नई दिल्ली। मोबाइल फोन पर लाइव टीवी, समाचार, खेल और अन्य वीडियो कंटेंट देखने के लिए अब तक इंटरनेट या मोबाइल डेटा कनेक्शन की जरूरत पड़ती रही है। लेकिन भारत में Direct-to-Mobile यानी D2M तकनीक इस व्यवस्था को बदलने की दिशा में आगे बढ़ रही है। सार्वजनिक प्रसारक प्रसार भारती D2M के व्यावसायिक इस्तेमाल की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाने की तैयारी में है। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, प्रसार भारती अक्टूबर 2026 के दौरान D2M के कमर्शियल रोलआउट के लिए Request for Proposal (RFP) जारी कर सकता है। हालांकि, RFP जारी होने का मतलब यह नहीं है कि सेवा तुरंत पूरे देश में शुरू हो जाएगी।
क्या है D2M तकनीक?
D2M यानी Direct-to-Mobile Broadcasting ऐसी तकनीक है, जिसके माध्यम से वीडियो, ऑडियो और अन्य डिजिटल कंटेंट को पारंपरिक मोबाइल इंटरनेट नेटवर्क के बजाय ब्रॉडकास्ट सिग्नल के जरिए सीधे मोबाइल डिवाइस तक पहुंचाया जा सकता है।
इसकी तुलना रेडियो प्रसारण से की जा सकती है। जैसे रेडियो सुनने के लिए हर व्यक्ति के लिए अलग इंटरनेट कनेक्शन की जरूरत नहीं होती, उसी तरह D2M में ब्रॉडकास्ट नेटवर्क से एक ही सिग्नल बड़ी संख्या में संगत मोबाइल डिवाइस तक पहुंचाया जा सकता है।
इस तकनीक का संभावित इस्तेमाल लाइव टीवी, न्यूज, खेल प्रसारण, मनोरंजन सामग्री, शैक्षणिक कार्यक्रम और आपातकालीन अलर्ट जैसे कंटेंट के लिए किया जा सकता है। इससे खास तौर पर उन क्षेत्रों में डिजिटल कंटेंट की पहुंच बढ़ाने की संभावना है, जहां इंटरनेट कनेक्टिविटी सीमित रहती है।
प्रसार भारती क्यों बढ़ा रहा है कदम?
D2M को लेकर भारत में पिछले कुछ वर्षों से तकनीकी परीक्षण और नीति स्तर पर काम चल रहा है। प्रसार भारती ने IIT कानपुर के साथ मिलकर अगली पीढ़ी की ब्रॉडकास्ट तकनीक के लिए रोडमैप तैयार करने पर भी काम किया है।
प्रसार भारती की 2024-25 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, D2M का Proof of Concept (PoC) सफलतापूर्वक पूरा किया गया था और इसके बाद राष्ट्रीय स्तर पर तैनाती से संबंधित रिपोर्ट और सिफारिशें मंत्रालय को सौंपी गई थीं। रिपोर्ट में D2M को सार्वजनिक सेवा के रूप में लागू करने से संबंधित प्रक्रिया का भी उल्लेख है।
अब तकनीकी परीक्षणों के बाद परियोजना के व्यावसायिक मॉडल और आगे की तैनाती पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।
बिना इंटरनेट कैसे चलेगा लाइव टीवी?
D2M का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यही है कि इसमें कंटेंट की डिलीवरी के लिए सामान्य मोबाइल डेटा कनेक्शन पर निर्भरता कम हो सकती है। प्रसारण नेटवर्क से सिग्नल भेजा जाएगा और D2M तकनीक से लैस या अनुकूलित मोबाइल डिवाइस उसे रिसीव कर सकेगा।
इसका मतलब यह नहीं है कि हर मौजूदा स्मार्टफोन अपने आप D2M चलाने लगेगा। इसके लिए डिवाइस में आवश्यक हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर सपोर्ट होना जरूरी होगा। यही वजह है कि D2M की सफलता में मोबाइल फोन निर्माताओं और डिवाइस इकोसिस्टम की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
हालिया रिपोर्टों में भी डिवाइस कम्पैटिबिलिटी और व्यावसायिक मॉडल को D2M के अगले चरण के महत्वपूर्ण मुद्दों में शामिल किया गया है।
तकनीकी परीक्षणों में क्या सामने आया?
D2M तकनीक के सामने एक अहम सवाल यह था कि ब्रॉडकास्ट सिग्नल मोबाइल नेटवर्क की सामान्य सेवाओं को प्रभावित तो नहीं करेगा। जून 2026 में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, D2M तकनीक के नए प्रयोगशाला और फील्ड परीक्षणों में इसे मोबाइल टेलीफोनी सेवाओं के साथ संचालित करने की क्षमता का परीक्षण किया गया। रिपोर्ट में बताया गया कि परीक्षणों में वॉयस कॉल और SMS सेवाओं में व्यवधान नहीं पाया गया।
इन परीक्षणों के बाद परियोजना को आगे बढ़ाने की दिशा में तकनीकी आधार मजबूत हुआ है। हालांकि, देशव्यापी व्यावसायिक विस्तार के लिए तकनीकी परीक्षणों के अलावा नेटवर्क, स्पेक्ट्रम, डिवाइस सपोर्ट, निवेश और व्यावसायिक मॉडल जैसे कई पहलुओं पर अंतिम निर्णय जरूरी होगा।
RFP जारी होना क्यों है महत्वपूर्ण?
RFP यानी Request for Proposal किसी परियोजना के अगले व्यावसायिक चरण के लिए कंपनियों या संभावित साझेदारों से प्रस्ताव आमंत्रित करने की प्रक्रिया होती है। D2M के मामले में RFP जारी होना इस बात का संकेत होगा कि परियोजना तकनीकी परीक्षणों से आगे बढ़कर व्यावसायिक क्रियान्वयन की दिशा में जा रही है।
हालिया उद्योग रिपोर्टों के अनुसार, प्रसार भारती D2M के लिए RFP तैयार कर रहा है और इसे अक्टूबर में जारी किए जाने की संभावना बताई गई है। हालांकि, RFP की तारीख, अंतिम साझेदार, व्यावसायिक ढांचा और सेवा की वास्तविक लॉन्च टाइमलाइन को आधिकारिक रूप से स्पष्ट किया जाना बाकी है।
आम मोबाइल यूजर्स पर क्या होगा असर?
यदि D2M का व्यापक व्यावसायिक मॉडल सफल होता है, तो मोबाइल यूजर्स के लिए लाइव कंटेंट देखने का एक वैकल्पिक माध्यम विकसित हो सकता है। खासकर लाइव न्यूज, खेल प्रतियोगिताओं या बड़े सार्वजनिक प्रसारण के दौरान एक साथ बड़ी संख्या में लोगों तक कंटेंट पहुंचाने में ब्रॉडकास्ट मॉडल उपयोगी हो सकता है।
इंटरनेट नेटवर्क पर एक ही कंटेंट को बड़ी संख्या में लोग देखते हैं तो प्रत्येक यूजर के लिए डेटा ट्रैफिक पैदा होता है। इसके विपरीत ब्रॉडकास्ट व्यवस्था में एक सिग्नल को बड़ी संख्या में रिसीवर तक पहुंचाया जा सकता है। यही D2M की तकनीकी संभावनाओं में से एक है।
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि D2M भारत में व्यावसायिक तैनाती की दिशा में आगे बढ़ रहा है, लेकिन इसे तत्काल देशभर में शुरू हुई सेवा मानना सही नहीं होगा। आगे की तस्वीर RFP, चयनित साझेदारों, तकनीकी व्यवस्था और संगत मोबाइल डिवाइस की उपलब्धता के बाद ज्यादा स्पष्ट होगी।