नई दिल्ली : हैंडलूम हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्टर्स वेलफेयर एसोसिएशन (HHEWA) ने भारत मंडपम, नई दिल्ली के हॉल संख्या 1 से 6 में आयोजित वर्ल्ड गिफ्ट्स एक्सपो–2026 का स्वागत करते हुए कहा कि यह आयोजन भारत के हस्तशिल्प, हैंडलूम, टेक्सटाइल, ग्लास एवं अन्य पारंपरिक उत्पादों को वैश्विक बाज़ार से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण मंच बनकर उभरा है।
मेले में उत्तर प्रदेश सहित देशभर की सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) इकाइयों ने अपने उत्पादों को आधुनिक कॉर्पोरेट गिफ्ट्स, वेडिंग गिफ्ट्स, फेस्टिवल गिफ्ट्स, प्रमोशनल गिफ्ट्स एवं लाइफस्टाइल गिफ्ट्स के रूप में अत्यंत आकर्षक ढंग से प्रदर्शित किया है। इस आयोजन में देश-विदेश से बड़ी संख्या में खरीदार भाग ले रहे हैं, जिससे प्रदर्शकों को उत्कृष्ट व्यावसायिक अवसर प्राप्त हो रहे हैं।
आज पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं गौतम बुद्ध नगर के सांसद डॉ. महेश शर्मा ने मेले का विस्तृत भ्रमण किया। उन्होंने विभिन्न स्टॉलों पर जाकर कारीगरों, उद्यमियों एवं निर्यातकों से संवाद किया तथा भारतीय हस्तशिल्प एवं हैंडलूम उत्पादों की गुणवत्ता, उत्कृष्ट शिल्पकला एवं नवाचार की सराहना की। उन्होंने मेले में उमड़ी भारी भीड़ तथा प्रदर्शकों के उत्साह की प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन भारतीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने और निर्यात को बढ़ावा देने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने बताया कि मेले में लगभग 750 प्रदर्शक भाग ले रहे हैं तथा भारत सहित अनेक देशों के खरीदार व्यापारिक ऑर्डर बुक कर रहे हैं। यह आयोजन भारतीय निर्यात को बढ़ावा देने के साथ-साथ लाखों कारीगरों एवं MSME उद्यमियों के लिए नए व्यावसायिक अवसर सृजित करेगा।
हैंडलूम हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्टर्स वेलफेयर एसोसिएशन का मानना है कि यह आयोजन माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के “Vocal for Local” एवं “Make in India” के विज़न को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। साथ ही, उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी की “वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP)” योजना को भी यह मंच नई ऊर्जा प्रदान कर रहा है, जिससे प्रदेश के पारंपरिक उद्योगों एवं कारीगरों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाज़ार उपलब्ध हो रहे हैं।
एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री सी पी शर्मा ने विश्वास व्यक्त किया कि सरकार, उद्योग जगत, निर्यातकों एवं कारीगरों के संयुक्त प्रयासों से भारत का हस्तशिल्प एवं हैंडलूम क्षेत्र नई ऊँचाइयों को प्राप्त करेगा तथा “विकसित भारत 2047” के संकल्प को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।