उदयनिधि स्टालिन मामले में हाईकोर्ट बोला, पूछताछ के बाद करें रिहा

चेन्नई: तमिलनाडु की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी को लेकर विवाद गहरा गया है। द्रमुक (DMK) नेता और तमिलनाडु विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उदयनिधि स्टालिन एक कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में कानूनी प्रक्रिया का सामना कर रहे हैं। अभिनेत्री तृषा को लेकर दिए गए कथित बयान पर उठे विवाद के बीच पुलिस ने उन्हें […]

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  • August 4, 2026 3:46 pm IST, Published 2 hours ago

चेन्नई: तमिलनाडु की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी को लेकर विवाद गहरा गया है। द्रमुक (DMK) नेता और तमिलनाडु विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उदयनिधि स्टालिन एक कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में कानूनी प्रक्रिया का सामना कर रहे हैं। अभिनेत्री तृषा को लेकर दिए गए कथित बयान पर उठे विवाद के बीच पुलिस ने उन्हें पूछताछ के लिए हिरासत में लिया। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान मद्रास हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि जांच एजेंसियां आवश्यक पूछताछ कर सकती हैं, लेकिन पूछताछ पूरी होने के बाद उन्हें रिहा किया जाना चाहिए।

मामला उस समय सामने आया जब कावेरी जल विवाद को लेकर तंजावुर में आयोजित एक सार्वजनिक रैली के दौरान उदयनिधि स्टालिन विपक्ष पर हमला बोल रहे थे। इसी दौरान भीड़ के कुछ लोगों ने अभिनेत्री तृषा का नाम लेकर नारे लगाए। आरोप है कि इस पर प्रतिक्रिया देते हुए उदयनिधि ने ऐसा बयान दिया जिसे विपक्षी दलों और कुछ संगठनों ने महिलाओं की गरिमा के खिलाफ और दोहरे अर्थ वाला बताया। इसके बाद विवाद तेजी से बढ़ गया और मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया।

शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया के तहत उदयनिधि स्टालिन को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की। हालांकि, इस कार्रवाई को लेकर मद्रास हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई, जहां सरकारी पक्ष ने अदालत को भरोसा दिलाया कि उदयनिधि को गिरफ्तार करने या न्यायिक हिरासत में भेजने की कोई योजना नहीं है।

सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने अदालत को बताया कि यह मामला एक महिला की गरिमा से जुड़ा है और जांच के लिए पूछताछ आवश्यक है। उन्होंने कहा कि घटना तंजावुर जिले में हुई थी, इसलिए वहीं पर आवश्यक कानूनी प्रक्रिया अपनाई जा रही है। साथ ही अदालत को यह भी बताया गया कि पूछताछ पूरी होने के बाद उदयनिधि स्टालिन को छोड़ दिया जाएगा और उन्हें रिमांड पर भेजने का कोई प्रस्ताव नहीं है।

सरकारी पक्ष की इस दलील के बाद मद्रास हाईकोर्ट ने कहा कि जांच एजेंसियां कानून के दायरे में रहकर आवश्यक पूछताछ कर सकती हैं, लेकिन पूछताछ पूरी होने के बाद उदयनिधि स्टालिन को तत्काल रिहा किया जाए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि मौजूदा परिस्थितियों में उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजने की आवश्यकता नहीं दिखाई देती।

विवाद बढ़ने के बाद उदयनिधि स्टालिन ने भी अपनी सफाई सार्वजनिक रूप से दी। उन्होंने कहा कि उनके बयान का संबंध केवल कावेरी नदी के पानी से था और उसका कोई दूसरा अर्थ नहीं निकाला जाना चाहिए। उनका कहना था कि उनकी टिप्पणी को गलत तरीके से पेश किया गया है और उसका उद्देश्य किसी व्यक्ति या महिला का अपमान करना नहीं था।

दूसरी ओर, विपक्षी दलों ने इस स्पष्टीकरण को स्वीकार करने से इनकार करते हुए कहा कि सार्वजनिक जीवन से जुड़े नेताओं को अपने शब्दों के चयन में अधिक सावधानी बरतनी चाहिए। उनका आरोप है कि इस तरह की टिप्पणियां सामाजिक मर्यादा और महिलाओं के सम्मान के खिलाफ संदेश देती हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद केवल एक बयान तक सीमित नहीं है, बल्कि तमिलनाडु की मौजूदा राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का भी हिस्सा बन चुका है। ऐसे मामलों में अदालत की भूमिका कानूनी प्रक्रिया को संतुलित बनाए रखने की होती है, ताकि जांच भी प्रभावित न हो और किसी व्यक्ति के अधिकारों का भी अनावश्यक हनन न हो।

अब आगे की कार्रवाई पुलिस जांच और उपलब्ध साक्ष्यों पर निर्भर करेगी। यदि जांच में कोई ठोस आधार मिलता है तो कानून के अनुसार आगे की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। फिलहाल मद्रास हाईकोर्ट के निर्देश के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि पूछताछ पूरी होने के बाद उदयनिधि स्टालिन को रिहा किया जाएगा और मामले की जांच नियमानुसार जारी रहेगी।

 

 

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