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वाराणसी पहुंचा 308 पहियों वाला ट्रक, एथेनॉल वेसल देखने उमड़ी लोगों की भीड़

इससे पहले बिहार में भी इस भारी कंसाइनमेंट को निकालने के दौरान विशेष इंतजाम करने पड़े थे। कुछ स्थानों पर रेलवे ओवरब्रिज और बिजली लाइनों के कारण सुरक्षा उपाय अपनाए गए थे। अब वाराणसी में इसके गुजरने को लेकर भी प्रशासन के सामने

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Gauravshali Bharat News
  • September 28, 2026 6:00 pm IST, Published 1 hour ago

वाराणसी: सड़कों पर इन दिनों एक विशालकाय ट्रक लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। 308 पहियों वाला यह विशेष मल्टी-एक्सल ट्रक करीब 200 टन वजनी भारी औद्योगिक वेसल को लेकर आगे बढ़ रहा है। चंदौली की ओर से उत्तर प्रदेश में प्रवेश करने के बाद यह महाकाफिला अब वाराणसी की सीमा में पहुंच चुका है। रामनगर क्षेत्र की सर्विस रोड पर इसके रुकने की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। भारी-भरकम ट्रक को देखने के लिए आसपास के लोगों में भी उत्सुकता बनी हुई है|

यह कोई सामान्य मालवाहक ट्रक नहीं है। करीब 100 फीट लंबे इस विशेष ट्रेलर में 308 पहिए लगाए गए हैं, ताकि अत्यधिक वजन को कई एक्सल में बांटकर सड़क पर सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ाया जा सके। ट्रक पर लदा विशाल वेसल विदेश से भारत लाया गया है और इसे सड़क मार्ग के जरिए उत्तर प्रदेश के औद्योगिक प्रोजेक्ट तक पहुंचाया जा रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक यह भारी उपकरण बेल्जियम से समुद्री रास्ते के जरिए ओडिशा के पारादीप बंदरगाह पहुंचा था। वहां से इसे झारखंड और बिहार होते हुए उत्तर प्रदेश लाया गया है।

इस विशाल काफिले की रफ्तार सामान्य वाहनों की तुलना में काफी कम है। भारी वजन और आकार के कारण इसे बेहद सावधानी से आगे बढ़ाया जा रहा है। चंदौली से वाराणसी तक पहुंचने में भी काफिले को काफी समय लगा। बारिश और सड़क पर कीचड़ जैसी परिस्थितियों ने इसकी गति को और प्रभावित किया। यह ट्रक कई जगहों पर एक दिन में लगभग 10 से 12 किलोमीटर की दूरी ही तय कर पा रहा है। अब वाराणसी में इसके सुरक्षित आवागमन को लेकर प्रशासन और संबंधित विभाग विशेष निगरानी कर रहे हैं।

वाराणसी में इस भारी वाहन के सामने सबसे बड़ी चुनौती सड़क पर मौजूद ढांचागत संरचनाएं हैं। रूट की जांच के दौरान पाया गया कि कुछ फुटओवर ब्रिज इसकी राह में बाधा बन सकते हैं। इसके चलते तीन फुटओवर ब्रिज के कुछ हिस्सों को अस्थायी रूप से हटाने की योजना बनाई गई है, ताकि विशाल मशीन को सुरक्षित तरीके से आगे निकाला जा सके। वाहन के गुजरने के बाद इन संरचनाओं को दोबारा तैयार किए जाने की बात सामने आई है। इसके अलावा रास्ते में बिजली के तारों, पुलों, मोड़ों और सड़क की चौड़ाई की भी तकनीकी जांच की जा रही है।

इतने बड़े काफिले को निकालने के लिए पुलिस, हाईवे पेट्रोलिंग टीम, एनएचएआई और तकनीकी विशेषज्ञों की निगरानी भी रखी जा रही है। रास्ते में जहां सड़क संकरी है, वहां आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। काफिले के आगे पायलट वाहन भी चल रहे हैं, ताकि रास्ते की स्थिति पर नजर रखी जा सके और किसी तरह की बाधा आने पर तत्काल व्यवस्था की जा सके।

इससे पहले बिहार में भी इस भारी कंसाइनमेंट को निकालने के दौरान विशेष इंतजाम करने पड़े थे। कुछ स्थानों पर रेलवे ओवरब्रिज और बिजली लाइनों के कारण सुरक्षा उपाय अपनाए गए थे। अब वाराणसी में इसके गुजरने को लेकर भी प्रशासन के सामने चुनौती है, क्योंकि वाहन का आकार सामान्य यातायात व्यवस्था से काफी अलग है। यही वजह है कि इसके रूट को लेकर पहले से इंजीनियरिंग जांच और ट्रैफिक प्रबंधन की तैयारी की जा रही है।

308 पहियों वाला यह ‘बाहुबली ट्रक’ जिस औद्योगिक वेसल को लेकर चल रहा है, उसका इस्तेमाल चीनी मिल और एथेनॉल से जुड़े औद्योगिक संयंत्र में किया जाना है। विदेश से लाई गई इस भारी मशीन को सड़क मार्ग से उसके अंतिम गंतव्य तक पहुंचाना अपने आप में एक बड़ी लॉजिस्टिक चुनौती है।

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