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आशीष मिश्रा की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, पहले ट्रायल कोर्ट जाएं

नई दिल्ली: वर्ष 2021 के चर्चित लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में आरोपी आशीष मिश्रा को सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल कोई अतिरिक्त राहत नहीं मिली है। शीर्ष अदालत ने उनकी जमानत की मौजूदा शर्तों में ढील देने से इनकार करते हुए स्पष्ट किया कि यदि उन्हें किसी प्रकार की अतिरिक्त राहत या शर्तों में संशोधन चाहिए, […]

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Supreme Court on LakhimpurKheri
Gauravshali Bharat News
  • August 6, 2026 1:05 pm IST, Published 2 hours ago

नई दिल्ली: वर्ष 2021 के चर्चित लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में आरोपी आशीष मिश्रा को सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल कोई अतिरिक्त राहत नहीं मिली है। शीर्ष अदालत ने उनकी जमानत की मौजूदा शर्तों में ढील देने से इनकार करते हुए स्पष्ट किया कि यदि उन्हें किसी प्रकार की अतिरिक्त राहत या शर्तों में संशोधन चाहिए, तो सबसे पहले संबंधित ट्रायल कोर्ट के समक्ष आवेदन करना होगा। अदालत ने यह भी कहा कि ट्रायल कोर्ट ही मामले की परिस्थितियों और कानूनी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए उचित फैसला लेने का सक्षम मंच है।

सुनवाई के दौरान आशीष मिश्रा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत के सामने दलील रखी कि मौजूदा जमानत शर्तों के कारण उन्हें कई महत्वपूर्ण पारिवारिक आयोजनों में शामिल होने का अवसर नहीं मिल पाया। उन्होंने बताया कि वह अपनी बेटियों के जन्मदिन जैसे पारिवारिक कार्यक्रमों में भी शामिल नहीं हो सके। इस आधार पर जमानत की शर्तों में कुछ और राहत देने की मांग की गई, ताकि पारिवारिक परिस्थितियों में उन्हें सीमित छूट मिल सके।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि ऐसी किसी भी राहत के लिए पहले ट्रायल कोर्ट का दरवाजा खटखटाना होगा। यदि परिस्थितियां उचित होंगी तो ट्रायल कोर्ट कानून के अनुरूप निर्णय ले सकता है। शीर्ष अदालत ने इस स्तर पर सीधे हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।

सुनवाई के दौरान मामले का एक और महत्वपूर्ण पहलू सामने आया। वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने ट्रायल की कार्यवाही को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष कुछ अहम गवाहों को अदालत में पेश नहीं कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि कई प्रत्यक्षदर्शी गवाह अब तक अदालत के सामने पेश नहीं किए गए हैं, जिससे मुकदमे की निष्पक्षता और गति दोनों प्रभावित हो सकती हैं।

इस पर भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि यदि किसी पक्ष को ट्रायल की प्रक्रिया, गवाहों की पेशी या अन्य किसी पहलू को लेकर शिकायत है, तो उसे पहले ट्रायल कोर्ट के समक्ष उठाया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि निचली अदालत ऐसे मामलों पर विचार करने और आवश्यक आदेश देने के लिए सक्षम है।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल आशीष मिश्रा की जमानत की मौजूदा शर्तों में किसी प्रकार का बदलाव नहीं किया जाएगा। यदि भविष्य में किसी विशेष परिस्थिति में राहत की आवश्यकता महसूस होती है, तो संबंधित अदालत के समक्ष आवेदन प्रस्तुत किया जा सकता है। इसके बाद ट्रायल कोर्ट उपलब्ध तथ्यों और कानून के आधार पर फैसला करेगा।

लखीमपुर खीरी हिंसा मामला अक्टूबर 2021 की उस घटना से जुड़ा है, जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा था। इस मामले में कई लोगों की जान गई थी और इसके बाद व्यापक राजनीतिक तथा कानूनी बहस छिड़ गई थी। जांच के बाद आशीष मिश्रा को आरोपी बनाया गया और बाद में उन्हें कुछ शर्तों के साथ जमानत मिली थी। समय-समय पर जमानत की शर्तों में राहत को लेकर अदालतों में याचिकाएं दायर होती रही हैं।

ताजा सुनवाई के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि सुप्रीम कोर्ट फिलहाल जमानत की शर्तों में सीधे बदलाव करने के पक्ष में नहीं है। अदालत का मानना है कि ऐसी मांगों पर पहले ट्रायल कोर्ट को विचार करना चाहिए। वहीं, ट्रायल की प्रक्रिया और गवाहों की पेशी से जुड़े मुद्दों पर भी संबंधित अदालत के समक्ष ही उचित आवेदन दायर करने की सलाह दी गई है।

अब इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया ट्रायल कोर्ट में जारी रहेगी। यदि जमानत की शर्तों में संशोधन या किसी विशेष अवसर पर राहत की मांग की जाती है, तो उस पर ट्रायल कोर्ट कानून के अनुसार निर्णय लेगा। इसी के साथ मुकदमे की सुनवाई और गवाहों की पेशी भी आने वाले समय में इस मामले की दिशा तय करेगी।

 

 

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