यूपी में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल! 13 IAS अफसरों के तबादले

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने एक बार फिर बड़े स्तर पर प्रशासनिक फेरबदल करते हुए मंगलवार को 13 वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों के तबादले कर दिए। इस बदलाव में गोरखपुर, बस्ती, बरेली और प्रयागराज जैसे महत्वपूर्ण मंडलों के नए मंडलायुक्त नियुक्त किए गए हैं। इसके साथ ही कई प्रमुख विभागों और विकास प्राधिकरणों […]

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  • August 4, 2026 11:00 pm IST, Published 1 hour ago

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने एक बार फिर बड़े स्तर पर प्रशासनिक फेरबदल करते हुए मंगलवार को 13 वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों के तबादले कर दिए। इस बदलाव में गोरखपुर, बस्ती, बरेली और प्रयागराज जैसे महत्वपूर्ण मंडलों के नए मंडलायुक्त नियुक्त किए गए हैं। इसके साथ ही कई प्रमुख विभागों और विकास प्राधिकरणों में भी अधिकारियों की नई तैनाती की गई है। माना जा रहा है कि सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक प्रभावी, जवाबदेह तथा विकास कार्यों में तेजी लाने के उद्देश्य से यह फैसला लिया है।

सरकार की ओर से जारी आदेश के अनुसार गोरखपुर, बस्ती, बरेली और प्रयागराज मंडलों में नए मंडलायुक्तों की नियुक्ति की गई है। प्रशासनिक हलकों में इन तबादलों को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि ये मंडल प्रदेश के विकास, कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक दृष्टि से अहम भूमिका निभाते हैं।

गोरखपुर के नए मंडलायुक्त के रूप में इंद्र विक्रम सिंह को जिम्मेदारी सौंपी गई है। वह इससे पहले कृषि, कृषि विपणन, कृषि विदेश व्यापार एवं निर्यात प्रोत्साहन विभाग में सचिव तथा राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद के निदेशक के रूप में कार्यरत थे। वहीं गोरखपुर के मंडलायुक्त रहे अनिल ढींगरा को आवास विकास परिषद का आयुक्त, नगर भूमि सीमारोपण के निदेशक तथा आवास विभाग का सचिव बनाया गया है।

बस्ती मंडल की कमान अब वैभव श्रीवास्तव को दी गई है। वह पहले पीसीडीएफ के प्रबंध निदेशक के पद पर कार्यरत थे। बस्ती के पूर्व मंडलायुक्त अखिलेश सिंह के 31 जुलाई को सेवानिवृत्त होने के बाद यह पद रिक्त हो गया था। सरकार ने इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के लिए वैभव श्रीवास्तव पर भरोसा जताया है।

बरेली मंडल के नए मंडलायुक्त शंभु कुमार बनाए गए हैं। इससे पहले वह पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम में प्रबंध निदेशक के पद पर कार्यरत थे। वहीं प्रयागराज मंडल की जिम्मेदारी अब डॉ. लोकेश एम को सौंपी गई है, जो इससे पहले लोक निर्माण विभाग में सचिव के पद पर कार्य कर रहे थे।

तबादला सूची में कई अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को भी नई जिम्मेदारियां दी गई हैं। प्रमुख सचिव कृषि रविंद्र को राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। प्रकाश बिंदु को पीसीडीएफ का प्रबंध निदेशक बनाया गया है। वहीं बरेली के मंडलायुक्त रहे भूपेंद्र एस. चौधरी को प्रशासनिक सुधार विभाग का सचिव नियुक्त किया गया है।

इसी प्रकार प्रयागराज की मंडलायुक्त रहीं सौम्या अग्रवाल को श्रमायुक्त बनाया गया है। राजस्व परिषद प्रयागराज में सदस्य न्यायिक के पद पर कार्यरत संदीप कुमार को पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम का प्रबंध निदेशक नियुक्त किया गया है। प्रशासनिक अनुभव को देखते हुए इन अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।

सरकार ने नोएडा से जुड़े महत्वपूर्ण पदों पर भी बदलाव किया है। गोरखपुर विकास प्राधिकरण के सचिव पुष्पराज सिंह को नोएडा का अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी बनाया गया है। वह हाल ही में पीसीएस से आईएएस पद पर पदोन्नत हुए थे। वहीं नोएडा के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी सतीश पाल को विशेष सचिव गृह विभाग बनाया गया है।

डॉ. बलकार सिंह को आवास विकास परिषद से हटाकर उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) का मुख्य कार्यपालक अधिकारी नियुक्त किया गया है। माना जा रहा है कि औद्योगिक निवेश और विकास परियोजनाओं को गति देने के लिए सरकार ने यह निर्णय लिया है।

प्रशासनिक जानकारों का कहना है कि योगी सरकार समय-समय पर अधिकारियों की कार्यशैली, प्रदर्शन और प्रशासनिक जरूरतों के आधार पर तबादले करती रही है। सरकार का उद्देश्य शासन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और परिणाम आधारित बनाना है। नए अधिकारियों से विकास परियोजनाओं को गति मिलने, कानून-व्यवस्था मजबूत होने तथा जनहित से जुड़े कार्यों में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है।

गौरतलब है कि इससे पहले 27 जुलाई की देर रात भी प्रदेश सरकार ने 41 पीसीएस अधिकारियों का बड़े पैमाने पर तबादला किया था। उस सूची में एडीएम और एसडीएम स्तर के कई अधिकारियों की जिम्मेदारियां बदली गई थीं। अब आईएएस अधिकारियों के तबादलों के बाद स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि सरकार प्रशासनिक व्यवस्था को लगातार मजबूत करने और बेहतर प्रदर्शन सुनिश्चित करने की दिशा में सक्रिय है।

प्रदेश के विभिन्न जिलों और मंडलों में नए अधिकारियों की तैनाती के बाद विकास योजनाओं के क्रियान्वयन, निवेश, कानून-व्यवस्था और जनसेवाओं में तेजी आने की संभावना व्यक्त की जा रही है। आने वाले दिनों में इन अधिकारियों की कार्यशैली और फैसलों पर प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों ही हलकों की नजर रहेगी।

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