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दिल्ली के AIIMS-सफदरजंग में रातभर क्यों लगी मरीजों की कतार?

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के दो बड़े सरकारी अस्पतालों—अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) और सफदरजंग अस्पताल—में इलाज कराने आने वाले मरीजों और तीमारदारों को इन दिनों लंबी कतारों और भारी भीड़ का सामना करना पड़ रहा है। हालात ऐसे हैं कि कई मरीज इलाज की उम्मीद में रातभर अस्पताल परिसर और उसके बाहर अपनी बारी […]

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  • August 13, 2026 11:48 pm IST, Published 13 minutes ago

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के दो बड़े सरकारी अस्पतालों—अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) और सफदरजंग अस्पताल—में इलाज कराने आने वाले मरीजों और तीमारदारों को इन दिनों लंबी कतारों और भारी भीड़ का सामना करना पड़ रहा है। हालात ऐसे हैं कि कई मरीज इलाज की उम्मीद में रातभर अस्पताल परिसर और उसके बाहर अपनी बारी का इंतजार करते दिखाई दे रहे हैं। सामने आई ग्राउंड रिपोर्ट ने राजधानी की स्वास्थ्य व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, AIIMS के बाहर देर रात तक मरीजों की लंबी लाइन देखी गई। रात करीब 1:30 बजे तक अस्पताल के बाहर लगभग 300 लोग कतार में मौजूद थे। इनमें कई मरीज ऐसे थे जो दूर-दराज के इलाकों से इलाज की उम्मीद लेकर राजधानी पहुंचे थे। वहीं, दिल के मरीजों और अन्य गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों के लिए इंतजार की स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण दिखाई दी।

रात बढ़ती गई, लेकिन कम नहीं हुई मरीजों की भीड़

अस्पतालों में आमतौर पर ओपीडी के लिए दिन के समय भीड़ रहती है, लेकिन जब मरीज और उनके परिजन रात में भी अस्पताल के बाहर लाइन लगाने को मजबूर हों तो यह व्यवस्था की गंभीर चुनौती को दर्शाता है। ग्राउंड रिपोर्ट में बताया गया कि AIIMS के बाहर मरीजों की लाइन करीब एक किलोमीटर तक लंबी हो गई थी।

कई लोग फुटपाथ पर रात बिताते नजर आए। कुछ मरीज और तीमारदार बारिश के बीच भी अपनी जगह बचाने की कोशिश करते रहे। अस्पताल में इलाज कराने आए लोगों के लिए सबसे बड़ी चिंता यह थी कि लंबा इंतजार करने के बाद उनका नंबर कब आएगा और डॉक्टर से जांच कब हो पाएगी।

राजधानी के इन प्रमुख अस्पतालों में देश के अलग-अलग हिस्सों से मरीज पहुंचते हैं। गंभीर और जटिल बीमारियों के इलाज के लिए AIIMS और सफदरजंग को बड़ी संख्या में लोग बेहतर विकल्प मानते हैं। यही वजह है कि इन संस्थानों पर मरीजों का दबाव लगातार बना रहता है।

रोजाना हजारों मरीज पहुंचते हैं AIIMS

रिपोर्ट में AIIMS में रोजाना औसतन करीब 7,200 मरीजों के ओपीडी में पहुंचने का उल्लेख किया गया है। इतनी बड़ी संख्या में मरीजों के पहुंचने से पंजीकरण, अपॉइंटमेंट, जांच और डॉक्टर से परामर्श की व्यवस्था पर स्वाभाविक रूप से दबाव बढ़ता है।

मरीजों की संख्या और उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं के बीच संतुलन बनाना अस्पताल प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है। खासतौर पर उन मरीजों के लिए परेशानी अधिक बढ़ जाती है जिन्हें विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श की आवश्यकता होती है।

दूर-दराज से आने वाले मरीज अक्सर समय और पैसे की बचत के लिए एक ही दिन में इलाज की प्रक्रिया पूरी करना चाहते हैं। लेकिन जब पंजीकरण या अपॉइंटमेंट के लिए लंबा इंतजार करना पड़े तो उन्हें राजधानी में अतिरिक्त समय रुकना पड़ता है। इससे आर्थिक और मानसिक दोनों तरह का दबाव बढ़ता है।

ऑनलाइन अपॉइंटमेंट व्यवस्था मजबूत करने पर जोर

अस्पताल प्रशासन की ओर से ऑनलाइन अपॉइंटमेंट और पंजीकरण व्यवस्था को मजबूत करने की बात कही जा रही है। डिजिटल सिस्टम के जरिए मरीजों को पहले से समय उपलब्ध कराने की कोशिश की जा सकती है, जिससे अस्पताल के बाहर रातभर लाइन लगाने की जरूरत कम हो।

हालांकि, डिजिटल व्यवस्था की अपनी चुनौतियां भी हैं। ग्रामीण और छोटे शहरों से आने वाले कई मरीज ऑनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया से पूरी तरह परिचित नहीं होते। ऐसे मरीजों के लिए अस्पताल में सहायता केंद्र और सरल पंजीकरण व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।

इसके अलावा गंभीर मरीजों, बुजुर्गों और ऐसे लोगों के लिए अलग व्यवस्था की जरूरत होती है जिन्हें लंबे समय तक लाइन में खड़ा रहना मुश्किल होता है। अस्पतालों में मरीजों की स्थिति के आधार पर प्राथमिकता तय करने की व्यवस्था भी भीड़ को नियंत्रित करने में मदद कर सकती है।

सफदरजंग अस्पताल में भी दिखा दबाव

AIIMS के साथ सफदरजंग अस्पताल भी दिल्ली के प्रमुख सरकारी अस्पतालों में शामिल है। यहां भी बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। सरकारी अस्पतालों में अपेक्षाकृत कम खर्च में इलाज उपलब्ध होने के कारण इन संस्थानों पर मरीजों का दबाव बना रहता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, सरकारी अस्पतालों पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए केवल बड़े अस्पतालों की क्षमता बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, जिला अस्पतालों और अन्य सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों को भी मजबूत करना जरूरी है, ताकि सामान्य बीमारियों और शुरुआती स्तर के मामलों का इलाज स्थानीय स्तर पर हो सके।

यदि मरीजों को अपने जिले या आसपास के अस्पताल में पर्याप्त जांच और उपचार की सुविधा मिल जाए तो दिल्ली के बड़े संस्थानों में पहुंचने वाले मरीजों की संख्या कम की जा सकती है।

मरीजों की परेशानी ने खड़े किए कई सवाल

रातभर अस्पताल के बाहर कतार में खड़े मरीजों की तस्वीरें स्वास्थ्य व्यवस्था की जमीनी स्थिति को सामने लाती हैं। सवाल यह है कि अगर किसी मरीज को इलाज की जरूरत है तो उसे पंजीकरण या डॉक्टर से मिलने के लिए कितनी देर तक इंतजार करना पड़ेगा?

दूसरा महत्वपूर्ण सवाल यह है कि गंभीर मरीजों और सामान्य ओपीडी मरीजों के बीच प्राथमिकता कैसे तय की जा रही है। लंबी कतारों के बीच बुजुर्ग, दिव्यांग, गर्भवती महिलाएं और गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीजों को विशेष सुविधा देना जरूरी हो जाता है।

अस्पतालों में बढ़ती भीड़ केवल दिल्ली की समस्या नहीं है। देश के कई बड़े सरकारी अस्पतालों में सीमित संसाधनों के मुकाबले मरीजों की संख्या अधिक होने की चुनौती सामने आती रही है। ऐसे में डिजिटल अपॉइंटमेंट, टोकन सिस्टम, अतिरिक्त ओपीडी स्लॉट, हेल्प डेस्क और रेफरल सिस्टम जैसे उपाय महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

क्या होगा समाधान?

AIIMS और सफदरजंग जैसे बड़े संस्थानों पर दबाव कम करने के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को कई स्तरों पर मजबूत करना होगा। ऑनलाइन पंजीकरण को आसान बनाने के साथ-साथ अस्पताल परिसर में सहायता केंद्र बढ़ाने की जरूरत है। मरीजों को पहले से स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए कि किस विभाग में कब और कैसे संपर्क करना है।

इसके अलावा ओपीडी में मरीजों की संख्या के अनुसार डॉक्टरों और कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित करना भी जरूरी है। पीक समय में अतिरिक्त काउंटर और अतिरिक्त स्टाफ की व्यवस्था लंबी कतारों को कम कर सकती है।

फिलहाल रातभर अस्पतालों के बाहर इलाज की उम्मीद में इंतजार करते मरीजों की तस्वीरें यही सवाल उठा रही हैं कि देश की राजधानी में अत्याधुनिक चिकित्सा संस्थानों तक पहुंच कितनी आसान है। अस्पताल प्रशासन की ऑनलाइन व्यवस्था को मजबूत करने की कोशिशें यदि जमीन पर प्रभावी ढंग से लागू होती हैं, तो मरीजों और उनके परिजनों को लंबी कतारों से काफी राहत मिल सकती है।

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