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पुरानी वोल्वो के PUC विवाद पर सुप्रीम कोर्ट, प्रदूषण रोकने पर जोर

नई दिल्ली: दिल्ली-एनसीआर में पुराने वाहनों को लेकर लागू नियमों और प्रदूषण नियंत्रण से जुड़ा एक अहम मामला एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। इस बार एक बीएस-IV डीजल वोल्वो कार के मालिक ने पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल सर्टिफिकेट (PUCC) का नवीनीकरण नहीं होने को चुनौती देते हुए सर्वोच्च अदालत का दरवाजा खटखटाया है। […]

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Supreme Court
Gauravshali Bharat News
  • August 6, 2026 10:53 am IST, Published 41 minutes ago

नई दिल्ली: दिल्ली-एनसीआर में पुराने वाहनों को लेकर लागू नियमों और प्रदूषण नियंत्रण से जुड़ा एक अहम मामला एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। इस बार एक बीएस-IV डीजल वोल्वो कार के मालिक ने पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल सर्टिफिकेट (PUCC) का नवीनीकरण नहीं होने को चुनौती देते हुए सर्वोच्च अदालत का दरवाजा खटखटाया है। मामले की प्रारंभिक सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह याचिका पर सुनवाई करेगा, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि प्रदूषण के खिलाफ चल रही लड़ाई एक बड़े सार्वजनिक हित का विषय है और सभी नागरिकों को इसमें सहयोग करना चाहिए।

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश खन्ना ने याचिकाकर्ता की ओर से जल्द सुनवाई का अनुरोध किया। इस पर अदालत ने कहा कि मामले की सुनवाई के लिए उपयुक्त तारीख तय की जाएगी। हालांकि अदालत ने यह भी दोहराया कि पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल हैं।

याचिका में कहा गया है कि याचिकाकर्ता वाई.एन. भारद्वाज के बेटे की बीएस-IV मानक वाली डीजल वोल्वो XC-60 कार का पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल सर्टिफिकेट फरवरी में समाप्त हो गया था। इसके बाद जब प्रमाणपत्र का नवीनीकरण कराने की कोशिश की गई तो संबंधित केंद्रों ने यह कहते हुए नया प्रमाणपत्र जारी करने से इनकार कर दिया कि वाहन निर्धारित आयु सीमा से अधिक पुराना हो चुका है।

याचिकाकर्ता का कहना है कि PUCC नहीं मिलने के कारण वाहन को ईंधन भी उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। दिल्ली सरकार के नियमों के अनुसार वैध पॉल्यूशन सर्टिफिकेट के बिना पेट्रोल पंपों पर ईंधन नहीं दिया जा रहा, जिससे वाहन का उपयोग पूरी तरह प्रभावित हो गया है।

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश खन्ना ने अदालत का ध्यान सुप्रीम कोर्ट के पूर्व आदेशों की ओर दिलाया। उन्होंने दलील दी कि अदालत ने पहले अपने आदेश में संशोधन करते हुए यह स्पष्ट किया था कि केवल वाहन की आयु के आधार पर बीएस-IV या उससे उच्च उत्सर्जन मानक वाले वाहनों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। उनका कहना था कि मौजूदा स्थिति उसी आदेश की भावना के विपरीत दिखाई देती है।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व में पुराने पेट्रोल और डीजल वाहनों पर लगे प्रतिबंध से जुड़े आदेशों में संशोधन किया था। अदालत ने स्पष्ट किया था कि बीएस-IV और उससे उच्च उत्सर्जन मानकों वाले वाहनों के मामले में केवल वाहन की उम्र को आधार बनाकर कार्रवाई नहीं की जाएगी। इसी आदेश का हवाला देते हुए याचिकाकर्ता ने अदालत से राहत की मांग की है।

दूसरी ओर, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि पर्यावरण संरक्षण से जुड़े मामलों में संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। अदालत का कहना था कि नागरिकों के अधिकारों के साथ-साथ स्वच्छ वातावरण और प्रदूषण नियंत्रण भी समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। इसलिए इस तरह के मामलों में सभी पक्षों को व्यापक सार्वजनिक हित को ध्यान में रखना होगा।

यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए कई स्तरों पर सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। पुराने वाहनों, प्रदूषण जांच प्रणाली और ईंधन आपूर्ति से जुड़े नियमों को लेकर लगातार समीक्षा की जा रही है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का आगामी फैसला न केवल इस याचिका के लिए बल्कि समान परिस्थितियों वाले अन्य वाहन मालिकों के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। अब सभी की नजर अगली सुनवाई पर टिकी है, जहां अदालत PUCC नवीनीकरण, पुराने वाहनों से जुड़े नियमों और अपने पूर्व आदेशों की व्याख्या पर विस्तार से विचार करेगी।

 

 

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