ओम प्रकाश राजभर ने एमएलसी चुनाव के मतदान का हवाला देते हुए कहा कि इस चुनाव में लगभग 14 लाख मतदाता थे और करीब 60 प्रतिशत मतदान हुआ। उनके मुताबिक, मतदान के इस आंकड़े के आधार पर विधानसभा चुनाव में सरकार बनाने का दावा करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि एमएलसी चुनाव में सीमित मतदाता समूह ने हिस्सा लिया, इसलिए इसके परिणामों को पूरे प्रदेश के राजनीतिक माहौल का संकेत मानना सही नहीं होगा।
राजभर ने कहा कि इस चुनाव में पढ़े-लिखे मतदाताओं ने मतदान किया और परिणामों को इसी सीमित दायरे में समझना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कामकाज से संतुष्ट मतदाताओं का प्रभाव इस चुनाव में उसी तरह नहीं दिखा, जैसा व्यापक चुनावों में दिखाई दे सकता है। उन्होंने सपा को आगाह किया कि MLC चुनाव के नतीजों को लेकर जरूरत से ज्यादा उत्साहित होने से राजनीतिक आकलन गलत हो सकता है। अपने तर्क को आगे बढ़ाते हुए राजभर ने प्रदेश में मतदाताओं की कुल संख्या और एमएलसी चुनाव के मतदान के बीच अंतर का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में मतदाताओं की संख्या लगभग 14 करोड़ से अधिक है, जबकि एमएलसी चुनाव में मतदान करने वालों की संख्या करीब छह लाख के आसपास रही।
हालांकि, उनके बयान में विधानसभा चुनाव के संभावित मतदान का अनुमान भी शामिल था, जिसे वास्तविक मतदान के आंकड़े के बजाय एक राजनीतिक तुलना के रूप में देखा जाना चाहिए। राजभर का कहना था कि सीमित मतदाता वर्ग के चुनाव के परिणामों से पूरे प्रदेश के चुनावी रुझान का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है। इससे पहले भी राजभर ने एमएलसी चुनाव के परिणामों को लेकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन पर टिप्पणी की थी। उन्होंने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को उनकी पार्टी के प्रदर्शन के लिए बधाई देते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर कटाक्ष किया। सोशल मीडिया पर साझा अपनी प्रतिक्रिया में उन्होंने अखिलेश यादव से सवाल किया कि क्या उन्होंने अपने सहयोगी राहुल गांधी को भी चुनावी नतीजों के लिए बधाई दी है।
राजभर ने उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के चुनावी प्रदर्शन पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि पार्टी को कई जगहों पर उम्मीदवार उतारने में कठिनाई हुई और जहां प्रत्याशी मैदान में थे, वहां अपेक्षित सफलता नहीं मिली। उन्होंने कर्नाटक का जिक्र करते हुए भी राहुल गांधी पर राजनीतिक टिप्पणी की। इन बयानों के जरिए राजभर ने विपक्षी दलों के बीच तालमेल और चुनावी रणनीति को लेकर निशाना साधा। कांग्रेस की ओर से सीटों की मांग को लेकर भी राजभर ने सपा को सलाह दी। उन्होंने कांग्रेस के खुद को गठबंधन में बड़ा साझेदार मानने पर सवाल उठाते हुए कहा कि विधानसभा चुनाव के दौरान सीटों के बंटवारे पर चर्चा करते समय एमएलसी चुनाव के प्रदर्शन को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
राजभर ने यह भी पूछा कि जब सपा के उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे थे, तब कांग्रेस ने उनका समर्थन किस हद तक किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस अधिक सीटों की मांग करती है, लेकिन चुनाव के दौरान सहयोग अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहता। उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावों की तैयारियों के बीच इन बयानों से सपा, कांग्रेस और सुभासपा के बीच राजनीतिक बहस और तेज होने के संकेत हैं। जहां राजभर एमएलसी चुनाव के परिणामों को विधानसभा चुनाव से अलग मानने पर जोर दे रहे हैं, वहीं विपक्षी गठबंधन के भीतर सीटों के बंटवारे और आपसी समर्थन का सवाल भी महत्वपूर्ण बना हुआ है। आने वाले समय में इन दलों के नेताओं की प्रतिक्रियाएं और गठबंधन से जुड़े फैसले प्रदेश की राजनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।