फर्रुखाबाद में गंगा का तांडव, हाईवे डूबा; 44 हजार लोग बेहाल

फर्रुखाबाद। उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद में गंगा नदी के उफान ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। लगातार बढ़ते जलस्तर और तेज कटान के कारण फर्रुखाबाद-बदायूं स्टेट हाईवे का एक हिस्सा पानी में डूब गया है। सड़क पर कई जगह करीब दो से तीन फीट तक पानी भरने की वजह से यातायात रोकना […]

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  • August 15, 2026 11:59 pm IST, Published 25 minutes ago

फर्रुखाबाद। उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद में गंगा नदी के उफान ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। लगातार बढ़ते जलस्तर और तेज कटान के कारण फर्रुखाबाद-बदायूं स्टेट हाईवे का एक हिस्सा पानी में डूब गया है। सड़क पर कई जगह करीब दो से तीन फीट तक पानी भरने की वजह से यातायात रोकना पड़ा है। प्रशासन ने बैरिकेडिंग कर लोगों को जलमग्न हिस्से में जाने से रोक दिया है। बाढ़ का असर इतना व्यापक है कि 62 गांवों के 44 हजार से ज्यादा लोगों के सामने घर छोड़ने की नौबत आ गई है।

हाईवे पर दो से तीन फीट पानी, यातायात बंद

गंगा के जलस्तर में तेजी से बढ़ोतरी के बाद फर्रुखाबाद-बदायूं स्टेट हाईवे पर कई स्थानों पर पानी भर गया है। रिपोर्ट के मुताबिक दो जगह करीब 100 से 150 मीटर तक सड़क जलमग्न हो चुकी है। पानी की गहराई दो से तीन फीट तक बताई जा रही है। ऐसे में किसी हादसे की आशंका को देखते हुए पुलिस ने बैरिकेडिंग कर वाहनों की आवाजाही रोक दी है।

हाईवे बंद होने के कारण फर्रुखाबाद से बदायूं जाने वाले लोगों को वैकल्पिक रास्ते का सहारा लेना पड़ रहा है। इससे यात्रियों को करीब 14 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है। स्थानीय लोगों के लिए यह स्थिति परेशानी बढ़ाने वाली है, क्योंकि बाढ़ प्रभावित गांवों से निकलना पहले ही मुश्किल बना हुआ है।

62 गांवों में बाढ़ का असर, हजारों लोग प्रभावित

गंगा के बढ़े जलस्तर का सबसे ज्यादा असर नदी के आसपास बसे गांवों पर पड़ा है। रिपोर्ट के अनुसार 62 गांव बाढ़ की चपेट में हैं और 44 हजार से अधिक लोग प्रभावित बताए जा रहे हैं। अमृतपुर तहसील क्षेत्र में बड़ी संख्या में गांव बाढ़ के पानी से घिरे हुए हैं। कई स्थानों पर ग्रामीणों को सुरक्षित जगहों पर जाने की सलाह दी जा रही है।

बाढ़ सिर्फ रास्तों और खेतों तक सीमित नहीं रही है। कई घरों में पानी पहुंच गया है और ग्रामीणों को अपना सामान सुरक्षित स्थानों पर ले जाने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। कुछ परिवार घरों की छतों पर रहने को मजबूर हैं, जबकि कई लोग रिश्तेदारों या राहत शिविरों का रुख कर चुके हैं।

राहत शिविरों में भी पहुंचने लगा बाढ़ का पानी

बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए बनाए गए राहत शिविर भी अब दबाव में हैं। कुछ राहत शिविरों के आसपास पानी पहुंचने लगा है। ऐसे में बच्चों और महिलाओं को दूसरे सुरक्षित शिविरों में भेजा जा रहा है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि कुछ लोग राहत शिविरों में पर्याप्त जगह नहीं मिलने के कारण घरों की छतों या सड़क किनारे अस्थायी इंतजाम करके रह रहे हैं।

सबसे बड़ी चुनौती साफ पेयजल, भोजन और जरूरी सामान की उपलब्धता को लेकर है। बाढ़ के पानी से घिरे इलाकों में नाव के जरिए राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है। ग्रामीणों के मुताबिक पानी के बीच जहरीले जीव-जंतुओं का खतरा भी बढ़ गया है। इससे बच्चों और बुजुर्गों को लेकर चिंता और बढ़ गई है।

गंगा ने बदली धारा, कटान से घरों पर खतरा

फर्रुखाबाद में इस बार बाढ़ के साथ गंगा का कटान भी गंभीर समस्या बन गया है। रिपोर्ट के अनुसार नदी अपनी मूल धारा से करीब 1.5 किलोमीटर दूर बह रही है। तेज कटान के कारण अब तक कई घर ढह चुके हैं। एक रिपोर्ट में 32 घरों के ढहने की जानकारी दी गई है।

गंगा के लगातार कटान से नदी किनारे रहने वाले परिवारों के सामने भविष्य को लेकर भी चिंता पैदा हो गई है। जिन इलाकों में हर साल बाढ़ आती है, वहां ग्रामीण लंबे समय से स्थायी सुरक्षा उपायों की मांग करते रहे हैं। इससे पहले भी फर्रुखाबाद क्षेत्र में गंगा के कटान और बाढ़ के कारण घरों और खेती की जमीन को नुकसान पहुंचता रहा है।

चित्रकूट गांव में चारों तरफ पानी का संकट

बाढ़ प्रभावित चित्रकूट गांव की स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण बताई जा रही है। गांव के आसपास और भीतर पानी भरने से लोगों का सामान्य आवागमन प्रभावित है। स्थानीय लोगों के अनुसार कई घर पानी से घिर गए हैं और कुछ परिवार मजबूरी में छतों पर रह रहे हैं।

गांव के पास बनाए गए राहत शिविर में भी पानी पहुंचने लगा है। पहले से मौजूद लोगों के लिए सुरक्षित स्थान बनाए रखने के साथ नए प्रभावित परिवारों को भी शिफ्ट करना प्रशासन के लिए चुनौती बन गया है। बच्चों और महिलाओं को प्राथमिकता के आधार पर सुरक्षित शिविरों में भेजा जा रहा है।

NDRF और PAC की टीमें राहत-बचाव में जुटीं

हालात बिगड़ने के बाद राहत और बचाव अभियान को तेज किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार NDRF की टीम को भी बुलाया गया है। वहीं PAC के जवान नाव और स्टीमर की मदद से पानी में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने में जुटे हैं।

प्रशासन की ओर से जलमग्न रास्तों पर निगरानी रखी जा रही है। पुलिस लोगों को जोखिम वाले इलाकों में जाने से रोक रही है। बाढ़ की स्थिति को देखते हुए ग्रामीणों से नदी और तेज बहाव वाले क्षेत्रों से दूरी बनाए रखने की अपील की जा रही है।

हर साल डूबता है हाईवे, स्थायी समाधान की मांग

स्थानीय लोगों के लिए फर्रुखाबाद-बदायूं स्टेट हाईवे का बाढ़ में डूबना नई समस्या नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार पिछले साल भी यह सड़क कई दिनों तक बाढ़ के पानी से प्रभावित रही थी। ग्रामीणों का कहना है कि हर साल गंगा का जलस्तर बढ़ने पर सड़क और आसपास के गांवों में पानी भर जाता है।

इस बार बड़ी संख्या में लोगों के प्रभावित होने के कारण प्रशासन के सामने राहत और पुनर्वास की चुनौती बढ़ गई है। ग्रामीण चाहते हैं कि बाढ़ से तत्काल राहत देने के साथ-साथ कटान रोकने और सड़क को सुरक्षित रखने के लिए स्थायी इंतजाम किए जाएं।

फिलहाल फर्रुखाबाद में गंगा का बढ़ता जलस्तर प्रशासन और ग्रामीणों दोनों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। हाईवे पर यातायात रोक दिया गया है, राहत-बचाव टीमें सक्रिय हैं और प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का प्रयास जारी है। आने वाले दिनों में जलस्तर घटता है या स्थिति और गंभीर होती है, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।

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