• होम
  • दिल्ली/NCR
  • अंकित शर्मा हत्याकांड में कपिल मिश्रा ने फांसी की सजा की मांग की

अंकित शर्मा हत्याकांड में कपिल मिश्रा ने फांसी की सजा की मांग की

नई दिल्ली। दिल्ली सरकार में मंत्री कपिल मिश्रा ने अंकित शर्मा हत्याकांड में दोषी ठहराए गए पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन को सुनाई गई उम्रकैद की सजा पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि यह न्याय की शुरुआत है। उन्होंने उम्मीद जताई कि उच्च न्यायालय इस सजा को बढ़ाकर मृत्युदंड में बदलने पर विचार करेगा। कपिल […]

Advertisement
Gauravshali Bharat
Gauravshali Bharat News
  • July 31, 2026 5:04 pm IST, Published 48 minutes ago

नई दिल्ली। दिल्ली सरकार में मंत्री कपिल मिश्रा ने अंकित शर्मा हत्याकांड में दोषी ठहराए गए पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन को सुनाई गई उम्रकैद की सजा पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि यह न्याय की शुरुआत है। उन्होंने उम्मीद जताई कि उच्च न्यायालय इस सजा को बढ़ाकर मृत्युदंड में बदलने पर विचार करेगा।

कपिल मिश्रा ने सोशल मीडिया मंच X पर अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए लिखा कि अंकित शर्मा की जिस तरह हत्या की गई, वह अत्यंत क्रूर और अमानवीय थी। उन्होंने दावा किया कि हत्या के दौरान और मृत्यु के बाद भी शव पर कई बार चाकू से वार किए गए तथा बाद में शव को नाले में फेंक दिया गया। उनके अनुसार यह मामला “रेयरेस्ट ऑफ रेयर” (दुर्लभतम मामलों) की श्रेणी में आता है।

मंत्री ने अपने पोस्ट में कहा कि अदालत द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा न्यायिक प्रक्रिया का पहला कदम है, लेकिन घटना की गंभीरता को देखते हुए उच्च न्यायालय में सजा को फांसी में बदलने की संभावना पर विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने लिखा कि उन्हें उम्मीद है कि अपील के दौरान इस पहलू पर न्यायालय उचित निर्णय लेगा।

अंकित शर्मा हत्याकांड वर्ष 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा के दौरान सामने आया था। अंकित शर्मा उस समय एक सरकारी कर्मचारी थे और हिंसा के दौरान उनकी मौत हो गई थी। यह मामला लंबे समय तक जांच और न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा बना रहा। अदालत के फैसले के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों और नेताओं की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

भारतीय कानून में मृत्युदंड केवल उन्हीं मामलों में दिया जाता है जिन्हें न्यायालय “रेयरेस्ट ऑफ रेयर” मानता है। ऐसे मामलों में अपराध की प्रकृति, उसकी क्रूरता, परिस्थितियां और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अदालत अंतिम निर्णय लेती है। यदि किसी पक्ष को निचली अदालत के फैसले से असहमति होती है, तो वह उच्च न्यायालय में अपील कर सकता है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस मामले का कानूनी पक्ष अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। यदि संबंधित पक्ष उच्च न्यायालय में अपील करते हैं, तो वहां सजा की समीक्षा की जा सकती है। अदालत उपलब्ध रिकॉर्ड, साक्ष्यों और कानूनी प्रावधानों के आधार पर अंतिम निर्णय देगी। फिलहाल कपिल मिश्रा के बयान ने इस मामले को लेकर राजनीतिक और कानूनी चर्चा को फिर से तेज कर दिया है। हालांकि अंतिम फैसला न्यायिक प्रक्रिया के तहत उच्च अदालतों में होने वाली सुनवाई पर निर्भर करेगा।

 

 

Advertisement