जम्मू। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में जम्मू-कश्मीर की पारंपरिक वगू चटाई का उल्लेख करते हुए इसके संरक्षण और संवर्धन में जुटे कारीगरों की सराहना की। उन्होंने कहा कि जब किसी व्यक्ति में हुनर और दृढ़ संकल्प होता है, तो वह कठिन से कठिन परंपरा को भी नई पहचान दिला सकता है।
प्रधानमंत्री ने श्रीनगर के गुलाम हुसैन और उनकी बेटी तंजीला के प्रयासों की विशेष रूप से प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि दोनों ने वर्षों पुरानी वगू शिल्पकला को जीवित रखने का संकल्प लिया और लगातार मेहनत से इस पारंपरिक कला को नई पहचान दिलाने का काम किया।
वगू चटाई कश्मीर की एक पारंपरिक हस्तशिल्प कला है, जिसे सरकंडों और धान के पुआल से तैयार किया जाता है। यह चटाई वर्षों से कश्मीर की सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा रही है और स्थानीय कारीगरों की आजीविका का भी महत्वपूर्ण साधन रही है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि इस कला को संरक्षित रखने के लिए कारीगरों का समर्पण प्रेरणादायक है और यह दिखाता है कि परंपराओं को आधुनिक समय में भी जीवित रखा जा सकता है।
पीएम मोदी ने बताया कि गुलाम हुसैन एक साधारण परिवार से आते हैं और उन्हें इस कार्य के दौरान कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद उन्होंने वगू शिल्प को बचाने का अपना संकल्प नहीं छोड़ा।
उन्होंने कहा कि समय के साथ उनके प्रयासों से कई अन्य लोग भी इस अभियान से जुड़े और अब यह पारंपरिक कला फिर से पहचान हासिल कर रही है।
प्रधानमंत्री के ‘मन की बात’ कार्यक्रम का प्रसारण जम्मू-कश्मीर के विभिन्न जिलों में भाजपा द्वारा बूथ स्तर पर आयोजित कार्यक्रमों में भी सुना गया। इस दौरान पार्टी के वरिष्ठ नेताओं, सांसदों, विधायकों और कार्यकर्ताओं ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया और प्रधानमंत्री के संदेश को समाज के विकास और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए प्रेरणादायक बताया।
प्रधानमंत्री द्वारा ‘मन की बात’ में वगू चटाई का उल्लेख किए जाने के बाद कश्मीर की इस पारंपरिक हस्तशिल्प कला को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे स्थानीय कारीगरों को प्रोत्साहन मिलेगा और इस पारंपरिक कला के संरक्षण के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर भी बढ़ेंगे।