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जौहर यूनिवर्सिटी मामले में ईडी की बड़ी कार्रवाई, 10 ठिकानों पर छापे

रामपुर: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री आजम खान से जुड़े ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बुधवार को छापेमारी की। यह कार्रवाई रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय और उससे जुड़े ट्रस्ट की कथित वित्तीय अनियमितताओं तथा संदिग्ध फंडिंग की जांच के सिलसिले में की जा रही है। जांच […]

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  • August 19, 2026 10:42 am IST, Published 4 hours ago

रामपुर: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री आजम खान से जुड़े ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बुधवार को छापेमारी की। यह कार्रवाई रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय और उससे जुड़े ट्रस्ट की कथित वित्तीय अनियमितताओं तथा संदिग्ध फंडिंग की जांच के सिलसिले में की जा रही है। जांच एजेंसी की कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत बताई जा रही है।

जानकारी के मुताबिक, ईडी की टीमें उत्तर प्रदेश के रामपुर और सहारनपुर के अलावा दिल्ली समेत करीब 10 ठिकानों पर पहुंचीं। अधिकारियों की टीम ने सुबह करीब सात बजे अलग-अलग स्थानों पर कार्रवाई शुरू की। छापेमारी के दौरान वित्तीय दस्तावेज, लेनदेन से संबंधित रिकॉर्ड और फंडिंग से जुड़े कागजात खंगाले जा रहे हैं। जांच का प्रमुख उद्देश्य यह पता लगाना है कि विश्वविद्यालय और उससे जुड़े संस्थानों के लिए धन कहां से आया और उसका इस्तेमाल किस तरह किया गया।

जौहर विश्वविद्यालय लंबे समय से राजनीतिक और कानूनी विवादों के केंद्र में रहा है। विश्वविद्यालय की स्थापना आजम खान से जुड़े ट्रस्ट द्वारा की गई थी। इसके निर्माण और जमीन से जुड़े मामलों में पहले भी कई तरह के आरोप और जांच सामने आ चुकी हैं। अब ईडी की कार्रवाई कथित संदिग्ध वित्तीय लेनदेन और धन के स्रोत की जांच पर केंद्रित है।

सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसी ने स्थानीय पुलिस से आजम खान के आपराधिक मामलों और संबंधित रिकॉर्ड की जानकारी मांगी थी। जानकारी उपलब्ध नहीं होने के बाद ईडी की टीम ने स्वयं रामपुर पहुंचकर दस्तावेजों की जांच शुरू की। हालांकि, छापेमारी के दौरान जांच एजेंसी को क्या-क्या दस्तावेज या अन्य सामग्री मिली, इसकी आधिकारिक विस्तृत जानकारी फिलहाल सामने नहीं आई है।

जौहर विश्वविद्यालय को लेकर हाल के महीनों में प्रशासनिक स्तर पर भी कार्रवाई हुई थी। विश्वविद्यालय की कई इमारतों को लेकर नियामकीय और निर्माण संबंधी सवाल उठे थे। रामपुर विकास प्राधिकरण की ओर से विश्वविद्यालय परिसर की 38 इमारतों को गिराने का आदेश दिए जाने के बाद मामला अदालत तक पहुंच गया था। प्रशासन की ओर से इमारतों को खाली करने के लिए भी समय दिया गया था।

हालांकि, इस कार्रवाई को फिलहाल कानूनी राहत मिल चुकी है। मुरादाबाद कमिश्नर कोर्ट ने रामपुर विकास प्राधिकरण के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। मामले में अगली सुनवाई 25 अगस्त को प्रस्तावित है। उस सुनवाई के बाद विश्वविद्यालय की इमारतों से जुड़े विवाद में आगे की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।

ईडी की मौजूदा कार्रवाई को विश्वविद्यालय से जुड़े वित्तीय मामलों के व्यापक परीक्षण के तौर पर देखा जा रहा है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि विश्वविद्यालय के निर्माण और संचालन के लिए किस-किस स्रोत से धन प्राप्त हुआ। इसके साथ ही कथित तौर पर संदिग्ध लेनदेन, वित्तीय अनियमितताओं और फंडिंग के दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है।

आजम खान लंबे समय से उत्तर प्रदेश की राजनीति में प्रभावशाली नेता रहे हैं और जौहर विश्वविद्यालय उनकी प्रमुख परियोजनाओं में शामिल है। ऐसे में ईडी की छापेमारी राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि, जांच एजेंसी की कार्रवाई के आधार पर किसी व्यक्ति या संस्था को दोषी नहीं माना जा सकता। आरोपों की पुष्टि जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया के बाद ही होगी।

फिलहाल ईडी की टीमें अलग-अलग स्थानों पर दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच कर रही हैं। कार्रवाई पूरी होने के बाद एजेंसी की ओर से बरामद दस्तावेजों, संदिग्ध लेनदेन या आगे की कानूनी कार्रवाई को लेकर जानकारी सामने आ सकती है। विश्वविद्यालय से जुड़े निर्माण और प्रशासनिक विवाद की सुनवाई भी 25 अगस्त को होने वाली है, जिससे इस पूरे मामले में अगला कानूनी घटनाक्रम तय होगा।

 

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