लखनऊ/बलिया: उत्तर प्रदेश की राजनीति के लिए बुधवार का दिन बेहद भावुक और दुखद साबित हुआ। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के इकलौते विधायक और बलिया जिले की रसड़ा विधानसभा सीट से लगातार तीन बार निर्वाचित हुए उमाशंकर सिंह का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वे कैंसर से जूझ रहे थे और पिछले कुछ समय से दिल्ली के एक निजी अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। उपचार के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर सामने आते ही प्रदेश की राजनीति में शोक की लहर दौड़ गई।
उमाशंकर सिंह के पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए उनके लखनऊ स्थित आवास पर रखा गया, जहां बसपा प्रमुख मायावती ने पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान उन्होंने शोक संतप्त परिवार से मुलाकात कर सांत्वना भी दी। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता शिवपाल सिंह यादव भी दिवंगत विधायक के आवास पहुंचे और परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं। विभिन्न दलों के नेताओं, कार्यकर्ताओं और बड़ी संख्या में समर्थकों ने उन्हें अंतिम विदाई दी।
बसपा प्रमुख मायावती ने उमाशंकर सिंह के निधन को पार्टी के लिए अपूरणीय क्षति बताया। उन्होंने कहा कि उमाशंकर सिंह ने जब से बहुजन समाज पार्टी का दामन थामा, तब से पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ संगठन के लिए कार्य किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी पार्टी के साथ विश्वासघात नहीं किया और हमेशा अपने क्षेत्र तथा जनता की सेवा को प्राथमिकता दी। मायावती ने कहा कि लंबी बीमारी के कारण उनका निधन अत्यंत दुखद है। उन्होंने दिवंगत नेता की आत्मा की शांति की प्रार्थना करते हुए उनके परिवार को इस कठिन समय में धैर्य रखने की शक्ति मिलने की कामना की। बसपा प्रमुख ने कहा कि पार्टी उनके योगदान को हमेशा याद रखेगी।
उमाशंकर सिंह और मायावती के बीच केवल राजनीतिक संबंध ही नहीं, बल्कि एक पारिवारिक भावनात्मक रिश्ता भी था। बताया जाता है कि मायावती उन्हें हर वर्ष राखी बांधती थीं। यही कारण है कि उनके निधन को बसपा के लिए केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि व्यक्तिगत क्षति भी माना जा रहा है। पार्टी के नेताओं का कहना है कि उमाशंकर सिंह संगठन के सबसे भरोसेमंद नेताओं में शामिल थे।
उमाशंकर सिंह ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत छात्र राजनीति से की थी। शुरुआती दौर से ही वे सामाजिक सरोकारों और जनहित के मुद्दों पर सक्रिय रहे। धीरे-धीरे उन्होंने अपने क्षेत्र में मजबूत जनाधार तैयार किया और जनता के बीच एक लोकप्रिय जनप्रतिनिधि के रूप में पहचान बनाई।
साल 2012 में उन्होंने पहली बार रसड़ा विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर उत्तर प्रदेश विधानसभा में प्रवेश किया। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। वर्ष 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में भी उन्होंने लगातार जीत दर्ज की और क्षेत्र में अपनी मजबूत पकड़ साबित की।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 में बहुजन समाज पार्टी को उम्मीद के अनुरूप सफलता नहीं मिली थी। पूरे प्रदेश में पार्टी केवल एक सीट जीत सकी और वह सीट रसड़ा विधानसभा की थी, जहां से उमाशंकर सिंह विजयी हुए। इस जीत के साथ वे विधानसभा में बसपा के इकलौते विधायक बने।
ऐसे समय में जब पार्टी कठिन दौर से गुजर रही थी, उमाशंकर सिंह ने विधानसभा के भीतर और बाहर बसपा की आवाज बुलंद रखने का काम किया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद पार्टी के जनाधार को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उमाशंकर सिंह की पहचान केवल एक राजनेता के रूप में नहीं थी, बल्कि वे क्षेत्र में विकास कार्यों और जनसंपर्क के लिए भी जाने जाते थे। स्थानीय लोगों के अनुसार वे जनता की समस्याओं को सुनने और उनके समाधान के लिए हमेशा उपलब्ध रहते थे। शिक्षा, सड़क, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी सक्रियता की अक्सर सराहना होती थी।
समर्थकों का कहना है कि उन्होंने राजनीति को सेवा का माध्यम बनाया और हमेशा आम लोगों के बीच रहकर काम किया। यही कारण है कि उनके निधन की खबर सुनते ही बलिया सहित आसपास के जिलों में शोक का माहौल बन गया।

उमाशंकर सिंह के निधन पर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने शोक व्यक्त किया। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता शिवपाल सिंह यादव ने उनके आवास पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित की और परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि उमाशंकर सिंह का निधन प्रदेश की राजनीति के लिए बड़ी क्षति है।
अन्य दलों के नेताओं और सामाजिक संगठनों ने भी उनके निधन पर दुख जताते हुए उनके योगदान को याद किया। सोशल मीडिया पर भी हजारों लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके परिवार के प्रति संवेदनाएं व्यक्त कीं।
बसपा के लिए यह क्षति इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि वे विधानसभा में पार्टी के एकमात्र प्रतिनिधि थे। ऐसे में उनके निधन के बाद पार्टी के सामने राजनीतिक और संगठनात्मक दोनों स्तरों पर नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।