स्कूल-कॉलेजों के 50 मीटर दायरे में जंक फूड की बिक्री पर रोक

हेल्दी फूड को मिलेगा बढ़ावा बेंगलुरु। महाराष्ट्र के बाद अब कर्नाटक सरकार ने भी बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए बड़ा फैसला लिया है। राज्य के खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) ने स्कूलों और कॉलेजों के 50 मीटर के दायरे में अधिक फैट, चीनी और नमक (HFSS) वाले जंक फूड की बिक्री […]

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  • August 2, 2026 1:45 pm IST, Published 16 minutes ago

हेल्दी फूड को मिलेगा बढ़ावा

बेंगलुरु। महाराष्ट्र के बाद अब कर्नाटक सरकार ने भी बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए बड़ा फैसला लिया है। राज्य के खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) ने स्कूलों और कॉलेजों के 50 मीटर के दायरे में अधिक फैट, चीनी और नमक (HFSS) वाले जंक फूड की बिक्री पर रोक लगाने संबंधी एडवाइजरी जारी की है।

यह निर्णय जुलाई में राज्य के 134 स्कूलों और कॉलेजों के आसपास स्थित फूड बिजनेस प्रतिष्ठानों के निरीक्षण के बाद लिया गया। जांच में कई दुकानों पर अत्यधिक वसा, चीनी और नमक वाले खाद्य पदार्थों की बिक्री पाई गई, जिसके बाद विभाग ने सख्त दिशा-निर्देश जारी किए।

निरीक्षण में क्या मिला?

एफएसडीए के अनुसार निरीक्षण के दौरान खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता, साफ-सफाई, फूड सेफ्टी मानकों का पालन, लेबलिंग, एक्सपायरी डेट, लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन की जांच की गई। इस दौरान कई प्रतिष्ठानों में नियमों के उल्लंघन और जंक फूड की बिक्री सामने आई।

50 मीटर के दायरे में जंक फूड नहीं बिकेगा

24 जुलाई को जारी एडवाइजरी में स्पष्ट किया गया है कि स्कूल और कॉलेज परिसर के 50 मीटर के भीतर अधिक फैट, चीनी और नमक वाले खाद्य पदार्थों की बिक्री नहीं की जाएगी। इसके साथ ही हेल्दी फूड विकल्पों को बढ़ावा देने और सभी फूड बिजनेस ऑपरेटरों को खाद्य सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं।

जिला अधिकारियों को सख्त निर्देश

एफएसडीए ने सभी जिलों के फूड सेफ्टी अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे इस एडवाइजरी को प्रभावी ढंग से लागू करें। साथ ही स्कूल प्रबंधन, दुकानदारों और आम लोगों के बीच जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।

नियम तोड़ने पर होगी कार्रवाई

विभाग ने कहा है कि स्कूलों के आसपास संचालित सभी खाद्य प्रतिष्ठानों के लिए फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 के तहत लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा। नियमों का उल्लंघन करने पर नोटिस जारी किया जाएगा, लाइसेंस निलंबित या रद्द किया जा सकता है, खाद्य सामग्री जब्त की जा सकती है और आवश्यक होने पर कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।

बच्चों के भोजन को लेकर भी चिंता

जांच में यह भी सामने आया कि कुछ स्कूलों में बच्चों को दिए जाने वाले भोजन में रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट, जैसे सफेद ब्रेड, पास्ता और प्रोसेस्ड स्नैक्स की मात्रा अधिक थी। एफएसडीए ने सलाह दी है कि ऐसे भोजन में लीन प्रोटीन, हेल्दी फैट, साबुत अनाज, दालें, मोटे अनाज (मिलेट्स), दूध, अंडे तथा ताजे मौसमी फल और सब्जियों को शामिल किया जाए, ताकि बच्चों को संतुलित और पौष्टिक आहार मिल सके।

स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी बढ़ी

एडवाइजरी में स्कूल प्रबंधन से कहा गया है कि परिसर में जंक फूड की बिक्री पूरी तरह रोकी जाए और प्रमुख स्थानों पर चेतावनी संबंधी बोर्ड लगाए जाएं। साथ ही फोर्टिफाइड आटा, चावल, दूध, खाद्य तेल और डबल फोर्टिफाइड नमक का उपयोग निर्धारित मानकों के अनुसार करने की भी सलाह दी गई है।

कर्नाटक सरकार का यह कदम बच्चों में बढ़ते मोटापे, मधुमेह और अन्य जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों की रोकथाम की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

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