रेस्टोरेंट की रसोई में कॉकरोच! लखनऊ-नोएडा में 10 पर एक्शन

खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) की कार्रवाई ने एक बार फिर रेस्टोरेंट और फूड आउटलेट्स में साफ-सफाई तथा सुरक्षित खाद्य प्रबंधन को लेकर सवाल खड़े किए हैं।

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  • September 22, 2026 7:11 am IST, Published 1 hour ago

लखनऊ/नोएडा। उत्तर प्रदेश में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और रसोई की स्वच्छता को लेकर खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) की कार्रवाई ने एक बार फिर रेस्टोरेंट और फूड आउटलेट्स में साफ-सफाई तथा सुरक्षित खाद्य प्रबंधन को लेकर सवाल खड़े किए हैं। ‘शुद्ध ही शुभ है’ अभियान के तहत लखनऊ, गोरखपुर और नोएडा में किए गए निरीक्षण के दौरान कई प्रतिष्ठानों में खाद्य सुरक्षा मानकों से जुड़ी गंभीर कमियां सामने आने की जानकारी है। विभागीय कार्रवाई के तहत कुल 10 प्रतिष्ठानों के खाद्य लाइसेंस निलंबित किए गए और संबंधित प्रतिष्ठानों को बंद कराया गया।

कार्रवाई की जानकारी सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी इससे जुड़ी तस्वीरें और दावे तेजी से प्रसारित हुए हैं। हालांकि, किसी भी प्रतिष्ठान के संबंध में अंतिम निष्कर्ष विभागीय निरीक्षण और नियमानुसार होने वाली आगे की कार्रवाई के आधार पर ही माना जाना चाहिए।

लखनऊ में आठ प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई

खाद्य सुरक्षा विभाग के अभियान में लखनऊ के आठ प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया गया, जहां अलग-अलग प्रकार की कमियां दर्ज की गईं। रिपोर्टों के अनुसार लुलु मॉल स्थित मोती महल रेस्टोरेंट की रसोई में कॉकरोच पाए गए। इसके अलावा कच्चे और पके खाद्य पदार्थों तथा वेज और नॉनवेज सामग्री को अलग-अलग रखने की उचित व्यवस्था नहीं मिलने की बात सामने आई। विभाग ने इसे खाद्य स्वच्छता और क्रॉस-कंटेमिनेशन के लिहाज से गंभीर कमी माना।

ठाकुरगंज स्थित पिज्जा हट के निरीक्षण में वेज और नॉनवेज खाद्य पदार्थों को एक ही ओवन में पकाए जाने की बात सामने आई। खाद्य सुरक्षा के दृष्टिकोण से अलग-अलग प्रकार के खाद्य पदार्थों के बीच अनचाहे संपर्क को रोकना महत्वपूर्ण माना जाता है। इसलिए निरीक्षण के दौरान इस व्यवस्था को भी जांच के दायरे में लिया गया।

गोमती नगर के वास्तु खंड स्थित चंपारण मीट में कच्चे और सेमी-कुक्ड मांस को साथ रखे जाने, दुर्गंध तथा पुराने या गंदे तेल से संबंधित कमियां दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है। इसी तरह विभूति खंड स्थित क्लब जलवा में सेमी-कुक्ड खाद्य पदार्थों के साथ चिकन, मछली, मोमोज और सब्जियों के अस्वच्छ भंडारण की बात रिपोर्टों में कही गई है।

मद्रास डोसा से लेकर बिंदास बार तक जांच

फन मॉल स्थित मद्रास डोसा के निरीक्षण में भी स्वच्छता और कीट संक्रमण से जुड़ी कमियां सामने आने की जानकारी है। समिट बिल्डिंग के बिंदास बार की रसोई में गंदगी, खराब ड्रेनेज और खुले डस्टबिन जैसी स्थितियां दर्ज की गईं। ऐसे स्थानों पर भोजन तैयार करने के दौरान स्वच्छता बनाए रखना खाद्य सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है।

अलीगंज स्थित विंडीज बर्गर को लेकर रिपोर्ट में प्री-कुक्ड खाद्य पदार्थों में प्रिजर्वेटिव के इस्तेमाल और उसके संबंध में उपभोक्ताओं को स्पष्ट जानकारी नहीं दिए जाने की बात सामने आई। वहीं लुलु मॉल के एमआर ईटिंग पॉइंट में मरम्मत या इंफ्रास्ट्रक्चर कार्य के दौरान खाद्य प्रसंस्करण किए जाने की स्थिति बताई गई, जिसके कारण काम पूरा होने तक खाद्य प्रसंस्करण बंद कराने की कार्रवाई की गई।

गोरखपुर और नोएडा में भी गंभीर कमियां

अभियान का असर लखनऊ तक सीमित नहीं रहा। गोरखपुर के फूड केज के निरीक्षण में किचन और प्रोसेसिंग क्षेत्र में कॉकरोच की मौजूदगी, अवरुद्ध ड्रेनेज तथा खराब स्वच्छता व्यवस्था मिलने की जानकारी सामने आई। इसके बाद संबंधित प्रतिष्ठान के खिलाफ कार्रवाई की गई।

नोएडा के एफ बार एंड लाउंज में निरीक्षण के दौरान रोडेंट और पेस्ट इंफेस्टेशन यानी चूहों तथा कीटों की मौजूदगी से संबंधित कमियां दर्ज की गईं। विभाग ने खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए कार्रवाई की।

इस पूरे अभियान के दौरान विभाग का फोकस केवल रसोई की सफाई तक सीमित नहीं रहा। खाद्य पदार्थों के सुरक्षित भंडारण, कच्चे और पके भोजन के पृथक्करण, वेज और नॉनवेज सामग्री को अलग रखने, तापमान नियंत्रण, साफ पानी, खाद्य-उपयुक्त पैकेजिंग और पेस्ट कंट्रोल जैसे पहलुओं की भी जांच की गई।

233 प्रतिष्ठानों की जांच का भी सामने आया आंकड़ा

अलग-अलग रिपोर्टों में अभियान के व्यापक स्तर को लेकर यह जानकारी भी सामने आई है कि लखनऊ, नोएडा और गोरखपुर में कुल 233 फास्ट फूड चेन, रेस्टोरेंट और अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया गया तथा कमियां मिलने पर सुधार नोटिस जारी किए गए। एक रिपोर्ट में 163 सुधार नोटिस जारी किए जाने का उल्लेख है।

यह कार्रवाई ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब शहरी क्षेत्रों में बाहर खाना खाने का चलन तेजी से बढ़ रहा है। ग्राहक आमतौर पर किसी रेस्टोरेंट में भोजन खरीदते समय उसके स्वाद, कीमत और ब्रांड को देखते हैं, लेकिन भोजन तैयार करने वाली रसोई की वास्तविक स्वच्छता उनके सामने हमेशा दिखाई नहीं देती। ऐसे में नियमित निरीक्षण खाद्य सुरक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा बन जाता है।

उपभोक्ताओं की भूमिका भी महत्वपूर्ण

खाद्य सुरक्षा केवल सरकारी विभाग या रेस्टोरेंट संचालकों की जिम्मेदारी नहीं है। उपभोक्ताओं को भी भोजन की गुणवत्ता और स्वच्छता को लेकर जागरूक रहना चाहिए। यदि किसी प्रतिष्ठान में स्पष्ट रूप से गंदगी, खराब भंडारण, दुर्गंधयुक्त खाद्य पदार्थ या अन्य असामान्य स्थिति दिखाई देती है तो संबंधित प्राधिकरण को इसकी सूचना दी जा सकती है।

खाद्य कारोबारियों के लिए भी यह कार्रवाई एक स्पष्ट संदेश देती है कि भोजन तैयार करने वाले स्थान की स्वच्छता, सुरक्षित भंडारण और खाद्य पदार्थों की सही जानकारी देना केवल औपचारिकता नहीं है। इन मानकों का पालन सीधे उपभोक्ता सुरक्षा से जुड़ा है।

‘शुद्ध ही शुभ है’ अभियान के तहत सामने आई कार्रवाई से यह मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है कि बड़े रेस्टोरेंट और फूड चेन में नियमित स्वच्छता जांच कितनी जरूरी है। फिलहाल संबंधित प्रतिष्ठानों को खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप सुधार करने और नियमानुसार आगे की प्रक्रिया का सामना करना होगा।

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