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7 साल में 498 सफाई कर्मियों की मौत

सरकार ने लोकसभा में पेश किए आंकड़े नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने लोकसभा में बताया कि जनवरी 2019 से जून 2026 के बीच देशभर में सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान 498 सफाई कर्मियों की मौत हुई है। यह जानकारी सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास अठावले ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी […]

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  • August 5, 2026 9:14 am IST, Published 58 seconds ago

सरकार ने लोकसभा में पेश किए आंकड़े

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने लोकसभा में बताया कि जनवरी 2019 से जून 2026 के बीच देशभर में सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान 498 सफाई कर्मियों की मौत हुई है। यह जानकारी सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास अठावले ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।

सरकार ने स्पष्ट किया कि इन मौतों को मैनुअल स्कैवेंजिंग के तहत दर्ज नहीं किया गया है। सरकार के अनुसार, ये सभी मामले खतरनाक सफाई (Hazardous Cleaning) की श्रेणी में आते हैं।

साल-दर-साल मौतों का आंकड़ा

सरकार द्वारा लोकसभा में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार:

  • 2019: 132 मौतें (सबसे अधिक)
  • 2020: 34
  • 2021: 62
  • 2022: 88
  • 2023: 65
  • 2024: 54
  • 2025: 47
  • 2026 (जनवरी-जून): 16

कुल मौतें: 498

सरकार ने क्या दी सफाई?

सरकार ने बताया कि मैनुअल स्कैवेंजिंग का अर्थ अस्वच्छ शौचालयों, खुली नालियों, गड्ढों या रेलवे ट्रैक से मानव मल को हाथों से साफ करना है। वहीं, सीवर या सेप्टिक टैंक की बिना सुरक्षा उपकरणों के सफाई को ‘खतरनाक सफाई’ (Hazardous Cleaning) माना जाता है। इसी कारण इन 498 मौतों को मैनुअल स्कैवेंजिंग की श्रेणी में नहीं रखा गया।

सरकार का दावा- देश मैनुअल स्कैवेंजिंग मुक्त

सरकार ने यह भी बताया कि 2024-25 के दौरान देश के सभी जिलों में कराए गए सर्वेक्षण में एक भी मैनुअल स्कैवेंजर की पहचान नहीं हुई। सभी जिलों ने स्वयं को मैनुअल स्कैवेंजिंग मुक्त घोषित किया है।

हालांकि, इससे पहले 2013 और 2018 में हुए राष्ट्रीय सर्वेक्षण में 17 राज्यों में 58,098 मैनुअल स्कैवेंजर चिन्हित किए गए थे।

इन राज्यों में मिले थे सबसे अधिक मैनुअल स्कैवेंजर

  • उत्तर प्रदेश: 32,473
  • महाराष्ट्र: 6,325
  • उत्तराखंड: 4,988
  • असम: 3,921

लोकसभा में प्रस्तुत इन आंकड़ों ने एक बार फिर सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान सफाई कर्मियों की सुरक्षा, आधुनिक मशीनों के उपयोग और सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता जैसे मुद्दों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

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