुरक्षा उपकरणों के कर्मचारियों को टैंक या सीवर में उतारने पर रोक लगाने के निर्देश देते रहे हैं। इसके बावजूद कई स्थानों पर लापरवाही सामने आती रहती है।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। यदि जांच में किसी एजेंसी, ठेकेदार या संबंधित प्रबंधन की लापरवाही सामने आती है तो नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं प्रशासन ने भी घटना की रिपोर्ट तलब कर ली है।

यह हादसा एक बार फिर इस बात की याद दिलाता है कि औद्योगिक और आवासीय परिसरों में सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन किया जाना कितना आवश्यक है। विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक तकनीक और मशीनों के उपयोग से ऐसे जोखिमपूर्ण कार्यों में मानव जीवन को खतरे में डालने से बचा जा सकता है। फिलहाल पुलिस की जांच जारी है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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