• होम
  • देश
  • रेप केस में दोषी तरुण तेजपाल, हाई कोर्ट फैसले के खिलाफ SC जाएंगे

रेप केस में दोषी तरुण तेजपाल, हाई कोर्ट फैसले के खिलाफ SC जाएंगे

मुंबई: ‘तहलका’ पत्रिका के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल को रेप मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा पीठ से बड़ा झटका लगा है। हाई कोर्ट ने निचली अदालत के बरी करने वाले फैसले को पलटते हुए उन्हें दोषी करार दिया है। अदालत ने भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत उन्हें दोषी मानते हुए […]

Advertisement
Gauravshali Bharat
Gauravshali Bharat News
  • August 6, 2026 2:40 pm IST, Published 1 hour ago

मुंबई: ‘तहलका’ पत्रिका के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल को रेप मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा पीठ से बड़ा झटका लगा है। हाई कोर्ट ने निचली अदालत के बरी करने वाले फैसले को पलटते हुए उन्हें दोषी करार दिया है। अदालत ने भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत उन्हें दोषी मानते हुए सजा तय करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई। इस फैसले के बाद तरुण तेजपाल ने कहा कि वह इस निर्णय को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे।

मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति नीला गोखले और न्यायमूर्ति अमित जमसांडेकर की खंडपीठ के समक्ष हुई। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और कानूनी पहलुओं पर विचार करने के बाद निचली अदालत के फैसले को सही नहीं माना और दोषसिद्धि का आदेश सुनाया। इसके साथ ही अदालत ने सजा पर फैसला सुनाने की प्रक्रिया भी शुरू की।

फैसले के दौरान तरुण तेजपाल स्वयं अदालत में मौजूद थे। उन्होंने अदालत से नरमी बरतने की अपील करते हुए अपनी उम्र और पारिवारिक परिस्थितियों का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि वह 62 वर्ष के हैं, दो बेटियों के पिता हैं और उनका परिवार उन पर निर्भर है। साथ ही उन्होंने दावा किया कि वह राजनीतिक साजिश का शिकार हुए हैं। उन्होंने अदालत को यह भी बताया कि उनके वकीलों ने उन्हें न्यायालय से नरम रुख अपनाने की प्रार्थना करने की सलाह दी है।

तरुण तेजपाल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आबाद पोंडा ने अदालत में कम से कम सजा देने का अनुरोध किया। उन्होंने यह भी मांग की कि दोषसिद्धि और सजा के प्रभाव पर कुछ समय के लिए रोक लगाई जाए ताकि सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर करने का अवसर मिल सके। बचाव पक्ष ने अदालत से कम से कम दस सप्ताह का समय देने की गुजारिश की।

वहीं, गोवा सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने अदालत से अधिकतम सजा देने की मांग करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में सख्त संदेश जाना जरूरी है। उनका कहना था कि महिलाओं की सहमति सर्वोपरि है और “नहीं” का अर्थ हमेशा “नहीं” ही होता है। उन्होंने अदालत से कानून के अनुसार कठोर दंड देने की अपील की।

अदालत ने तरुण तेजपाल को भारतीय दंड संहिता की धारा 376(2)(एफ), धारा 354(ए) और धारा 354(बी) के तहत दोषी ठहराया। इनमें सबसे गंभीर धारा 376(2)(एफ) उस स्थिति से संबंधित है, जब कोई व्यक्ति अपने पद, विश्वास या अधिकार का दुरुपयोग करते हुए यौन अपराध करता है। इस धारा के तहत न्यूनतम दस वर्ष की सजा का प्रावधान है, जबकि परिस्थितियों के अनुसार आजीवन कारावास भी दिया जा सकता है।

यह मामला वर्ष 2013 में गोवा में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान सामने आया था। आरोप था कि होटल की लिफ्ट में तरुण तेजपाल ने अपनी एक जूनियर महिला सहकर्मी के साथ यौन उत्पीड़न और दुष्कर्म किया। घटना के बाद मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना और लंबे समय तक अदालत में इसकी सुनवाई चलती रही।

साल 2021 में ट्रायल कोर्ट ने साक्ष्यों के आधार पर तरुण तेजपाल को बरी कर दिया था। हालांकि गोवा सरकार ने इस फैसले को चुनौती देते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट में अपील दायर की। अब हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को पलटते हुए उन्हें दोषी करार दिया है।

 

 

Advertisement