• होम
  • देश
  • अरुणाचल प्रदेश पर चीन को भारत का दो टूक जवाब, सच्चाई नहीं बदल सकती

अरुणाचल प्रदेश पर चीन को भारत का दो टूक जवाब, सच्चाई नहीं बदल सकती

नयी दिल्ली: भारत और चीन के बीच अरुणाचल प्रदेश को लेकर एक बार फिर कूटनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। चीन की ओर से भारत के दावे को स्वीकार नहीं किए जाने की बात सामने आने के बाद भारतीय विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न हिस्सा है। मंत्रालय ने […]

Advertisement
Gauravshali Bharat
Gauravshali Bharat News
  • August 11, 2026 5:26 pm IST, Published 1 hour ago

नयी दिल्ली: भारत और चीन के बीच अरुणाचल प्रदेश को लेकर एक बार फिर कूटनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। चीन की ओर से भारत के दावे को स्वीकार नहीं किए जाने की बात सामने आने के बाद भारतीय विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न हिस्सा है। मंत्रालय ने कहा कि यह एक निर्विवाद तथ्य है और किसी भी बयान या दावे से इस वास्तविकता को बदला नहीं जा सकता।

यह प्रतिक्रिया उस घटनाक्रम के बाद आई है, जिसमें भारत ने अरुणाचल प्रदेश के 27 स्थानों के नाम अपने आधिकारिक नक्शे में शामिल किए। चीन ने इस कदम पर आपत्ति जताते हुए भारतीय दावे को मान्यता नहीं देने की बात कही। इसके जवाब में भारत ने अपनी स्थिति दोहराते हुए कहा कि अरुणाचल प्रदेश को लेकर देश का रुख पूरी तरह स्पष्ट है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत चीन के साथ सीमा से जुड़े विषयों को बेहद गंभीरता से लेता है। भारत का लगातार यह मानना रहा है कि सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखना दोनों देशों के व्यापक संबंधों के लिए बेहद जरूरी है।विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत ने चीन के साथ बातचीत के दौरान बार-बार इस बात पर जोर दिया है कि सीमा पर शांति बनाए रखना दोनों देशों के हित में है। साथ ही सीमा क्षेत्रों की स्थिति का सीधा असर भारत-चीन के व्यापक द्विपक्षीय संबंधों पर पड़ता है।

इसलिए दोनों देशों के बीच बातचीत और मौजूदा व्यवस्थाओं के तहत संवाद जारी रखना महत्वपूर्ण है।रणधीर जायसवाल ने हाल में हुई भारत-चीन सीमा मामलों पर परामर्श एवं समन्वय के लिए कार्य तंत्र यानी WMCC की बैठक का भी उल्लेख किया। यह बैठक 6 अगस्त 2026 को हुई थी। बैठक में दोनों पक्षों ने सीमा से जुड़े मुद्दों पर बातचीत की और वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी LAC पर स्थिति की समीक्षा की। भारत और चीन के बीच सीमा विवाद लंबे समय से दोनों देशों के संबंधों में संवेदनशील विषय रहा है। खासतौर पर अरुणाचल प्रदेश को लेकर दोनों देशों के रुख में स्पष्ट अंतर है। भारत अरुणाचल प्रदेश को अपने क्षेत्र का हिस्सा मानता है, जबकि चीन इस क्षेत्र पर अपना दावा जताता रहा है।

भारत की ओर से लगातार यह कहा जाता रहा है कि किसी दूसरे देश के दावे या बयान से जमीन पर वास्तविक स्थिति नहीं बदलती। इसी नीति के तहत विदेश मंत्रालय ने भी अरुणाचल प्रदेश को लेकर भारत की स्थिति दोहराई है।

27 स्थानों के नाम भारतीय नक्शे में शामिल किए जाने को भी इसी व्यापक संदर्भ में देखा जा रहा है। भारत का मानना है कि अपने क्षेत्र के स्थानों का नामकरण और उनका आधिकारिक रिकॉर्ड बनाए रखना देश के प्रशासनिक अधिकारों का हिस्सा है। वहीं चीन ऐसे कदमों का विरोध करता रहा है। मौजूदा घटनाक्रम के बीच दोनों देशों के लिए सीमा पर तनाव को नियंत्रित रखना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत ने भी स्पष्ट किया है कि सीमा विवाद से जुड़े विषयों पर बातचीत के दौरान शांति और स्थिरता को प्राथमिकता दी जाती है।

WMCC जैसी व्यवस्थाएं दोनों देशों के अधिकारियों को सीमा से जुड़े मुद्दों पर सीधे संवाद का अवसर देती हैं। इन बैठकों में LAC की स्थिति, सीमा प्रबंधन और आपसी चिंताओं पर चर्चा की जाती है। भारत का कहना है कि बातचीत के माध्यम से सीमा क्षेत्रों में शांति बनाए रखना व्यापक द्विपक्षीय संबंधों के लिए जरूरी है। अरुणाचल प्रदेश पर चीन की आपत्ति के बीच भारत का ताजा बयान यह संकेत देता है कि नई दिल्ली अपने क्षेत्रीय दावे और संप्रभुता से जुड़े रुख में किसी तरह का बदलाव नहीं करने वाली है।

भारत सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए स्थापित संवाद तंत्र के जरिए बातचीत जारी रखने के पक्ष में है। आने वाले समय में दोनों देशों के बीच सीमा संबंधी वार्ताओं पर नजर बनी रहेगी। फिलहाल भारत ने स्पष्ट संदेश दिया है कि अरुणाचल प्रदेश को लेकर उसकी स्थिति स्थायी और स्पष्ट है तथा किसी बाहरी दावे से इसे बदला नहीं जा सकता।

 

Advertisement