बिलासपुर: कथित सर्पदंश घोटाला मामले में जेल में बंद शिवकुमारी साहू को बिलासपुर हाईकोर्ट से राहत मिली है। हाईकोर्ट ने मामले की परिस्थितियों, आरोपों की प्रकृति, जांच के दौरान सामने आई सामग्री और पोस्टमार्टम रिपोर्ट को ध्यान में रखते हुए शिवकुमारी को नियमित जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है। मामले की सुनवाई जस्टिस राकेश मोहन पांडेय की अदालत में हुई।
अदालत ने अपने आदेश में इस तथ्य को भी महत्वपूर्ण माना कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतक की मौत का कारण सांप के काटने से होना दर्ज किया गया है। कोर्ट ने यह भी ध्यान में रखा कि शिवकुमारी साहू 29 जुलाई 2026 से न्यायिक हिरासत में है और उसके खिलाफ किसी पुराने आपराधिक मामले का रिकॉर्ड सामने नहीं आया है। हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपी के विरुद्ध लगाए गए आरोपों की पुष्टि अभी ट्रायल के दौरान होनी है।
दरअसल, बिलासपुर में सामने आए कथित सर्पदंश घोटाले की जांच आर्थिक सहायता योजना से जुड़ी है। आरोप है कि कुछ मामलों में सामान्य परिस्थितियों में हुई मौत को सांप के काटने से हुई मृत्यु के रूप में दर्शाकर शासन की योजना के तहत चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्राप्त की गई। मामले की जांच आगे बढ़ने पर पुलिस ने पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सक के अलावा कथित तौर पर गिरोह से जुड़े अधिवक्ता और आर्थिक सहायता पाने वाले कुछ लाभार्थियों के खिलाफ भी अपराध दर्ज किया था।
इसी जांच के सिलसिले में सरकंडा पुलिस ने कबीरधाम जिले के पुटकीकला पांडातराई निवासी करीब 40 वर्षीय शिवकुमारी साहू को 29 जुलाई 2026 को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। इसके बाद उसकी ओर से हाईकोर्ट में नियमित जमानत के लिए आवेदन प्रस्तुत किया गया।
जमानत याचिका में शिवकुमारी साहू ने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार करते हुए खुद को निर्दोष बताया। उसकी ओर से अदालत में तर्क दिया गया कि कथित फर्जीवाड़े में उसकी कोई भूमिका नहीं थी और न ही उसने किसी गलत तरीके से सरकारी आर्थिक सहायता हासिल करने की प्रक्रिया में हिस्सा लिया। याचिका में यह भी कहा गया कि सहायता राशि संबंधित दस्तावेजों की जांच और सत्यापन के बाद सक्षम अधिकारियों द्वारा मंजूर की गई थी। ऐसे में लाभार्थी के तौर पर शिवकुमारी को पूरे मामले के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
याचिका में पोस्टमार्टम रिपोर्ट का भी हवाला दिया गया। इसमें मौत का कारण सांप के काटने से होना दर्ज बताया गया है। बचाव पक्ष ने इसी आधार पर यह दलील दी कि मामले में आरोपी की भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष ट्रायल के बाद ही निकाला जा सकता है।
हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों और केस से जुड़े तथ्यों पर विचार करने के बाद जमानत आवेदन स्वीकार कर लिया। अदालत ने कहा कि शिवकुमारी लंबे समय से हिरासत में है और उसका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। उसके खिलाफ लगाए गए आरोप अभी न्यायिक परीक्षण के स्तर पर हैं और उन्हें ट्रायल में साबित किया जाना बाकी है। अदालत ने यह भी माना कि मुकदमे की पूरी कार्यवाही में समय लग सकता है। ऐसे में केवल आरोपों के आधार पर आरोपी को अनिश्चित अवधि तक हिरासत में रखना उचित नहीं होगा। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने शिवकुमारी साहू को नियमित जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।
हालांकि, जमानत मिलने का अर्थ मामले में लगे आरोपों से पूरी तरह मुक्त होना नहीं है। आरोपों की अंतिम पुष्टि या खारिज किए जाने का फैसला ट्रायल के दौरान पेश होने वाले साक्ष्यों और अदालत के अंतिम निर्णय पर निर्भर करेगा। फिलहाल हाईकोर्ट के आदेश के बाद शिवकुमारी साहू को जेल से रिहाई का रास्ता साफ हो गया है। मामले में पुलिस की जांच और आगे की न्यायिक प्रक्रिया जारी रहेगी।