दरअसल, दुलारचंद यादव की हत्या बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान हुई थी। उस समय वह जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार पीयूष प्रियदर्शी के समर्थन में चुनाव प्रचार कर रहे थे। इसी दौरान अनंत सिंह और दुलारचंद यादव से जुड़े काफिले आमने-सामने आ गए। दोनों पक्षों के बीच विवाद बढ़ने के बाद घटनास्थल पर तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई और गोलीबारी की घटना हुई। इसी घटनाक्रम में दुलारचंद यादव की मौत हो गई थी।
घटना के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और अनंत सिंह समेत 80 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया। सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में पटना की बेऊर जेल भेजा गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने भी कार्रवाई की थी। घटनाक्रम के बाद दो थाना प्रभारियों को निलंबित कर दिया गया था। इस हत्याकांड ने चुनावी माहौल में कानून-व्यवस्था और राजनीतिक हिंसा को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए थे।
मामले की जांच के शुरुआती दौर में दुलारचंद यादव को गोली लगने की बात सामने आई थी। हालांकि, बाद में पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उनकी मौत के कारण को लेकर अलग जानकारी सामने आई। रिपोर्ट के मुताबिक, उनके शरीर पर वाहन की टक्कर और छाती तथा हृदय के आसपास गंभीर चोटों के निशान थे। इन चोटों को उनकी मौत का कारण बताया गया। इसके बाद हत्याकांड की जांच में घटनास्थल पर मौजूद लोगों की भूमिका और पूरे घटनाक्रम को लेकर कई पहलुओं की पड़ताल की गई। इस मामले में अनंत सिंह को मार्च 2026 में पटना हाईकोर्ट से जमानत मिल गई थी। जमानत मिलने के बाद दुलारचंद यादव के परिवार की ओर से इस फैसले को चुनौती दी गई। उनके पोते नीरज कुमार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर आरोपियों को मिली राहत पर सवाल उठाए और अनंत सिंह की जमानत रद्द करने की मांग की।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान मामले की गंभीरता और जांच की स्थिति को ध्यान में रखा गया। अदालत ने अनंत सिंह को एक दिसंबर तक आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया है। साथ ही जांच एजेंसियों को चार महीने के भीतर जांच पूरी करने के लिए कहा है। इस निर्देश के बाद अब जांच की प्रक्रिया को निर्धारित समयसीमा में पूरा करना महत्वपूर्ण हो गया है। अनंत सिंह बिहार की राजनीति का चर्चित चेहरा रहे हैं। मोकामा क्षेत्र में उनका लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव माना जाता है। हालांकि, आपराधिक मामलों को लेकर भी उनका नाम लगातार सुर्खियों में रहा है। जेडीयू से निष्कासन के बाद भी वह राजनीतिक चर्चाओं में बने हुए हैं। दुलारचंद यादव हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट का ताजा आदेश उनके लिए कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अब इस मामले में सबकी नजर एक दिसंबर की समयसीमा और जांच एजेंसियों की आगे की कार्रवाई पर रहेगी। चार महीने में जांच पूरी करने के सुप्रीम कोर्ट के निर्देश से मामले की सुनवाई और जांच की दिशा भी प्रभावित हो सकती है। वहीं, दुलारचंद यादव के परिवार को इस आदेश से न्याय मिलने की उम्मीद बढ़ी है। हालांकि, मामले में अंतिम जिम्मेदारी और दोष का निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा।