नई दिल्ली: भारत के रियल एस्टेट सेक्टर में वित्त वर्ष 26 की पहली तिमाही में डील की संख्या सालाना आधार पर बढ़कर 32 हो गई है, जो कि पिछले साल समान अवधि में यह संख्या 28 थी। यह जानकारी शुक्रवार को जारी रिपोर्ट में दी गई। इससे पहले की तिमाही में डील की संख्या 26 थी। ग्रांट थॉर्नटन भारत की रिपोर्ट में बताया गया कि 2026 की पहली तिमाही में बड़े सौदे नहीं होने पाने के कारण डील की वैल्यू में हल्की नरमी देखने को मिली है और यह मार्च तिमाही में 763 मिलियन डॉलर पर रही है। रिपोर्ट में बताया गया कि जनवरी से मार्च की अवधि में डील की संख्या में बढ़ोतरी और वैल्यू में कमी आना दिखाता है कि निवेशक छोटे और मध्यम आकार के सौदों की तरफ अधिक आकर्षित हो रहे हैं। डील की संख्या में विलय और अधिग्रहण सेगमेंट 19 सौदों के साथ शीर्ष पर रहा। हालांकि, बड़े सौदों के न होने के चलते इसकी वैल्यू में तेजी से कम होकर 305 मिलियन डॉलर पर हो गई। ग्रांट थॉर्नटन भारत के पार्टनर और रियल एस्टेट उद्योग प्रमुख शबाला शिंदे ने कहा, “इस तिमाही में मध्यम आकार की और आय उत्पन्न करने वाली संपत्तियों की ओर स्पष्ट रुझान देखने को मिला, जिसमें घरेलू गतिविधि का दबदबा बना रहा और निजी इक्विटी पूंजी का एक प्रमुख स्रोत बनी रही।” शिंदे ने आगे कहा, निवेश के रुझानों से वाणिज्यिक संपत्तियों, विशेष रूप से कार्यालय और खुदरा प्लेटफॉर्मों के प्रति मजबूत रुझान का संकेत मिला, जो स्पष्ट यील्ड और स्थिर नकदी प्रवाह द्वारा समर्थित है, जबकि आरईआईटी के नेतृत्व वाले लेनदेन ने उच्च गुणवत्ता वाली, आय उत्पन्न करने वाली संपत्तियों में संस्थागत विश्वास को और मजबूत किया है। उन्होंने कहा कि कुल मिलाकर, सौदों का माहौल लचीला बना रहा, हालांकि निवेशक अधिक चयनात्मक दृष्टिकोण अपना रहे हैं, और चल रही व्यापक और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच संपत्ति-स्तर के प्रदर्शन और निष्पादन की निश्चितता को प्राथमिकता दे रहे हैं। प्राइवेट इक्विटी और वेंचर कैपिटल गतिविधि में 458 मिलियन डॉलर मूल्य के 13 सौदे दर्ज किए गए, जो पिछले एक वर्ष में सबसे अधिक तिमाही मात्रा है। हालांकि, पिछली तिमाही में हुए किसी बड़े सौदे के अभाव के कारण मूल्यों में क्रमिक रूप से 71 प्रतिशत की गिरावट आई है।