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ग्राहम स्टेन्स हत्याकांड में दारा सिंह की रिहाई पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टेन्स और उनके दो नाबालिग बेटों की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे दारा सिंह उर्फ रवींद्र कुमार पाल की समयपूर्व रिहाई के आवेदन पर ओडिशा के सेंटेंस रिव्यू बोर्ड को अंतिम अवसर दिया है। अदालत ने निर्देश दिया है कि बोर्ड 2 सितंबर […]

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Supreme Court
Gauravshali Bharat News
  • August 19, 2026 4:10 pm IST, Published 20 minutes ago

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टेन्स और उनके दो नाबालिग बेटों की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे दारा सिंह उर्फ रवींद्र कुमार पाल की समयपूर्व रिहाई के आवेदन पर ओडिशा के सेंटेंस रिव्यू बोर्ड को अंतिम अवसर दिया है। अदालत ने निर्देश दिया है कि बोर्ड 2 सितंबर तक इस मामले में निर्णय लेकर उसकी जानकारी सुप्रीम कोर्ट को दे।

जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस विजय बिश्नोई की पीठ के समक्ष बुधवार को सुनवाई के दौरान बताया गया कि दारा सिंह की समयपूर्व रिहाई को लेकर अभी तक कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। अदालत ने इस देरी पर नाराजगी जताई और स्पष्ट किया कि निर्णय लेने में लगातार हो रही देरी स्वीकार नहीं की जाएगी।

पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा सरकार को 19 अगस्त तक इस मामले में निर्णय लेने का निर्देश दिया था। हालांकि, निर्धारित समय तक फैसला नहीं हो सका। सुनवाई के दौरान राज्य की ओर से बताया गया कि दारा सिंह के गृह राज्य उत्तर प्रदेश से उसके पुराने रिकॉर्ड और अन्य आवश्यक जानकारी मांगी गई है। S

राज्य के वकील ने जेल और सुधार सेवाओं के महानिदेशालय की ओर से भेजा गया पत्र भी अदालत के सामने रखा। इस पर पीठ ने स्पष्ट किया कि संबंधित विभागों के बीच संवाद और प्रक्रिया अपनी जगह है, लेकिन अदालत यह चाहती है कि निर्धारित समय में फैसला लिया जाए।

अदालत ने मौखिक रूप से कहा कि सेंटेंस रिव्यू बोर्ड को जो भी निर्णय लेना है, वह ले। यदि बोर्ड निर्णय लेने में विफल रहता है तो सुप्रीम कोर्ट स्वयं याचिका पर फैसला कर सकता है। पीठ ने यह भी कहा कि निर्णय से बचने की प्रवृत्ति स्वीकार नहीं की जा सकती।

दारा सिंह ने अपनी याचिका में समयपूर्व रिहाई और सजा में रियायत की मांग की है। याचिका के मुताबिक, वह 25 वर्ष से अधिक समय जेल में रह चुका है। उसकी दलील है कि मौजूदा नीतियों और सुधारात्मक न्याय के सिद्धांतों को देखते हुए उसके मामले पर रिहाई के लिए विचार किया जाना चाहिए।

दारा सिंह को 2003 में निचली अदालत ने मौत की सजा सुनाई थी। इसके बाद 2005 में उड़ीसा हाईकोर्ट ने उसकी मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया। सुप्रीम कोर्ट ने 2011 में हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा था।

याचिका में दारा सिंह ने दावा किया है कि अपराध के समय उसकी उम्र कम थी और वह आवेश में था। उसने यह भी कहा है कि अब उसे अपने किए पर पछतावा है और वह सुधारात्मक न्याय के सिद्धांत के तहत समाज में एक बदले हुए व्यक्ति के रूप में लौटने का अवसर चाहता है। उसने अपने पक्ष में सुप्रीम कोर्ट के 2022 के उस फैसले का भी उल्लेख किया है, जिसमें राजीव गांधी हत्याकांड के दोषियों की समयपूर्व रिहाई का रास्ता साफ किया गया था।

यह मामला 22 जनवरी 1999 की उस भयावह घटना से जुड़ा है, जब ओडिशा के क्योंझर जिले के मनोहरपुर गांव में ग्राहम स्टेन्स और उनके दो बेटे वाहन में सो रहे थे। भीड़ ने वाहन में आग लगा दी थी। घटना में ग्राहम स्टेन्स और उनके 10 वर्षीय बेटे फिलिप तथा 6 वर्षीय बेटे टिमोथी की मौत हो गई थी।

अब सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 2 सितंबर को तय की है। तब तक सेंटेंस रिव्यू बोर्ड को दारा सिंह की समयपूर्व रिहाई के आवेदन पर अपना निर्णय अदालत के समक्ष रखना होगा। यदि बोर्ड निर्धारित समय में फैसला नहीं करता है, तो सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया है कि वह स्वयं मामले पर निर्णय ले सकता है।

 

 

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