नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश-जापान निवेश सम्मेलन 2026 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भारत और जापान के बीच आर्थिक एवं तकनीकी सहयोग को नई ऊंचाई देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के संबंध केवल व्यापार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनकी जड़ें साझा इतिहास, संस्कृति और परंपराओं से भी जुड़ी हैं। सम्मेलन में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और जापान के यामानाशी प्रांत के गवर्नर कोटारो नागासाकी समेत कई प्रमुख प्रतिनिधि मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश और जापान के बीच संबंधों को मजबूत करने की व्यापक संभावनाएं हैं। उन्होंने जापान को ‘उगते सूरज की भूमि’ बताते हुए उत्तर प्रदेश को सूर्यवंश की परंपरा से जुड़ी भूमि बताया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश भगवान श्रीराम, भगवान श्रीकृष्ण और भगवान बुद्ध की धरती है और यहां निवेश, उद्योग तथा तकनीकी सहयोग के लिए बड़े अवसर मौजूद हैं।
योगी आदित्यनाथ ने जापान की तकनीकी और औद्योगिक क्षमताओं की सराहना करते हुए कहा कि जापान के पास सटीकता, गुणवत्ता, आधुनिक तकनीक, शोध एवं विकास और विनिर्माण क्षेत्र में लंबा अनुभव है। जापान की ‘काइजन’ कार्यसंस्कृति लगातार सुधार और बेहतर गुणवत्ता पर केंद्रित है। दूसरी ओर उत्तर प्रदेश के पास बड़ी आबादी, विशाल बाजार, कुशल श्रमशक्ति, बेहतर होती आधारभूत संरचना और निवेश को प्रोत्साहित करने वाली नीतियां हैं।
मुख्यमंत्री के अनुसार, इन दोनों पक्षों की क्षमताओं का मेल उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास को नई गति दे सकता है। इससे मैन्युफैक्चरिंग, एमएसएमई, स्किल डेवलपमेंट, रिसर्च एंड डेवलपमेंट तथा लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जापानी कंपनियों के लिए उत्तर प्रदेश में काम करने के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया जा रहा है।
योगी आदित्यनाथ ने निवेशकों को कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक व्यवस्था में हुए सुधारों का भी भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार स्पष्ट नीतियों और बेहतर कारोबारी माहौल के माध्यम से निवेश को बढ़ावा दे रही है। सरकार का उद्देश्य उद्योगों के लिए ऐसा वातावरण तैयार करना है, जहां निवेशकों को आवश्यक सुविधाएं और सहयोग समय पर उपलब्ध हो सकें।

सम्मेलन में मुख्यमंत्री ने ‘जापान सिटी’ विकसित किए जाने की योजना का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में जापानी निवेशकों और कंपनियों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए एक विशेष जापान सिटी विकसित की जा रही है। इसमें औद्योगिक गतिविधियों के साथ आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है। इससे जापानी कंपनियों के लिए राज्य में निवेश और कारोबार का आधार मजबूत होने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री ने भारत-जापान साझेदारी को विकास, तकनीक और समृद्धि से जोड़ते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश लगातार आर्थिक बदलाव की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि पिछले नौ वर्षों में राज्य के बजट, सकल राज्य घरेलू उत्पाद और प्रति व्यक्ति आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
योगी ने कहा कि इसी अवधि में महिलाओं की कार्यबल में भागीदारी भी पहले की तुलना में कई गुना बढ़ी है। उन्होंने उत्तर प्रदेश को देश की अर्थव्यवस्था के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देने वाला राज्य बताते हुए कहा कि प्रदेश एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
उत्तर प्रदेश-जापान निवेश सम्मेलन का उद्देश्य दोनों पक्षों के बीच निवेश और औद्योगिक सहयोग के नए अवसर तलाशना है। खासतौर पर मैन्युफैक्चरिंग, तकनीक, एमएसएमई, कौशल विकास, अनुसंधान और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में संभावित साझेदारी पर जोर दिया जा रहा है।
सम्मेलन में सामने आया दृष्टिकोण यह है कि जापान की तकनीकी विशेषज्ञता और उत्तर प्रदेश के बड़े बाजार तथा मानव संसाधन को एक साथ लाकर नए औद्योगिक अवसर तैयार किए जा सकते हैं। इससे राज्य में रोजगार के अवसर बढ़ाने, स्थानीय उद्योगों को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से जोड़ने और तकनीकी क्षमता मजबूत करने में मदद मिल सकती है।