नई दिल्ली। देशभर में आज करवा चौथ का पर्व श्रद्धा, आस्था और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। हिंदू धर्म में इस त्योहार का विशेष महत्व है। उत्तर भारत सहित देश के कई हिस्सों में विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के साथ व्रत रखती हैं। इस दिन महिलाएं सुबह सरगी ग्रहण करने के बाद उपवास शुरू करती हैं और शाम को विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर चंद्रमा के दर्शन के बाद व्रत खोलती हैं।
करवा चौथ के अवसर पर सुबह से ही घरों में उत्सव का माहौल देखने को मिल रहा है। महिलाएं पारंपरिक परिधान पहनकर सोलह श्रृंगार करती हैं। हाथों में मेहंदी, लाल चुनरी, चूड़ियां और पूजा की थाली इस पर्व की खास पहचान हैं। कई स्थानों पर महिलाएं एक साथ एकत्र होकर करवा चौथ की कथा सुनती हैं और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करती हैं।
करवा चौथ की तैयारियां कई घरों में एक दिन पहले से ही शुरू हो जाती हैं। सुबह सूर्योदय से पहले महिलाएं सरगी खाती हैं। इसमें फल, मिठाइयां, सूखे मेवे और अन्य खाद्य पदार्थ शामिल किए जाते हैं। परंपरा के अनुसार, सास अपनी बहू को सरगी देती है। हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में इस परंपरा का तरीका अलग हो सकता है।
दिनभर व्रत रखने के बाद महिलाएं शाम को भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश और करवा माता की पूजा करती हैं। इस दौरान करवा चौथ की कथा सुनने और पूजा की थाली सजाने की परंपरा भी निभाई जाती है। मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक व्रत और पूजा करने से वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।
करवा चौथ पर शाम की पूजा के बाद महिलाओं को चंद्रमा निकलने का इंतजार रहता है। नई दिल्ली में आज पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5:38 बजे से 6:56 बजे तक है, जबकि चंद्रमा के निकलने का अनुमानित समय रात 8:17 बजे बताया गया है। अलग-अलग शहरों में चंद्रोदय का समय अलग हो सकता है।
चंद्रमा दिखाई देने पर महिलाएं छलनी से चंद्रमा और फिर अपने पति का चेहरा देखती हैं। इसके बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर पति के हाथों से जल ग्रहण कर व्रत खोलने की परंपरा निभाई जाती है। कई परिवारों में पति भी अपनी पत्नी के प्रति प्रेम और साथ निभाने के संकल्प के प्रतीक के रूप में इस व्रत में भाग लेते हैं।
करवा चौथ केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं, बल्कि पति-पत्नी के बीच प्रेम, विश्वास और समर्पण को व्यक्त करने का अवसर भी है। बदलते समय के साथ इस त्योहार का स्वरूप भी बदल रहा है। अब कई दंपती एक-दूसरे के लिए व्रत रखते हैं और वैवाहिक जीवन में समानता, सहयोग तथा आपसी सम्मान को महत्व देते हैं।
त्योहार की खुशियों के बीच स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी जरूरी है। लंबे समय तक बिना पानी के उपवास करना सभी के लिए उपयुक्त नहीं होता। गर्भवती महिलाओं, मधुमेह से पीड़ित लोगों और नियमित दवाएं लेने वालों को व्रत रखने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
करवा चौथ का संदेश यही है कि रिश्तों की मजबूती केवल परंपराओं से नहीं, बल्कि एक-दूसरे की भावनाओं को समझने, सम्मान देने और हर परिस्थिति में साथ निभाने से बनती है।