देश में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने वाली यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) प्रणाली को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। संसद में भुगतान और निपटान प्रणाली (संशोधन) विधेयक, 2027 पेश होने के बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या अब 2,000 रुपये से अधिक के UPI ट्रांजैक्शन पर अतिरिक्त शुल्क देना होगा। हालांकि, फिलहाल यह स्पष्ट करना जरूरी है कि अभी किसी भी प्रकार का शुल्क लागू नहीं हुआ है। विधेयक में केवल ऐसे प्रावधानों पर विचार का रास्ता खोला गया है, जिनके तहत भविष्य में मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू किया जा सकता है।
वर्तमान व्यवस्था के तहत आम उपभोक्ताओं के लिए UPI से भुगतान करना पूरी तरह नि:शुल्क है। यही वजह है कि पिछले कुछ वर्षों में भारत में डिजिटल भुगतान का दायरा तेजी से बढ़ा है। छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े कारोबारी प्रतिष्ठानों तक, लगभग हर जगह UPI भुगतान सामान्य माध्यम बन चुका है।
अब संसद में पेश किए गए संशोधन विधेयक ने चर्चा को नया मोड़ दिया है। प्रस्तावित प्रावधानों के अनुसार, सरकार और नियामक संस्थाएं भविष्य में कुछ विशेष श्रेणी के लेनदेन पर MDR लागू करने का अधिकार प्राप्त कर सकती हैं। चर्चा यह है कि 2,000 रुपये से अधिक के कुछ व्यावसायिक लेनदेन पर यह शुल्क लागू किया जा सकता है। हालांकि, शुल्क कितना होगा, किन लेनदेन पर लागू होगा और इसका भार ग्राहक उठाएगा या व्यापारी, इस संबंध में अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।
क्या होता है MDR?
मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) वह शुल्क होता है, जो किसी डिजिटल भुगतान को स्वीकार करने पर व्यापारी से लिया जाता है। आमतौर पर यह शुल्क बैंक, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर या अन्य भुगतान नेटवर्क के बीच बांटा जाता है। पहले डेबिट और क्रेडिट कार्ड भुगतानों पर MDR लागू होता था, लेकिन UPI को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने इसे शून्य रखा था।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल भुगतान नेटवर्क का संचालन, रखरखाव और तकनीकी विस्तार लगातार महंगा होता जा रहा है। ऐसे में लंबे समय से बैंक और भुगतान सेवा प्रदाता किसी न किसी रूप में शुल्क व्यवस्था लागू करने की मांग करते रहे हैं। दूसरी ओर सरकार का उद्देश्य डिजिटल भुगतान को सस्ता और आसान बनाए रखना भी है। इसलिए यदि भविष्य में कोई शुल्क व्यवस्था लागू होती है तो उसे संतुलित तरीके से लागू किया जा सकता है।
यह भी ध्यान देने योग्य है कि संसद में विधेयक पेश होने का अर्थ यह नहीं है कि नियम तुरंत प्रभाव से लागू हो जाएंगे। किसी भी संशोधन को कानून बनने से पहले संसद के दोनों सदनों से पारित होना होगा और उसके बाद अधिसूचना जारी की जाएगी। इसके बाद ही विस्तृत नियम और दिशा-निर्देश सामने आएंगे।
फिलहाल उपभोक्ताओं को घबराने की जरूरत नहीं है। सामान्य UPI भुगतान पहले की तरह जारी हैं और किसी अतिरिक्त शुल्क की घोषणा नहीं की गई है। यदि भविष्य में MDR लागू किया जाता है, तो सरकार और संबंधित नियामक संस्थाएं इसकी स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक करेंगी।
डिजिटल भुगतान प्रणाली भारत की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। ऐसे में किसी भी बदलाव का उद्देश्य भुगतान व्यवस्था को अधिक सुरक्षित, टिकाऊ और व्यवस्थित बनाना होगा। आने वाले समय में संसद में इस विधेयक पर होने वाली चर्चा और अंतिम निर्णय पर सभी की नजरें रहेंगी।