सिर्फ दो कीड़े मिलने पर होटल बंद करना गलत: हाईकोर्ट फैसला

मुंबई: बॉम्बे हाईकोर्ट ने होटल उद्योग से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा है कि केवल दो कीड़े मिलने के आधार पर किसी होटल का एफएसएसएआई (FSSAI) लाइसेंस निलंबित करना उचित नहीं माना जा सकता। अदालत ने नई मुंबई स्थित एक होटल का लाइसेंस निलंबित करने के खाद्य सुरक्षा एवं मानक […]

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  • July 31, 2026 7:00 pm IST, Published 1 hour ago

मुंबई: बॉम्बे हाईकोर्ट ने होटल उद्योग से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा है कि केवल दो कीड़े मिलने के आधार पर किसी होटल का एफएसएसएआई (FSSAI) लाइसेंस निलंबित करना उचित नहीं माना जा सकता। अदालत ने नई मुंबई स्थित एक होटल का लाइसेंस निलंबित करने के खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के आदेश को रद्द कर दिया और कहा कि किसी भी प्रशासनिक कार्रवाई में संतुलन, निष्पक्षता और तथ्यों का समुचित मूल्यांकन आवश्यक है।

मुख्य न्यायाधीश रविंद्र घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अंखद की खंडपीठ ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि यदि किसी होटल के निरीक्षण के दौरान केवल दो छोटे कीड़े पाए जाते हैं, तो मात्र इसी आधार पर लाइसेंस को लंबे समय तक निलंबित रखना न्यायसंगत नहीं है। अदालत ने कहा कि ऐसी कार्रवाई तभी उचित मानी जाएगी जब यह साबित हो कि होटल में व्यापक स्तर पर स्वच्छता संबंधी गंभीर लापरवाही या खाद्य सुरक्षा नियमों का लगातार उल्लंघन किया गया हो।

निरीक्षण के बाद हुआ था लाइसेंस निलंबित

जानकारी के अनुसार, खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने नई मुंबई स्थित एक होटल का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को परिसर में दो छोटे कीड़े दिखाई दिए। इसके बाद एफएसएसएआई ने होटल का लाइसेंस निलंबित कर दिया। होटल प्रबंधन ने इस कार्रवाई को अदालत में चुनौती देते हुए कहा कि निरीक्षण रिपोर्ट में स्वच्छता और रखरखाव को लेकर कोई गंभीर कमी दर्ज नहीं की गई थी और केवल दो कीड़े मिलने के आधार पर इतना कठोर कदम उठाना अनुचित है।

होटल प्रबंधन का यह भी तर्क था कि निरीक्षण रिपोर्ट में अधिकांश मानकों का पालन संतोषजनक पाया गया था। ऐसे में लाइसेंस निलंबन से होटल के कारोबार, कर्मचारियों की आजीविका और ग्राहकों के विश्वास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा।

अदालत ने क्या कहा?

बॉम्बे हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों को किसी भी कार्रवाई में ‘अनुपातिकता के सिद्धांत’ (Principle of Proportionality) का पालन करना चाहिए। यदि निरीक्षण में केवल मामूली कमी सामने आती है, तो पहले सुधार के निर्देश दिए जाने चाहिए। सीधे लाइसेंस निलंबित करना अंतिम विकल्प होना चाहिए।

खंडपीठ ने कहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड से यह स्पष्ट नहीं होता कि होटल में स्वच्छता व्यवस्था पूरी तरह विफल थी या खाद्य सुरक्षा को गंभीर खतरा था। निरीक्षण रिपोर्ट में रखरखाव और संचालन को लेकर संतोषजनक टिप्पणियां भी दर्ज थीं। ऐसे में केवल दो कीड़ों की मौजूदगी के आधार पर लाइसेंस निलंबन उचित नहीं ठहराया जा सकता।

संतुलित कार्रवाई की जरूरत

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि खाद्य सुरक्षा नियमों का पालन हर होटल और रेस्टोरेंट की जिम्मेदारी है। यदि कहीं गंभीर अनियमितता मिलती है तो संबंधित अधिकारियों को सख्त कार्रवाई करने का पूरा अधिकार है। लेकिन कार्रवाई तथ्यों और परिस्थितियों के अनुरूप होनी चाहिए। मामूली त्रुटियों और गंभीर उल्लंघनों में अंतर करना भी आवश्यक है।

अदालत ने कहा कि नियामक संस्थाओं का उद्देश्य केवल दंड देना नहीं, बल्कि खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित कराना भी होना चाहिए। इसलिए जहां सुधार की संभावना हो, वहां सुधारात्मक कदमों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

होटल उद्योग के लिए महत्वपूर्ण फैसला

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला होटल, रेस्टोरेंट और खाद्य कारोबार से जुड़े हजारों प्रतिष्ठानों के लिए महत्वपूर्ण मिसाल साबित हो सकता है। इससे यह संदेश जाता है कि नियामक एजेंसियां कार्रवाई करते समय निष्पक्षता और संतुलन बनाए रखें तथा प्रत्येक मामले का मूल्यांकन उसके वास्तविक तथ्यों के आधार पर करें।

हालांकि विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि इस फैसले का अर्थ यह नहीं है कि स्वच्छता मानकों में लापरवाही स्वीकार्य होगी। यदि किसी प्रतिष्ठान में खाद्य सुरक्षा नियमों का गंभीर उल्लंघन पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जा सकती है।

उपभोक्ताओं की सुरक्षा सर्वोच्च

खाद्य सुरक्षा कानूनों का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराना है। इसी कारण एफएसएसएआई समय-समय पर होटल, रेस्टोरेंट और खाद्य प्रतिष्ठानों का निरीक्षण करता है। अदालत ने भी अपने फैसले में स्पष्ट किया कि उपभोक्ताओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है, लेकिन प्रशासनिक कार्रवाई कानून और न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप होनी चाहिए।

फैसला क्यों है अहम?

इस निर्णय ने यह स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी नियामक संस्था को कठोर कार्रवाई से पहले यह देखना होगा कि संबंधित कमी कितनी गंभीर है और क्या उससे वास्तव में सार्वजनिक स्वास्थ्य को खतरा उत्पन्न होता है। यदि कमी मामूली है और उसे तत्काल सुधारा जा सकता है, तो सुधार का अवसर देना अधिक उचित होगा।

बॉम्बे हाईकोर्ट के इस फैसले को प्रशासनिक न्याय, निष्पक्षता और संतुलित निर्णय प्रक्रिया की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में ऐसे मामलों में यह निर्णय एक महत्वपूर्ण न्यायिक मिसाल के रूप में देखा जा सकता है।

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